चंद्रमा की लावा गुफाओं में घूमेंगे ESA के बनाए हुए गोलाकर रोबोट, जानिए क्यों

चंद्रमा (Moon) पर खोजी गईं लावा ट्यूब (Lava Tube) के अध्ययन के लिए ESA ने खास गोलाकार रोबोट विकसित करवाए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

चंद्रमा (Moon) पर खोजी गईं लावा ट्यूब (Lava Tube) के अध्ययन के लिए ESA ने खास गोलाकार रोबोट विकसित करवाए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

चंद्रमा (Moon) पर मौजूद लावा की गुफाएं (Lava caves) इंसानों के लिए बहुत सुरक्षित मानी जा रही है. यूरोपीय स्पेस एजेंसी इन गुफाओं में गोलाकर रोबोट (Spherical Robot) भेजने की तैयारी कर रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 5:25 PM IST
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चंद्रमा (Moon) पर मानव बेस कैम्प और रिसर्च सेंटर बनाने पर काम चल रहा है. वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह के नीचे ऐसी सुरंगों (Tunnels) की पहचान की है जिनमें कभी लावा भरा रहता था. इन दुर्भल स्थानों के अन्वेषण के लिए यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) एक खास तरह का गोलाकार रोबोट (Spherical Robot) विकसित कर रही है. इस स्वचलित रोबोट को चंद्रमा की सतह पर मौजूद गुफाओं में उतारेगा जो लोगों की विकिरणों, चरम तपामान और उल्कापिंडों से रक्षा करेंगी.

क्या काम करेगा रोबोट

डीसेंट एंड एक्सप्लोरेशन इन डीप ऑटोनॉमी ऑफ लूनार अंडरग्राउंड स्ट्रक्चर्स (DAEDALUS) नाम का यह रोबोट क्रेन मशीन के जरिए गुफाओं में पहुंचाया जाएगा. ईएसए का यह भी मानना है कि इन गुफाओं में पानी की बर्फ जमा हो सकती हैं. यह स्वचालित रोबोट इन गुफाओं की हालत का जायजा ले सकेगा. इसके साथ ही स्टीरियोस्कोपिक कैमरा, थ्री डी मैपिंग वाले इस रोबोट को जर्मन और इटली की यूनिवर्सिटी ने डिजाइन किया है.

कब भेजे जाएंगे इन गुफाओं में रोबोट
इस रोबोट को साल 2022 के अंत में नासा के लूनार रेकोनायसेंस ऑर्बिटर  EL3 के पहले पेलोड सिलेक्शन के द्वारा पहचानी गई गुफाओं में भेजने की योजना है. यह रोबोट एक हैम्सटर बॉल से मिलता जुलाता है लेकिन इसमें कैमरे के अलावा तापमान सेंसर्स, रेडिएशन डोजीमीटर और थ्रीडी मैपिंग के लिए LiDAR सिस्टम लगा होगा.

भुजाओं की खास भूमिका

ईएसए का कहना है कि इस रोबोट में 360 डिग्री दृश्य क्षमता के साथ फैलने वाली भुजाएं भी होंगी जो इनके रास्ते में बाधा बनकर आए पत्थरों को हटाने का काम भी कर सकेंगी. डैडालस टीम के सदस्य डोरिट बोरमैन का कहना है कि यह डिजाइन चंद्रमा के माहौल में रोबोट के इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा करेगी.



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यह खास रोबोट ईएसए (ESA) ने चंद्रमा के लिए ही विकसित किए हैं. (तस्वीर: @ESA_Tech)


अपने आप गुफा में घूमेंगे रोबोट

इस गोल रोबोट का व्यास 46 सेंटीमीटर है और क्रेन इसे गुफाओं में रस्सी की मदद से उतरने काम करेगी इसके बाद यह क्रेन से अलग हो जाएगा और गुफा की सतह पर स्वचालित घूमेगा. रस्सी से बंधने से इसके दो कनेक्शन हो जाएंगे. क्योंकि यह वाईफाई रिसीवर और वायरलेस चार्जिंग भी कर सकेगा. क्रेन के सौर पैनल से रोबोट गुफा के अंदर ही चार्ज हो सकेंगे.

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सुरंगों की उपयोगिता

इस पर अध्ययन करने वाली यूनिवर्सिटी रोबोट की फौज तैनात करने पर भी विचार कर रही हैं. चंद्रमा पर लावा ट्यूब वहां इंसान के रहने के लिहाज से बहुत ज्यादा उपयोगी हैं क्योंकि सतह के ऊपर तो अंतरिक्ष से आने वाले विकिरणों के कारण रहना संभव नहीं है. इसलिए लावा ट्यूब इंसान के रहने के लिए चंद्रमा पर बहुत ही उपयुक्त हो सकती हैं.

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अब तो चंद्रमा (Moon) पर इंसान बसाने और उत्खनन की तैयारियां भी होने लगी हैं (फाइल फोटो)


चंद्रमा पर खनन

पिछले कुछ समय से चंद्रमा पर खनन की चर्चाएं जोरों पर हैं और नासा तो इसके लिए कानून बनाने के प्रारूप तक प्रस्तुत कर चुका है. चंद्रमा पर खास तरह का पानी जिसे ड्यूटेरियम हाइड्रोजन का पानी कहते हैं, प्रचुर मात्रा है जो पृथ्वी पर नहीं के बराबर है . चंद्रमा पर खनन के लिए बहुत से देश अब चंद्रमा पर जाने की तैयारी में हैं.

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इसके अलावा चंद्रमा पर नासा अपना एक बेस कैम्प बनाना चाहता है, जहां लोग लंबे समय के लिए ठहर सकें. इसमें मंगल और सुदूर अंतरिक्ष से आने वाले यात्री प्रमुख रूप से ठहर सकेंगे. दूसरी तरफ चीन और रूस मिलकर चंद्रमा इंटरनेशनल रिसर्च स्टेशन का निर्माण करेंगे.
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