ESA भेजेगी अंतरिक्ष में केवल लकड़ी का सैटेलाइट, जानिए कैसे होगा ये संभव

यह पहली बार होगा कि अंतरिक्ष में पूरी तरह लकड़ी से बना सैटेलाइट (Wooden Satellite) भेजा जाएगा. (तस्वीर: ESA)

European Space Agancy इस साल के अंत तक न्यूजीलैंड से पूरी तरह लकड़ी का सैटेलाइट प्रक्षेपित करेगी.

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    अंतरिक्ष अनुसंधान में इन दिनों नए तरह के प्रयोग हो रहे हैं. इसमें लकड़ी से बने सैटेलाइट (Wooden Satellite) की भी चर्चा है. पिछले साल खबर आई थी जापान इस तरह का एक सैटेलाइट तैयार कर रहा है. लेकिन अब यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने घोषणा की है कि वह बहुत छोटा सा, लेकिन पूरी तरह से लकड़ी का बना सैटेलाइट इस साल के अंत में अंतरिक्ष में पहुंचाएगा. इसे न्यूजीलैंड (New Zealand) से लॉन्च किया जाएगा. लकड़ी का सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजना एक नया विचार तो है ही यह पूरी तरह से नई और उन्नत तकनीक है क्योंकि ऐसा करना कम चुनौतीपूर्ण नहीं है.

    कितना बड़ा है यह सैटेलाइट
    इस सैटेलाइट को WISA वुडसैट कहा जा रहा है जिसे आर्कटिक एस्ट्रोनॉटिक्स ने डिजाइन किया  है. क्यूब के आकार का यह सैटेलाइट हर तरफ से केवल चार इंच चौड़ा है. इसे खास किस्म की कोटेड प्लायवुड से बनाया जाएगा और इसका वजन केवल एक किलोग्राम से भी कम होगा.

    सैटेलाइट पर निगरानी
    इस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में एक रॉकेट लैब इलेक्ट्रॉन रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा. अंतरिक्ष में भी इस सैटेलाइट पर दो कैमरों के द्वारा नजर रखी जाएगी जो इसी सैटेलाइट से सेल्फी स्टिक की तरह बाहर निकलेंगे. इन दो कैमरों पर निगरानी से वैज्ञानिकों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि यह अंतरिक्ष के रूखे और निर्मम हालात से कैसी प्रतिक्रिया करता है.

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    हाल के सालों में सैटेलाइट (Satellite) को लेकर बहुत से प्रयोग हो रहे हैं. (तस्वीर: JAXA)


    और ये खासियतें भी
    कैमरों के अलावा सैटेलाइट में कुछ दबाव के सेंसर भी लगाए जाएंगे जो उसके छिद्रों में दबाव की निगरानी रखेंगे. इसके साथ ही वे अंतरिक्ष में तारों की  थ्रीडी प्रिंटिंग को समझने वाला प्रयोग भी करेंगे. पूरे सैटेलाइट को नौ सोलर सेल्स से ऊर्जा मिलेगी. इतना ही नहीं सैटेलाइट में एक अव्यवसायी रेडियो पेलोड भी होगा जो दुनिया भर से शौकिया लोगों को रेडियो संकेत और तस्वीरों को भेजने का मौका देगा.ॉ

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    चार साल पहले की गई थी परिकल्पना
    ईएसए के मेटरियल्स फिजिक्स एंड कैमिस्ट्री सेक्शन के प्रमुख रिकार्डो रैमपिनी ने बयान में कहा कि यह एक कड़ा शेड्यूल है, लेकिन उनकी टीम ने उड़ान की उपयुक्तता में मदद करने बदले वुडसैट पेलोड के योगदान का स्वागत किया. वुडसैट की अवधारणा आर्कटिक एस्ट्रोनॉटिक्स के सह संस्थापक जारी मैकिनेन की थी जिन्होंने पहली बार संतापमंडल में लकड़ी के सैटेलाइट उड़ाने के बारे में साल 2017 में सोचा था.

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    आमतौर पर सैटेलाइट (Satellite) एल्यूमीनियम के ही बनाए जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    सैटेलाइट का पदार्थ
    आमतौर पर सैटेलाइट के लिए पदार्थ का चुनाव एल्यूमीनियम के इर्दगिर्द ही घूमता है क्योंकि वह हलका होने के साथ ही मजबूत भी होता  है. लेकिन वुडसैट का आधार ब्रिच नाम की लकड़ी का बना है जिसे खास कैमिकल ट्रीटमेंट दिया गया है. सामान्य हालातों में प्लायवुड अंतरिक्ष के लिए बहुत नमी से भरी होती है. इसलिए इसे सुखाने के लिए शोधकर्ताओं ने इस लकड़ी को थर्मल वैक्यूम चैंबर में रखा था.

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    सतही परत पर उपचार
    इसके अलावा शोधकर्तों ने एल्यूमीनियम ऑक्साइड की एक परमाणविक परत भी चढ़ाई  जिससे लकड़ी के अंदर की नमी बाहर ना निकले जिससे इस परत पर परमाणु ऑक्सीन से जंग लगने से सुरक्षा हो सके. विशेषज्ञों का कहना है कि वे लकड़ी के कुछ हिस्सों पर दूसरे वार्निश और रोगन का परीक्षण भी करेंगे.

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