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ESA ने जारी की मंगल के रहस्यमी बादलों की तस्वीर, साथ ही खोला उसका रहस्य

मंगल ग्रह (Mars) पर यह रहस्यमी बादल (Cloud) वास्तव में हर साल दिखता है. (तस्वीर: @esascience)

मंगल ग्रह (Mars) पर यह रहस्यमी बादल (Cloud) वास्तव में हर साल दिखता है. (तस्वीर: @esascience)

यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने मंगल ग्रह (Mars) के रहस्यमयी बादल (Mysterious Cloud) की तस्वीरें जारी की हैं जो हर साल बनते हैं. पहली बार इनबादलों के बनने का रहस्य भी सुलझा है.

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    इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने मंगल ग्रह (Msrs) की कुछ तस्वीरें जारी की थीं. इन तस्वीरों में एक अप्रत्याशित बादल (Cloud) दिखाई दे रहा है. यह बहुत ही बड़ा बादल मंगल के आर्सिया मोन्स (Arsia) ज्वालामुखी (Volcano) के ठीक ऊपर दिख रहा है. मजेदार बात यह है कि इस तरह का रहस्मयी पूंछ वाला बादल पहली बार नहीं दिखाई दिया है बल्कि यह हर साल दिखाई देता है.

    पहली बार सुलझा इसका रहस्य
    इस अनोखी तस्वीर को लेकर माना जा रहा है कि मंगल ग्रह के बारे में और अधिक लेकिन महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है. लोगों के लिए यह बादल भले ही कौतूहल जगाता दिख रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह बिलकुल नया या अनजाना नहीं है. लेकिन यह पहली बार जरूर है कि वे इसे पैदा होने की गुत्थी को सुलझाने में सफल होते दिख रहे हैं.

    पहले लगती थी कुछ और वजह
    इतना ही नहीं वे यह भी पता लगाने में कामयाब हो गए हैं कि यह एक ही जगह पर एक ही समय में क्यों पैदा होता है. आर्शिया मोन्स पर यह एक बहुत ही लंबा पतला बर्फला बादल है जो आर्शिया मोन्स ज्वालामुखी से लेकर ओलिम्पस मोन्स ज्वालामुखी तक जाता है जो मंगल ही नहीं पूरे सौरमंडल का सबसे ऊंचा पर्वत है. पहले यह माना जा रहा था कि यह बादल ज्वलामुखी प्रस्फोटों के कारण बनता है जैसे कि देखने पर लगता है.

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    मंगल ग्रह के इस बादल (Mysterious Cloud) के निर्माण प्रक्रिया अब तक समझी नहीं जा सकी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    वास्तव में ऐसे बनता है ये बादल
    इस बादल को ध्यान से देखने पर पता चला कि इसके एक पीछे की प्रक्रिया ज्वालामुखी पर हवा की दिशा वाले ढाल पर होती है, जब आसपास की नम हवा ऊपर उठती है. इसके बाद यह हवा संघनित अवस्था में आकर और ज्यादा ऊपर उठती है और पर्याप्त रूप से ठंडी ऊंचाइयों पर आ जाती है. एक बार बादल अपनी सीमा तक पहुंचते थे तो वे अपनी मूल स्थिति में से निकल कर हवा के कारण पश्चिम में चले जाते हैं.

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    कितना लंबा चौड़ा है ये बादल
    ये बादल लंबे समय तक नहीं टिकते है, बल्कि अगली सुबह ही ये वाष्पीकृत हो जाते हैं जब तापमान बदलता है. स्पेस के मुताबिक पृथ्वी पर पर्वतीय बादल कभी इतने बड़े या गतिक नहीं होते जैसे मंगल के बादल होते हैं. ये बादल 1800 किलोमीटर लंबा है और 150 किलोमीटर चौड़ा है. यह रुकने से पहले 600 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति तक बढ़ता है.

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    ESA के मार्स एक्प्लोरर इस बादल (Mysterious Cloud) की विस्तार से जानकारी निकाली. (तस्वीर: @esascience)


    गहराई से हुआ है शोध
    यह बादल हर साल साउदर्न सोल्सटाइस, यानि जब सूर्य मंगल के आकाश में सबसे दक्षिण में स्थिति होता है, के समय बनता है और लगभग हर 80 दिन में फिर से दिखाई देता है. इस अध्ययन में बादल के जीवनचक्र का गहराई से शोध हुआ है. इसलिए अब नासा के मंगल उपग्रहों के लिए इस बादल का अवलोकन करना आसान होगा.

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    इस समय मंगल पर उसके अध्ययन के लिए नासा के ही सबसे ज्यादा उपकरण, या उपग्रह हैं. उसके कम से कम तीन उपग्रह अंतरिक्ष से उस पर निगाह जमाए हैं, तो वहीं नासा का पर्सवियरेंस रोवर भी पिछले महीने ही मंगल के जजीरो क्रेटर पर उतरा है. लेकिन यह आर्शिया मोना से काफी दूर है. लेकिन मंगल पर ईएसए के मार्स एक्प्लोरर ने इस बादल की तस्वीरें ली हैं.

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