ESA ने जारी की भावी अभियानों की Themes, गहरे अंतरिक्ष में जाने की है तैयारी

यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने 2035 से 2050 तक अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों की थीम घोषित की है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: B. Godart/shutterstock)

European Space Agnecy ने भविष्य में अपने अंतरिक्ष अभियानों (Space Missions) की रूपरेखा तय की है जिनसे बड़े ग्रहों के साथ हमारी मिल्वी वे (Milky Way) गैलेक्सी का अध्ययन होगा.

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    हाल ही में नासा ने शुक्र ग्रह के लिए दो अभियानों को स्वीकृत किया लेकिन गुरू और नेप्च्यून के चंद्रमाओं के लिए अभियान फिलहाल खारिज कर दिए. अब यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने अपने अंतरिक्ष अभियानों (Space Missions) की थीम जारी की है जिन पर वह साल 2035 से लेकर 2050 के बीच ध्यान केंद्रित करेगी. इसमें बड़े ग्रहों के चंद्रमाओं (Moons of Big Giant planets) के साथ बर्फीले चंद्रमा पर एक लैंडर या ड्रोन भेजना भी शामिल है.

    ये अन्वेषण करेंगे अभियान
    इस दौरान ऐसे अभियान भी भेजे जाएंगे जो हमारी मिल्की वे गैलेक्सी और उनमें मौजूद बाह्यग्रहों को समझने पर केंद्रित होंगे. वहीं शुरुआती ब्रह्माण्ड को समझने के लिए यान और उपकरण भी भेजे जाएंगे. लंबी योजनाओं का निवेश आणविक घड़ी के विकास के लिए ठंडी परमाणु इंटरफेरोमैट्री, लंबी दूरी को शक्ति या ऊर्जा प्रदान करने की क्षमता विकसित करने, और भविष्य के नमूने लाने वाले अभियानों के ले बर्फ की क्रायोजेनिक नमूने संरक्षित करने की तकनीक के लिए किए जाएगें.

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    यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के अंतरिक्ष अभियान उसकी इसी तरह की पूर्वनियोजित थीम के अनुसार चलाए जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    यह होगा इन अभियानों का दायरा
    इन विषयों में अगले तीन बड़े स्तर के अभियान, भविष्य के मध्यम स्तर के अभियान और लंबे समय के लिए तकनीकी विकास के लिए अनुशंसा करने पर ध्यान दिया जाएगा. मध्यम स्तर के अभियान अंतरिक्ष विज्ञान के सभी दायरों को शामिल करेंगे जिसमें खगोलविज्ञान, सैद्धांतिक भौतिकी, खगोलमिती (खगोलीय पिंडों की दूरी और स्थिति के मापन का विज्ञान) शामिल है.

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    ऐसे हो इन अभियानों का नियोजन
    निवेश और शोध के ये विषय अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग का संकेत दे रहे हैं जो केवल स्पेस एजेंसी के सहयोग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शोध और वैज्ञानिक समुदाय के व्यापक स्तर पर होंगे. इस अभियान में अभियानों का चयन उनके प्रस्तावों और आंकलन पर निर्भर करेगा. इन विषयों को आंकलन कॉस्मिक विजन साइंस प्रोग्राम तहत किया गया था जो अंतिरक्ष अभियानों को नियोजन चक्रों में बांटेंगे. जिन्हें वॉयेज 2050 कहा जाता है. जो जल्दी ही शुरू होंगे.

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    साल 2030 तक यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के यान गुरू ग्रह के चंद्रमाओं का अध्ययन करेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    भविष्य को देखते हुए
    ईएसए का मानना है कि ये कार्यक्रम भविष्य के अंतिरक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे. अभी साल 2030 तक के कॉस्मिक विजन तय हो चुका है तो उसे आगे के अभियानों के लिए जरूरी विज्ञान और तकनीकी की योजना बनाना शुरू कर देतनी चाहिए . इसी लिए वॉयेज 2050 के लिए उच्च स्तर की वैज्ञानिक थीम को परिभाषित किया गया है.

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    इससे पहले के कॉस्मिक विजन
    इन थीम के लिए मार्च 2019 में विचार मांगे गए थे. जिसके लिए वैज्ञानिक समुदाय से 100 विचारों और श्वेत पत्र प्राप्त हुए. ईएसए ने इस कॉस्मिक विजन पर कुछ दशकों से काम किया है. इस समय कॉस्मिक विजन 2015-2025 का नियोजन चक्र चल रहा है जो साल 2005 में बनाया गया था. उससे पहले होराइजन 2000 योजन साल 1984 में तैयार कर ली गई थी, जबकि होराइजन 2000 प्लस 1994-95 में तैयार कर लिया गया था.

    कॉस्मिक विजन प्रोग्राम का लक्ष्य चार सवालों के हल तलाशना है. पहला, किन हालातों में ग्रह का निर्माण और जीवन का उदय होता है. दूसरा सौरमंडल कैसे काम करता है. तीसरा, ब्रह्माण्ड के मूल भौतिक नियम क्या हैं और चौथा कि बह्माण्ड की उत्पत्ति कैसे हुई और वह किस्से बना है. अभी चल रहे नियोजन चक्र में साल 2022 में ज्यूपिटर आइसी मून्स एक्सप्लोरर या JUICE अभियान प्रक्षेपित किया जाएगा जो यूरोपा, गैनिमीड और कैलिस्टो का अध्ययन करेगा.

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