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जानिए चीन के चंद्रमा से नमूने लाने के चांगई-5 मिशन में क्या है यूरोप की भूमिका

चीन (China) का चांगई-5 मिशन (Chang’e-5) उसके अकेले का प्रयास नहीं है, इसमें उसने यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) की भी सहायता ली है. . (तस्वीर: @ChinaInSpace)
चीन (China) का चांगई-5 मिशन (Chang’e-5) उसके अकेले का प्रयास नहीं है, इसमें उसने यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) की भी सहायता ली है. . (तस्वीर: @ChinaInSpace)

चीन (China) के चंद्रमा (Moon) से पत्थर के नमूने वाले चांगई-5 मिशन (Chang’e-5) पर यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) द्वारा संचालित जमीनी स्टेशन के नेटवर्क रख रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 6, 2020, 6:32 AM IST
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इस समय चीन का चांग’ई-5 अभियान चंद्रमा से पत्थर और मिट्टी के नमूनों को लेकर पृथ्वी पर वापसी की राह पर है. पिछले साल ही उसने चांग’ई-4 यान चंद्रमा की उस सतह पर उतारा था जो पृथ्वी के सामने कभी नहीं आती. ऐसा करने वाला वह पहला देश था. अब चंद्रमा से वहां के पत्थर और मिट्टी के नमूने जमा कर वह चंद्रमा के अन्वेषण करने वाला बड़ा देश बनने की स्थिति में आ गया है. लेकिन उसके इस अभियान में यूरोप (Europe) की भी भूमिका है जो बहुत कम लोगों को पता है.

कहां उतरा था चांग’ई-5
ये नमूने इसी साल दिसंबर के मध्य तक पृथ्वी पर पहुंच जाएंगे. इस रोबोटिक यान को पिछले महीने की 23 तारीख को प्रक्षेपित किया गया था. यह चंद्रमा के पृथ्वी की ओर वाले हिस्से के मोन्स रियूम्कर (Mons Ruemker) के उत्तरी इलाके के ओसियनस प्रोसेलारम 9 Oceanus Procellarum) पहाड़ पर उतरा था.

44 साल बाद लाए जा रहे हैं नमूने
चीनी अंतरिक्ष स्पेस एजेंसी CNSA का कहना है कि चांग’ई-5 करीब दो किलोग्राम के नमूने लेकर आएगा. इससे पहले चंद्रमा से नमूने 44 साल पहले पृथ्वी पर लाए गए थे. यह काम सोवियत संघ के लूना 24 ने किया था.  इन्हें वैज्ञानिक सैम्पल रिटर्न कहा था. सैम्पल रिटर्न मिशन अब अंतरिक्ष अन्वेषणों का महत्व अब बढ़ता ही जा रहा है.



तो क्या है यूरोपीय कनेक्शन
इस अभियान में चीन की मदद यूरोपीय स्पेस एजेंसी का एक ट्रैकिंग नेटवर्क कर रहा है. एस्ट्रैक नाम का यह नेटवर्क पूरी दुनिया में जमीनी स्टेशनों का एक समूह है. इसका संचालन ईएसए की यूरोपीय स्पेस ऑपरेशन सेंटर (ESOC) करता है जो जर्मनी के डार्म्सटैड में स्थित है. यूरोप चीन के साथ रोबोटिक अभियानों और मानवीय अंतरिक्ष उड़ानों के साथ काम करने के लिए उत्सुक है.

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ये नमूने चंद्रमा (Moon) से 44 साल बाद पृथ्वी (Earth) पर लाए जा रहे हैं.


नाजुक चरण में है मिशन
ईएसए के ग्राउंड फैसिलिटी ऑपरनेशन्स डिविजन के प्रमुख पियर बार्गेलिनी ने बताया, “हम अब इस मिशन के सबसे नाजुक चरण में हैं.” एक बार नमूने जमा हो जाते हैं तो उसके बाद एक वापसी व्हीकल का चंद्रमा की सतह से प्रक्षेपण होता है. उसके बाद वह कक्षा में घूम रहे ऑर्बिटिंग व्हीकल से ऑटोमैटिक डॉकिंग करता है और अंत में वह ऑर्बिटर नमूने लेकर पृथ्वी की ओर वापस आता है. हम इस चरण में इस अभियान का अर्जेंटीना के मालार्गुए में स्थित एक विशाल एंटीना के जरिए सहयोग कर रहे हैं.  चीनियों का अर्जेंटीना में खुद का एंटीना है इसलिए हम बैकअप प्रदान कर रहे हैं. जिससे कोई समस्या आने पर हम किसी तरह के आंकड़े न गंवा बैठें.”

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यह है इरादा
यह सब योजना के अनुसार ही हो रहा है जिससे नमूनों की वापसी सुनिश्चित की जा सके. इसके बाद कैनरी द्वीपों के मास्पालोमस में स्थित स्पेन का एंटीना चांग’ई-5 पर निगरानी रखेगा. इसी चरण में यह पृथ्वी में प्रवेश करने चीन के उत्तर में मंगोलिया में उतरेगा. बार्गेलिनी का कहना है कि व्हीकल की वापसी को ज्यादा से ज्यादा ट्रैक करने का इरादा है जिससे उसके प्रक्षेप पथ के बारे में सटीक जानकारी मिल सके.

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चीन (China) के चांग’ई-5 (Chang’e-5) ने चंद्रमा (Moon) पर चीन का झंडा भी फहराया था. . ( तस्वीर: @ChinaInSpace)


चांग’ई अभियानों में हमेशा सहयोग
यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने चीन के बहुत से चांग’ई अभियानों में सहयोग किया है, लेकिन चांग’ई-5 चीन का अपना अभियान है और यह चीन का अब तक का सबसे जटिल अभियान भी है. मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सोलर सिस्टम रिसर्च के शोधकर्ता ऊर्स माल का कहना है कि चंद्रमा और पृथ्वी एक दूसरे से गहराई से जुड़े हैं  और वे एक डबल सिस्टम बनाते हैं

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इस लिहाज से चंद्रमा का अध्ययन पृथ्वी से संबंधित कई सवालों का जवाब भी दे सकता है. इसके अलावा हमें और भी कई सवालों के जवाबों की तलाश है जैसे चंद्रमा की संरचना कैसी है, दोनों हिस्सों में इतना अंतर क्यों और कैसे है.
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