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कोरोना को कुछ यूं रोक सकते हैं, इस देश ने बताया दुनिया को तरीका

कोरोना को कुछ यूं रोक सकते हैं, इस देश ने बताया दुनिया को तरीका

आइसलैंड ने अपने देश में वृहद कोरोना टेस्टिंग करवाई है.

आइसलैंड ने अपने देश में वृहद कोरोना टेस्टिंग करवाई है.

कोरोना (Corona Pandemic) पर नियंत्रण रखने का सबसे सटीक उदाहण छोटे से यूरोपीय देश आइसलैंड (Iceland) ने पेश किया है. इस देश में कोरोना की डेथ रेट महज 1 प्रतिशत है.

    कोरोना महामारी (Corona Pnademic) को लेकर दुनिया के कई देशों में वृहद स्तर पर रिसर्च जारी है. सभी इसकी दवा (Medicine) से लेकर वैक्सीन (Vaccine) बनाने को लेकर युद्धस्तर पर पर प्रयास कर रहे हैं. लेकिन ब्लूमबर्ग पर प्रकाशित एक रिपोर्ट का दावा है कि कोरोना पर नियंत्रण पाने का सबसे सटीक उदाहरण आइसलैंड (Iceland) है.

    दरअसल आइसलैंड देश एक द्वीप है. देश में घुसने के लिए सिर्फ एक एंट्री पॉइंट Keflavik Airport है. देश की आबादी मात्र 3 लाख 64 हजार है. भारत के किसी छोटे जिले से भी कम. अफसरशाही दूसरे देशों के मुकाबले बेहद कम है. साथ ही इस देश में करी स्टिफेंसन नाम के न्यूरोलॉजिस्ट भी हैं जिन्होंने 1996 में DeCode Genetics की स्थापना की थी. इस संस्था ने अपने देश के लोगों का यूनीक जेनेटिक डेटा तलाशा है. बीमारियों के साथ पॉपुलेशन जेनेटिक्स का संबंध तलाशने में ये संस्था वैश्विक ख्याति अर्जित कर चुकी है.

    दुनिया में सबसे वृहद टेस्टिंग
    कोरोना वायरस के खिलाफ भी इस संस्था ने संभवत: दुनिया की सबसे वृहद टेस्टिंग और ट्रैकिंग प्रोग्राम चला रखा है. संस्था के प्रयासों की वजह से ही आइसलैंड में कोरोना महामारी का प्रकोप बेहद कम है. साथ ही ये संस्था अमेरिका और अन्य देशों को भी कोरोना के प्रकोप को रोकने में मदद कर रही है.

    करी स्टिफेंसन के प्रयासों की वजह से आइसलैंड कोरोना की भीषण चपेट में आने से बच पाया है.


    दुनिया की सबसे बेहतरीन लैब
    अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के संक्रामक बीमारियों के एक्सपर्ट प्रोफेसर जॉन इयॉनिडिस का कहना है-आइसलैंड में इस वक्त दुनिया की सबसे शानदार लैब मौजूद है. इस लैब ने हमें बहुत मदद की है और बताया है कि ज्यादा टेस्टिंग के साथ बेहतरीन नतीजे पाए जा सकते हैं.

    कैसे शुरू किए कोरोना को रोकने के प्रयास
    स्टिफेंसन ने कोरोना पर मार्च की शुरुआत में काम करना शुरू किया था. उन्होंने रेडियो पर खबर सुनी कि चीन में महामारी की वजह से 3 प्रतिशत लोगों की जान जाने का खतरा है. स्टेफेंसन के मुताबिक-मैं समझ नहीं पाया कि बिना वायरस के मास स्प्रेड की स्टडी के कैसे समझा जा सकता है कि डेथ रेट कितनी है. उनका मानना है कि दुनिया भर में महामारी को लेकर पर्याप्त स्क्रीनिंग नहीं की जा रही है.

    सरकार से मिला त्वरित समर्थन
    ये खबर मिलने के थोड़ी ही देर बाद उन्होंने आइसलैंड की हेल्थ डायरेक्टर अल्मा मोलर को फोन लगाया. उन्होंने मोलर से इजाजत मांगी कि DeCode Genetics को वृहद स्तर पर टेस्टिंग के अधिकार दिए जाएं. फिर DeCode ने नेशनल हेल्थ अथॉरिटीज के साथ मिलकर उन लोगों की टेस्टिंग शुरू कर दी जिन्हें थोड़ी भी सांस लेने में समस्या आ रही थी. इसके अलावा रैंडम टेस्टिंग भी शुरू कर दी गई.

    वृहद स्तर पर की गई टेस्टिंग और इनसे मिले डेटा के अलावा कॉटैक्ट ट्रेसिंग के आधार पर DeCode ने एक स्पष्ट तस्वीर रखी कि देश में कोरोना आखिर दाखिल कैसे हुआ और फिर एक से दूसरे में कैसे फैला. ये स्टडी 14 अप्रैल को New England Journal of Medicine में प्रकाशित हुई.

    शुरुआत में मिले सिर्फ तीन केस
    जब टेस्टिंग की वृहद प्रक्रिया पूरी हो गई तो देश में सिर्फ तीन केस मिले. उस समय अमेरिका में भी कोरोना की वजह से बहुत ज्यादा मौतें नहीं हुई थीं. लेकिन 21 मार्च तक आइसलैंड में 43 हजार लोगों की टेस्टिंग कर ली गई थी. यानी पूरी आबादी का 12 प्रतिशत. उस समय न्यूयॉर्क में कोरोना का प्रभाव फैल चुका था. लेकिन वहां पर 640000 ही टेस्ट हुए थे. यानी पूरे न्यूयॉर्क की जनसंख्या का तीन प्रतिशत.

    प्रतीकात्मक तस्वीर


    इटली से आए थे शुरुआती संक्रमित
    DeCode ने पाया कि शुरुआती तीन मामले देश में इटली से घूमकर आए नागरिकों की वजह से मिले थे. बाद में सैंपल से पता चला कि वायरस के स्ट्रेन कुछ अन्य देशों जैसे यूके से भी मिल रहे थे. यह भी जानने की कोशिश की गई कि कुछ लोगों में कोरोना के लक्षण तो दिख रहे हैं लेकिन कुछ में क्यों नहीं दिख रहे. साथ ही सरकार के साथ मिलकर DeCode ने एक ऐसा ऐप तैयार करवाया जिससे कोरोना संक्रमित लोगों से संबंधित लोगों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा सके.

    ज्यादा फैल नहीं पाया कोरोना, अब नियंत्रित
    DeCode के शुरुआती वृहद प्रयासों की वजह से आइसलैंड में कोरोना ज्यादा नहीं फैलने पाया. हालांकि स्टिफेंसन मानते हैं कि देश की जनसंख्या कम होने की वजह से ज्यादा आसानी हुई. लेकिन उनका मानना है कि वृहद टेस्टिंग के पैमाने को बड़े देश भी लागू कर सकते हैं. DeCode के इन प्रयासों की वजह से आइसलैंड में बड़े स्तर पर लॉकडाउन नहीं करना पड़ा. हां, सरकार की तरफ से लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग की ताकीद जरूर दी गई है. स्टिफेंसन का कहना है कि हम कोरोना महामारी को रोकने में कामयाब हो गए हैं. देश में अब तक कोरोना के कुल 1,789 केस आए हैं जिनमें 1,509 ठीक हो चुके हैं. सिर्फ 10 लोगों की मौत हुई है और डेथ रेट 1 प्रतिशत है.

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    Tags: Corona, Coronavirus, COVID-19 pandemic, Europe

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