इस देश में हर चौथा आदमी है करोड़पति, तब भी रहने को नहीं घर

इस देश में हर चौथा आदमी है करोड़पति, तब भी रहने को नहीं घर
यूरोपीय देश मोनाको को करोड़पतियों का मुल्क कहा जाता है (Photo-pixabay)

वर्ल्ड फैक्टबुक (World Factbook) में भी मोनाको (Monaco) के बारे में गरीबी के आगे लिखा है- नॉट एप्लिकेबल यानी लागू नहीं होता.

  • Share this:
यूरोपीय देश मोनाको को करोड़पतियों का मुल्क (country of millionaires) कहा जाता है. इसकी वजह है यहां की रईसी. यहां हर चार में से एक व्यक्ति करोड़पति है. हालांकि बेशुमार दौलत के बाद भी यहां के अमीर एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं. उनके पास रहने के लिए जगह नहीं है. यहां तक कि बहुत से अमीरों को अपनी कार या डोरमेट्री में रहना पड़ रहा है. अब मोनाको की सरकार लोगों के रहने के लिए समंदर में इमारतें बनाने जा रही है.

क्या है ये देश
मोनाको फ्रांस के भूमध्य सागर के तट पर बसा देश है, जो केवल 2.02 स्क्वैयर किलोमीटर में फैला है. यानी क्षेत्रफल के लिहाज से ये न्यूयॉर्क सिटी के सेंट्रल पार्क से भी कम है, जो 3.41 किलोमीटर में फैला हुआ है. जगह के लिहाज से इसे दुनिया का दूसरा छोटा देश भी माना जाता है. सबसे छोटा देश वेटिकन सिटी है. इतनी कम जगह पर भी मोनाको में 38000 से कुछ ज्यादा लोग बसे हुए हैं. यही वजह है कि यहां रहने के लिए जगह कम पड़ती जा रही है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां 38 हजार की आबादी पर 3 हजार के आसपास लोग बिना घरों के रह रहे हैं. ऐसे में वे बड़ी-बड़ी कारों या सार्वजनिक जगहों पर रहा करते हैं.

क्षेत्रफल के लिहाज से ये न्यूयॉर्क सिटी के सेंट्रल पार्क से भी कम है (Photo-pixabay)

पानी में बनेंगे घर


जमीन की इसी कमी को देखते हुए मोनाको की सरकार हल खोज रही है. इसमें एक कदम समुद्र में ऊंची इमारतें बनाना है. बता दें कि पहाड़ों में घर बनाना, स्काईस्क्रैपर बनाना और जमीन के भीतर निर्माण जैसे सारे उपाय सरकार पहले ही कर चुकी है. अब वहां भी जगह खत्म होने के कारण पानी में घर बनाए जाएंगे. लगभग डेढ़ साल पहले ही इसके लिए हां हुई और इसपर काम शुरू हो चुका है.

ये भी पढ़ें: क्या भारत को घेरने के लिए चीन PAK में बना रहा है सैन्य बेस? दिखी सैटेलाइट इमेज

साल 2026 तक चलेगा काम
सरकार ने पानी और इसके आसपास घर निर्माण के इस प्रोजेक्ट को ऑफशोर अर्बन एक्सटेंशन प्रोजेक्ट (Offshore Urban Extension Project) नाम दिया है. माना जा रहा है कि साल 2026 तक ये प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा. वैसे ये जानना भी मजेदार रहेगा कि इससे मोनाको में कितनी दूरी तक निर्माण हो सकेगा. इससे उस देश के पास घरों या दूसरे कमर्शियल जरूरतों के लिए 15 एकड़ का इजाफा होगा. इसमें 120 से ज्यादा नए मकान, पार्क और दुकानें बनाई जाएंगी. वैसे समुद्र में खुद को बढ़ाने की मोनाको की ये पहली कोशिश नहीं. इससे पहले भी 1861 से लेकर अब तक मोनाको समंदर में अपना इलाका 20 फीसदी तक बढ़ा चुका है.

यहां 38 हजार की आबादी पर 3 हजार के आसपास लोग बिना घरों के रह रहे हैं (Photo-pixabay)


गरीबी का पैमाना नहीं
मकान के लिए इंतजार कर रहा ये देश इतना अमीर है कि यहां गरीबी दर ही नहीं है. यहां तक कि सीआईए वर्ल्ड फैक्टबुक में भी इस देश में गरीबी के आगे लिखा है- नॉट एप्लिकेबल यानी लागू नहीं होता. इसकी एक वजह ये भी है कि यहां कोई इनकम टैक्स नहीं है. यानी खुद सरकार को भी अंदाजा नहीं है कि उसके लोगों के पास कितना पैसा है. हालांकि ये पक्का है कि यहां के लोग काफी अमीर है. इसकी वजह है यहां का प्रति व्यक्ति GDP, जो 165420 डॉलर है. करोड़पतियों के देश के बारे में बिजनेस इनसाइडर को इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मोनाको के अर्थशास्त्री डॉ देम्याना बकेर्डजिवा बताती हैं कि उनके देश में गरीबी के लिए कोई बेंचमार्क नहीं बनाया गया है. यानी कुल मिलाकर यहां कोई भी गरीबी रेखा से नीचे नहीं जी रहा है.

ये भी पढ़ें: क्या राम मंदिर में दबे टाइम कैप्सूल को हजारों साल बाद डिकोड किया जा सकेगा?

टैक्स बचाने के लिए आते हैं लोग
वैसे इतने अमीर देश में गुजारे के लिए सबको अमीर होना ही होगा. मोनाको की आबादी को देखने पर इसका अंदाजा हो जाता है. यहां लगभग 38000 की आबादी से में केवल 9326 लोग ही मोनाको के मूल निवासी हैं, बाकी आबादी दूसरे देशों से आकर बसे अमीरों की हैं. यहां फ्रांस, इटली, यूके, स्विटरजरलैंड, जर्मनी और अमेरिका से आकर लोग बसे हुए हैं, जो यहां की जीवनशैली में फिट बैठते हैं. साथ ही यहां वे अमीर आते हैं जो टैक्स बचाना चाहते हैं. वे मोनाको में ही रहते हुए दुनियाभर में व्यापार करते हैं, जिसका उन्हें टैक्स नहीं देना पड़ता.

मोनाको अपनी अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन और बैंकिंग पर निर्भर है (Photo-pixabay)


कैसी चलती है अर्थव्यवस्था 
मोनाको अपनी अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन और बैंकिंग पर निर्भर है. यहां एक से बढ़कर एक रिसोर्ट और कैसिनो हैं, जहां यूरोपीय देशों के सैलानी सालभर आते रहते हैं. वैसे इस देश की जलवायु भी इसके अनुकूल है. दूसरे ठंडे यूरोपियन देशों के मुकाबले यहां सालभर अच्छी धूप रहती है. यही वजह है कि विंटर ब्लूज से बचाव के लिए थैरेपी की तरह भी दूसरे देशों के अमीर मोनाको आते हैं. उनके शौक के लिए यहां एक से बढ़कर एक होटल और जहाज हैं. ऐसे ही एक होटल- होटल दी पेरिस में एक डीलक्स रूम का एक रात का किराया 22 लाख रुपए से भी ज्यादा है.

ये भी पढ़ें:- दो देशों में जंग छिड़ जाए तो क्या खतरा होता है दूतावास पर? 

रईसी के अलावा यहां नागरिकों की शिक्षा और सेहत पर सरकार मुफ्त पैसे लगाती है. पर्यटन से आए राजस्व को यहां सोशल सिक्योरिटी सिस्टम पर लगाया जाता है. साथ ही यहां सुरक्षा भी एकदम चाक-चौबंद है. देश के चप्पे-चप्पे में सीसीटीवी तो है ही, साथ ही हर 100 निवासियों पर एक पुलिसकर्मी तैनात रहता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading