जानिए बुखार में क्यों बढ़ जाता है हमारे शरीर का तापमान

बुखार आने (Fever) पर शरीर (Body) का तापमान बढ़ जाता है जो कि शरीर (Body) की प्रक्रिया होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
बुखार आने (Fever) पर शरीर (Body) का तापमान बढ़ जाता है जो कि शरीर (Body) की प्रक्रिया होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

बुखार आना (Fever) हमारे इम्यून सिस्टम (Immune system) का बीमारी (Disease) से लड़ने का एक संकेत है जिसमें शरीर की प्रक्रियाएं उसका तापमान बढ़ा देती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 9:28 PM IST
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बुखार आना (Fever) बीमारी (Disease) का एक सामान्य लक्षण माना जाता है. जब हम देखते हैं कि हमारे शरीर (Body) का तापमान (Temperature) बढ़ रहा है आम बोलचाल की भाषा में भी हम कहते हैं हमें बुखार आ गया है. लेकिन हर बुखार बहुत सारी बीमारियों का लक्षण होता है जो अपने आप में कोई बीमारी नहीं होती है. बुखार इंसानी के शरीर के तापमान के बढ़ने की स्थिति को कहा जाता है.

तापमान का एक स्तर से बढ़ना
जब शरीर का तापमान एक स्तर से ऊपर हो जाता है तो हम कहते हैं कि हमें बुखार आ गया है. आमतौर पर इंसान का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस या 98.6 डिग्री फेहरनहाइट माना जाता है, लेकिन कभी कभी यह एक डिग्री तक कम ज्यादा भी हो जाता है जिसका पता हमें नहीं चलता. दोपहर के समय यह ज्यादा होता है तो सुबह तड़के यह कम.

क्या होता है बुखार में
बुखार का होना या हमारे शरीर का तापमान का बढ़ना हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम  यानि प्रतिरोधी क्षमता की प्रतिक्रिया होती है. बुखार आने से हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को कई फायदे भी होते हैं. इसके जरिए हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम उन बैक्टीरिया और वायरस जैसे हानिकारक सूक्ष्म जीवों का खत्म कर पाता है या उन्हें पनपने से रोक पाता है जो तापमान के प्रति संवेदनशील होते हैं.



रोगाणु खत्म करने में मददगार
बुखार आने से हमारा शरीर ऐसे रोगाणु के रहने के लिए उपयुक्त नहीं रह जाता है और ये रोगाणु तापमान बढ़ने से खत्म होने लगते हैं, लेकिन संक्रमण फैलाने रोगाणु ही बुखार का एकमात्र कारण नहीं है. कुछ रसायन भी ऐसे होते हैं जो हमारे शरीर का तापमान बढ़ा देते हैं जबकि कई बार वातावरण के प्रभाव के कारण भी हमारा शरीर गर्म हो जाता है जैसे की बहुत ठंड लग जाना, या फिर ऊष्माघात या लू लग जाने पर भी हमारा शरीर गर्म हो जाता है.

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शरीर (Body) का तापमान (Temperature) 37 डिग्री सेल्सियल होता है, लेकिन कभी कभी इससे एक डिग्री ऊपर नीचे भी हो जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


दिमाग कैसे नियंत्रित करता है इसे
इस प्रक्रिया में हमारे दिमाग के एक हिस्से हायपोथैलेमस (Hypothalamus) की भूमिका होती है जिसकी जिम्मेदारी हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की होती है. यह एक तरह से हमारे शरीर के लिए थर्मोस्टैट का काम करता है. इसी की जिम्मेदारी होती है कि आमतौर पर हमारे शरीर का तापमान एक सा बना रहे.

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पायरोजन की भूमिका
हायपोथैलेमस को सक्रिय करने का काम कुछ बायोकैमिकल्स पदार्थ करते हैं जिन्हें  पायरोजन  (Pyrogens) कहते हैं. शरीर के जिन अंगों में हमारा इम्न्यून सिस्टम को हायपोथैलेमस के लिए समस्या का पता चलता है तो वहां से पायरोजन खून के जरिए हायपोथैलेमस तक पहुंचते हैं और फिर हायपोथैलेमस शरीर को निर्देश देता है कि वह ज्यादा ऊष्मा पैदा करे जिससे हमारे शरीर का तापमान बढ़ता है और हमें बुखार महसूस होने लगता है.

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बुखार (Fever) आने से तापमान (Temperature) तो बढ़ता ही है लेकिन शरीर कमजोरी महसूस करने लगता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


इस वजह से भी पैदा होते हैं पायरोजन
पायरोजन हमारे शरीर के ऊत्तक में तो पैदा होते ही है, लेकिन कुछ रोगाणु भी पायरोजन पैदा कर सकते हैं. आमतौर पर देखा जाता है कि छोटे शिशुओं को बुखार जल्दी और ज्यादा आ जाता है. इसकी वजह यह होती है कि उनका इम्यून सिस्टम अधिक अनुभवी नहीं होता है और इस वजह से जल्दी ही पायरोजन पैदा करने लगता है.

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बुखार में तापमान बढ़ने के साथ ही हमारे शरीर में और भी लक्षण दिखाई देने लगते हैं.  इनमें पसीना आना, ठंड लगना, मासपेशियों में दर्द जोड़ों में दर्द, कमजोरी, सिरदर्द जैसे लक्षण शामिल होते हैं. ये सब बुखार की स्थिति में शरीर का असहज होने के कारण होते हैं. इसमें ठंड लगना सबसे आम या शुरूआती लक्षण माना जाता है, लेकिन इसकी वजह यह है कि यह बुखार की सबसे आसान और प्रचलित पहचान है.
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