जब सज्जाद लोन के पिता ने मुशर्रफ से कहा, 'कश्मीर की चिंता छोड़िए, पाकिस्तान को देखिए'

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Updated: December 3, 2018, 7:21 PM IST
जब सज्जाद लोन के पिता ने मुशर्रफ से कहा, 'कश्मीर की चिंता छोड़िए, पाकिस्तान को देखिए'
अब्दुल ग़नी लोन अलगाववादी नेता सज़्ज़ाद लोन के पिता थे

सज्जाद लोन के पिता पर हाल ही में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारुख अब्दुल्ला ने कश्मीर में हिंसा की शुरुआत करने का आरोप लगाया था.

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और घाटी के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन के पिता अब्दुल गनी को कश्मीर में बंदूक लाने का जिम्मेदार ठहराया था. अब्दुल्ला ने कहा, 'जब पूर्व राज्यपाल जगमोहन ने उन्हें निलंबित किया था, तो उस समय अब्दुल गनी लोन उनके पास आए थे. उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तान से बंदूक लाएंगे.' अब्दुल्ला ने कहा, 'मैंने तब गनी को बहुत समझाया था, लेकिन वह नहीं माने थे.' बता दें कि सज्जाद लोन ने नेशनल कांफ्रेंस पर रियासत की विशेष पहचान को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था.

21 मई, 2002 को अब्दुल गनी लोन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस वक्त वे ओल्ड टाउन श्रीनगर की ईदगाह में मीरवाइज मौलवी फारुख की 12वीं मेमोरियल सर्विस अटैंड कर रहे थे. इसके बाद सज्जाद लोन ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाया और अलगाववादी राजनीति की वकालत करते हुए स्वायत्त कश्मीर की आवाज बुलंद की.

कैसे बने थे अब्दुल गनी हुर्रियत के सबसे बड़े नेता?
हालांकि अब्दुल गनी खुद अलगाववादी थे और कश्मीर को एक स्वतंत्र राज्य के तौर पर देखना चाहते थे. अपने अलगावादी कामों और बयानों के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था. उनके बारे में पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत अपनी किताब 'कश्मीर: द वाजपेयी इयर्स' में लिखते हैं, "1992 में जब अब्दुल गनी लोन जेल से बाहर आए तो उनके दिमाग में बस एक ही बात थी. वे सारे ही अगलाववादियों का एक संगठन बनाना चाहते थे. इसे ही बाद में ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नाम से जाना गया."

किताब के अनुसार उन्होंने इसके लिए ISI से भी सलाह-मशविरा किया था. 1992 में जेल से बाहर आने के बाद वे सऊदी अरब गए, जहां उनकी मुलाकात पाकिस्तान के ब्रिगेडियर सलीम से हुई. अब्दुल ने अपने इरादे के बारे में उन्हें बताया. हालांकि अब्दुल कभी भी वर्दी वालों से मिलने में सहज महसूस नहीं करते थे.

इसी किताब के अनुसार बाद में जब एक बार अब्दुल गनी की जनरल परवेज मुशर्रफ से मुलाकात हुई और उन्होंने गनी से पूछा कि कश्मीर के हालात कैसे हैं तो लोन ने तुरंत जवाब दिया, "कश्मीर के बारे में चिंता मत कीजिए, पाकिस्तान को देखिए. आपके कट्टरपंथी उसी हाथ को काट लेंगे जो उन्हें खिलाते हैं." इसपर मुशर्रफ हंसने लगे.

कई अलगावादी समूहों को एक साथ लाए और गिलानी से भिड़े
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लोन इसके बाद कुछ ही सालों में हुर्रियत के सबसे प्रमुख नेता बन चुके थे. वे ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के बैनर तले 30 दलों को ले आए थे. इन सारे ही दलों के लक्ष्य अलग-अलग थे. कुछ थे जो कश्मीर की आज़ादी चाहते थे, कुछ थे जो कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना चाहते, वहीं कुछ कश्मीर का सीधा संबंध वैश्विक खिलाफत के साथ स्थापित करना चाहते थे. लेकिन अब्दुल गनी चाहते थे कि सारे अपने मतभेद छोड़कर केवल एक बात पर अपना ध्यान फोकस करें कि उन्हें यह बात साबित करनी है कि कश्मीर एक विवादित मुद्दा है और उसका भविष्य अभी तय होना बाकी है.

अब्दुल गनी के सिवाए इस दल में जो प्रभावी नेता था, वो था सैय्यद अली शाह गिलानी. जहां अब्दुल गनी पूरी तरह से इसे एक राजनैतिक मुद्दा मानते थे, गिलानी इसे एक धार्मिक मुद्दा मानते थे. इसी वजह से जब लश्कर-ए-तैयबा ने अपना काम कश्मीर में शुरू किया तो गिलानी कहा करते थे, 'ये हमारे मेहमान हैं.' जबकि गनी इसका विरोध किया करते थे.

बाद में जब 2002 में अब्दुल गनी लोन की हत्या हुई तो सज्जाद ने अपने पिता की हत्या के लिए ISI का नाम लिया लेकिन बाद में मां हनीफा के कहने पर उन्होंने यह आरोप वापस ले लिया. इसके अलावा हनीफा का कहना था कि मैंने अपने पति को खोया है अब मैं अपना बेटा नहीं खोना चाहती.

पाकिस्तानी महिला से की है शादी
सज्जाद लोन के बड़े भाई बिलाल लोन अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के एक मॉड्रेट धड़े के प्रमुख सदस्य हैं. सज्जाद अपने बड़े भाई बिलाल लोन के साथ जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के सीनियर असोसिएट थे. इस संगठन की स्थापना अलगाववादी नेता अमानुल्लाह खान ने की थी. सज्जाद लोन की शादी आसमा खान लोन से हुई है. वे पाकिस्तानी नागरिक और अमानुल्लाह खान की इकलौती बेटी हैं. अमानुल्लाह खान परिवार के साथ 1987 तक इंग्लैण्ड में रहता था. लेकिन आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की बात का खुलासा होने पर उसे वहां से डिपोर्ट कर दिया गया था.

अगस्त, 1990 में सज्जाद और बिलाल दोनों को जेकेएलएफ सुप्रीमो यासीन मलिक के साथ गिरफ्तार भी किया गया था. जेल से बाहर आने के बाद अब्दुल गनी ने सज्जाद को दिल्ली भेज दिया था. सज्जाद ने इसके बाद कई सालों तक इसके बाद झंडेवालान में अपना पारिवारिक सोने का व्यापार संभाला था.

बाद में वे राजनीति की ओर लौट गए और अब अलगाववादी रुख वाले सज्जाद लोन अचानक से घाटी की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं. प्रदेश के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पिछले महीने विधानसभा भंग करने के बाद खुलासा किया था कि केंद्र सरकार लोन को सीएम बनाना चाहती थीं. मलिक ने कहा था कि अगर सज्जाद लोन की सरकार बनती तो यह सूबे के लोगों के साथ बेईमानी होती.

बीजेपी के लिए क्यों खास हो गए अलगाववादी सज्जाद
कहा जा रहा है कि बीजेपी अलगाववादी नेता को साध लेने का दम दिखाना चाहती है. यही वजह है कि बीजेपी सज्जाद पर दांव चलने की तैयारी में थी. इसीलिए 2014 में ही लोन ने बीजेपी के साथ अपने संबंध मजबूत करने शुरू कर दिए थे. 2014 चुनाव में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन के साथ उनकी पार्टी भी शामिल हुई.

सूत्रों की मानें तो महबूबा मुफ्ती के पिता और दिवंगत पूर्व सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद लोन को साइडलाइन करना चाहते थे लेकिन बीजेपी ने ही उनका समर्थन किया और अपने कोटे से लोन को मंत्री पद तक पहुंचाया.

वैसे अब्दुल गनी लोन की बेटी शबनम लोन भी हैं. जो सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं. और वे कई अख़बारों में कश्मीर मुद्दे पर लिखती रहती हैं.

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First published: December 3, 2018, 1:55 PM IST
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