कितनी सुरक्षित है वो ईवीएम, जिन पर छत्तीसगढ़ में हो रही है वोटिंग?

इस मशीन से कोई छेड़छाड़ संभव नहीं. जैसे ही कोई व्यक्ति मशीन खोलने का प्रयास करता है, ईवीएम निष्क्रिय हो जाती है

News18Hindi
Updated: November 20, 2018, 10:33 AM IST
कितनी सुरक्षित है वो ईवीएम, जिन पर छत्तीसगढ़ में हो रही है वोटिंग?
चुनाव आयोग
News18Hindi
Updated: November 20, 2018, 10:33 AM IST
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के लिए  इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिए दूसरे चरण की वोटिंग हो रही है. ईवीएम मशीनों को लेकर कई बार विवाद हो चुके हैं. विपक्षी दल इस पर तमाम तरह के आरोप लगा चुकी हैं. लेकिन आयोग ने हमेशा कहा है कि ये मशीन बिल्कुल सुरक्षित है. किसी नेटवर्क या इंटरनेट के साथ कनेक्टेड नहीं है.

आइए हम जानते हैं कि ये मशीन कितनी सुरक्षित है. ये भी जानते हैं कि चुनाव आयोग ने इस बारे में पहले क्या कहा है. चुनाव आयोग का दावा रहा है कि ईवीएम में वायरलेस या किसी बाहरी हार्डवेयर पोर्ट के लिए कोई फ्रीक्वेंसी रिसीवर नहीं है. इसलिए हार्डवेयर पोर्ट, वायरलेस, वाईफाई या ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए किसी प्रकार की टैम्परिंग या छेड़छाड़ संभव नहीं है. कंट्रोल यूनिट (सीयू) और बैलेट यूनिट (बीयू) से केवल एन्क्रिप्टेड या डाइनामिकली कोडिड डेटा ही स्वीकार किया जाता है. सीयू द्वारा किसी अन्य प्रकार का डेटा स्वीकार नहीं किया जा सकता.

ईवीएम


चुनाव आयोग में मीडिया एवं कम्‍युनिकेशन के एडिशनल डायरेक्‍टर जनरल राजेश मल्‍होत्रा का कहना है कि यदि मशीन किसी के हाथ से गिर जाती है तो भी इसमें गड़बड़ी नहीं होगी. आयोग ने कहा है कि उसकी ईवीएम स्‍वदेशी तरीके से बनाई गई हैं. पब्‍लिक सेक्‍टर की दो कंपनियां भारत इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स लिमिटेड, बंगलूरु एवं इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद में ये मशीनें बनाती हैं.

इसके सॉफ्टवेयर प्रोग्राम कोड ये दोनों कंपनियां आं‍तरिक तरीके से तैयार करती हैं. उन्‍हें आउटसोर्स नहीं किया जाता. प्रोग्राम को मशीन कोड में कन्‍वर्ट किया जाता है. उसके बाद ही विदेशों के चिप मैन्‍युफेक्‍चरर को दिया जाता है क्‍योंकि हमारे पास देश के भीतर सेमीकंडक्‍टर माइक्रोचिप निर्माण करने की क्षमता नहीं है.


 ये भी पढ़ें - पाकिस्तान की वो हिंदू सीनेटर, जो दुनिया की सौ महिलाओं में चुनी गई

आयोग के मुताबिक हर माइक्रोचिप के पास मेमोरी में एक पहचान संख्‍या होती है. उन पर निर्माण करने वालों के डिजिटल हस्‍ताक्षर होते हैं. माइक्रोचिप को हटाने की किसी भी कोशिश का पता लगाया जा सकता है. साथ ही ईवीएम को निष्‍क्रिय बनाया जा सकता है.
Loading...

Evm, evm controversy, EVM politics, ‪Election Commission of India‬‬, BSP, SP, congress, Yogi adityanath, suresh khanna, mayawati, akhilesh yadav, UP civic poll results, BJP, Chief Minister Yogi Adityanath, Uttar Pradesh, Electronic Voting Machine, Credibility of Electronic Voting Machines, EVM Tampering, ईवीएम, ईवीएम विवाद, चुनाव आयोग, बसपा, सपा, कांग्रेस, योगी आदित्यनाथ, मायावती, अखिलेश यादव, उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव परिणाम, भाजपा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की विश्वसनीयता, ईवीएम छेड़छाड़, सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियां तैयार करती हैं ईवीएम

सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या ईवीएम का निर्माण करने वाले इसमें कोई गड़बड़ी कर सकते हैं? इस पर आयोग का कहना है कि ऐसा संभव नहीं है. सॉफ्टवेयर की सुरक्षा के बारे में निर्माण के स्तर पर कड़े सुरक्षा प्रोटोकोल हैं.
निर्माण के बाद ईवीएम को राज्य और किसी राज्य के भीतर जिले में भेजा जाता है. निर्माता इस स्थिति में नहीं हो सकते कि वे कई वर्ष पहले ये जान सकें कि कौन सा उम्मीदवार किस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेगा और बैलेट यूनिट में उम्मीदवारों की सीक्वेंस क्या होगी.

 ये भी पढ़ें- क्या फ्रूट्स का शुगर भी सेहत के लिए नुकसानदायक है?

हर ईवीएम का होता है सीरियल नंबर
चुनाव आयोग के मुताबिक हर ईवीएम का एक सीरियल नंबर है. निर्वाचन आयोग ईवीएम-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके अपने डेटा बेस से यह पता लगा सकता है कि कौन सी मशीन कहां पर है. इसलिए कोई गड़बड़ी होने की संभावना नहीं है.

Evm, evm controversy, EVM politics, ‪Election Commission of India‬‬, BSP, SP, congress, Yogi adityanath, suresh khanna, mayawati, akhilesh yadav, UP civic poll results, BJP, Chief Minister Yogi Adityanath, Uttar Pradesh, Electronic Voting Machine, Credibility of Electronic Voting Machines, EVM Tampering, ईवीएम, ईवीएम विवाद, चुनाव आयोग, बसपा, सपा, कांग्रेस, योगी आदित्यनाथ, मायावती, अखिलेश यादव, उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव परिणाम, भाजपा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की विश्वसनीयता, ईवीएम छेड़छाड़, इलेक्शन कमीशन दे चुका है ईवीएम हैक करने की चुनौती

आयोग ने कहा है कि उसके ईवीएम मॉडल-3 में टेंपर डिटेक्शन एवं सेल्फ डाइगनोस्टिक्स जैसी अतिरिक्त विशेषताएं हैं. जैसे ही कोई व्यक्ति मशीन खोलने का प्रयास करता है, ईवीएम निष्क्रिय हो जाती है. सेल्फ डाइगनोस्टिक्स सिस्‍टम ईवीएम स्विच ऑन करते ही पूरी तरह मशीन की जांच करता है. इसके हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर में किसी भी परिवर्तन का इससे पता लग जाएगा.

 ये भी पढ़ें - महाराष्ट्र का वो गांव, जहां के हर घर में पाला जाता है कोबरा
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
-->