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ज्यादा शिकार की वजह से अब बिना बड़े दातों के पैदा हो रहे हैं हाथी- शोध

ज्यादा शिकार की वजह से अब बिना बड़े दातों के पैदा हो रहे हैं हाथी- शोध

अफ्रीका के मोजाम्बीक में हाथियों (Elephants) की कम संख्या होना स्थ का कारण गृह युद्ध भी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

अफ्रीका के मोजाम्बीक में हाथियों (Elephants) की कम संख्या होना स्थ का कारण गृह युद्ध भी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

हाथियों (Elephants) पर हुए अध्ययन में पाया गया है कि मोजाम्बीक (Mozambique) में हाथियों की अब जो पीढ़ी आ रही है वह बिना बाहर के दातों (Tusk) वाली होती जा रही है.

    हाथियों (Elephants) के बाहर निकले हुए दांत (Tusks) बहुत उनके बहुत काम आते हैं इसे वे दूसरे हाथियों और जानवरों से लड़ सकते हैं. खाने को तोड़ सकते हैं. पानी के लिए जमीन खोद सकते हैं. लेकिन  पिछले कुछ समय से अफ्रीका में हाथी दांत के लिए हो रहे गहन शिकारी गतिविधियों का असर कुछ और ही हो रहा है. नए शोध से पता चला है कि अफ्रीका के मोजाम्बीक  (Mozambique) में सालों चले आ रह गृह युद्ध और शिकार की वजह से अब वहां के हाथियों की बहुत बड़ी जनसंख्या में कभी बाहर आने वाले दांत नहीं निकलेंगे.

    मोजाम्बीक संघर्ष का असर
    साल 1977 से 1992 के बीच मोजाम्बीक में हुए संघर्ष के दौरान दोनों तरफ के लोगों ने अपने युद्ध का खर्चा चलाने की खातिर हाथियों दातों के लिए उनका शिकार किया. इस हिस्से में, जो अब गोरोंगोसा नेशनल पार्क है, 90 प्रतिशत हाथी मारे जा चुके हैं. बचे हुए हाथियों में एक समानता होने की संभावना बची है. जहां बची हुई आधी मादाओं को तो प्राकृतिक रूप से ऐसे दांत नहीं होते हैं, वहीं युद्ध से पहले पांचवे हिस्से के हाथियों में बाहर के दांत नहीं थे.

    जीन्स की भूमिका
    हाथियों के बाहर के दांत के लिए भी अनुवांशिकी तौर पर जीन्स जिम्मेदार है. कभी सवाना हाथी बिना बाहर के दांत वाले होते ही नहीं थे, अब ऐसे हाथी सामान्य हो गए हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि युद्ध के बाद बची मादाएं के द्वारा अगली पीढ़ी को जीन्स सौंपने के मामले में चौंकाने वाले नतीजे मिले हैं. इन मादाओं की आधी मादा संतानें अब बिना बाहर के दातों के पैदा हो रही हैं. इससे भी अजीब बात यह है कि दो तिहाई संतानें मादा ही पैदा हो रही हैं.

    हाथियों की जनसंख्या में असमानता
    हाथियों के विकासक्रम में आए इस बदलाव का हांथी दांत व्यापार से संबंध समझने के लिए शोधकर्ताओं ने प्रयास किया और उनकी पड़ताल के नतीजे साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. मादा हाथी संतानें  माता के साथ रहती हैं.  ऐसे ही नर शिशु हाथी भी करते हैं. शोधकर्ताओं ने इससे पहले भी हाथियों की जनसंख्या असमानता देखी थी जिसमें बड़ी संख्या में बिना हाथी दांत वाली मादाएं अधिक शिकार करने की गतिविधि के कारण हो गई थीं. ऐसे यूगांडा, तंजिनिया और केन्या में देखा गया है.

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    पहले अफ्रीका में ही बड़ी संख्या में बड़े दांत वाले हाथी (Elephants) पाए जाते थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    एक अहम सवाल
    शोधकर्ता यह जानना चाहते थे कि आखिर मादा ही बिना आगे के दातों के लंबे समय तक क्यों रहती हैं. इसके लिए उन्होंने गोरोन्गोसा में मादा हाथियों के खून के नूमने लिए और उनके डीएनए का विश्लेषण किया. हाथियों के सर्वेक्षण आंकड़ों ने उन्हें यह जानने में मदद की कि वे नमूने कहां से लें. इसके लिए उन्होंने नमूनों के एक्स क्रोमोजोम पर विशेष ध्यान दिया.

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    केवल एक ही जीन जिम्मेदार
    शोधकर्ताओं के शक था कि इससे संबंधित एक जीन हावी हो गई थी. इससे मादा को बिना बड़े दांत वाली बनने के लिए केवल एक ही जीन में बदलाव करना था. जब ऐसी जीन नर भ्रणों में पहुंची तो गड़बड़ी शुरू हो गई. जब माताओं ने इसे अगली पीढ़ी को सौंपा तो शोधकर्ताओं को लगा कि उनकी नर संतान बचपन में ही या फिर गर्भ में ही मर सकते हैं.

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    बिना बड़े दांत वाले हाथियों (Elephants) की जनसंख्या बढ़ने के लिए एक जीन ही जिम्मेदार है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

    स्तनपायी जीवों में यह गुण
    अनुवांशकीय विश्लेषण से हाथियों के डीएनए के बारे दो बातें पता चलीं जो बिना बड़े दांत के गुण को आगे पहुंचाने में भूमिका निभाती हैं. पहली यह है कि एक ही जीन्स स्तनपायी जीवों में दातों के विकास से संबंधित हैं. इस खोज से कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि गैसे हमारा समाज जीवन के दूसरे रूपों के विकास को प्रभावित कर सकता है.

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    आमतौर पर लोग सोचते हैं कि उद्भव की प्रक्रिया धीमी चलती है, लेकिन इंसानी दखल उसे तेज कर सकता है. अफ्रीका के सवाना में हाथियों में बदलाव इसकी मिसाल हो सकती है. यहां हाथियों का बिना बड़े दांत का हो जाना केवल 15 सालों में हो जाना बहुत हैरान करने वाला नतीजा है. अब वैज्ञानिक इसके और ज्यादा प्रभाव का अध्ययन करना चाहते हैं.

    Tags: Elephants, Environment, Research, World

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