भेड़ियों से लेकर मगरमच्छ तक के जैसे दिखते थे व्हेल के पूर्वज- भारतीय शोध

आज की व्हेल (Whale) के पूर्वज समुद्री जानवरों (Marine creautures) जैसे कम धरती पर पाये जाने वाले चौपाया जीवों के जैसे ज्यादा लगते थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
आज की व्हेल (Whale) के पूर्वज समुद्री जानवरों (Marine creautures) जैसे कम धरती पर पाये जाने वाले चौपाया जीवों के जैसे ज्यादा लगते थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

भारतीय उपमहाद्वीप (Indian Subocntinent) में भारतीय वैज्ञानिकों ने व्हेल मछली (Whale) के पूर्वजों के जीवाश्मों (Fossils) को खोजा है जिसने पता चला है कि वे पहले भेड़ियों की तरह और बाद में मगरमच्छ के जैसे दिखते थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 1:09 PM IST
  • Share this:
दुनिया में जीवाश्मों (Fossil) के मिलने से पुरातन काल के जीवों (Organisms) के बारे में कई अहम जानकारियां मिलती है. ऐसी एक खोज भारतीय उपमहाद्वीप (Indian Subcontinent) में हुई है. इस इलाके में भारतीय जीवाश्मविज्ञानियों (Palaentologists) ऐसे जीवाश्म मिलो हैं जिनसे व्हेल (Whales) के पूर्वजों के बारे में बहुत ही रोचक किस्म की जानकारियां मिली है.

बहुत से स्तनपायी जीवों का घर
5 लाख साल पहले भारतीय उपमहाद्वीप एशिया की ओर बढ़ रहा था और वह टेथिस सागर को सिमटा कर छोटा कर रहा था. यह सागर बहुत सारे पुराने स्तनपायी जीवों का घर था. हाल ही में हुए के इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इसे साबित किया है.

असमान्य जीवाश्मों की खोज
1973 में भारत के गुजरात के कच्छ इलाके में बहुत सारे विशाल खोपड़ियों मिलने के बाद जीवाश्म विज्ञानी विजय प्रकाश मिश्रा और उनके मेंटॉर अशोक साहनी ने वहां की पहाड़ियों में जीवाश्म खोजने की योजना पर काम किया.  मिश्रा ने नमक से भरे रेगिस्तान में कुछ असामान्य रूप से विशाल जीवाश्म खोजे.



विशाल जानवरों के अवशेष
मिश्रा का कहना है कि ये जीवाश्म स्पष्ट तौर पर स्तनपायी जीव के थे, लेकिन उन जीवाश्मों से कहीं ज्यादा पुराने थे जो इस जगह के आसपास पाए गए थे. यह भारत में इस तरह की पहली खोज है क्योंकि यह पृथ्वी पर पुराने समय में पाए जाने वाले अब तक के सबसे विशाल जानवर के अवशेष हैं. यह जीवाश्म समुद्री स्तनपायी जीवों के हैं जिन्हें सेटासीन (cetaceans)  कहा जाता है और जो व्हेल, डॉलफिन और पोरपॉइसेस की तरह थे.

Whale, bule whale, whale fossil,
व्हेलों के बारे में यह खुलासा जीवाशमों के अध्ययन से हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


खुर वाले जानवर
एक अन्य अलग अध्ययन में आईआईटी रूड़की के जीवाश्मविज्ञानी सुनील बाजपेयी ने बताया कि असल कहानी  4.7- 4. 8 करोड़ साल पह पाकिस्तान और भारत की पुरानी चट्टानों से शुरू हुई थी. बाजपेयी ने साल 1980 में अपना यह अध्ययन तब शुरू किया जब व्हेल से लेकर खुर वाले स्तनपायी के अवशेषों की खोज की गई थी. उत्तरी पाकिस्तान और भारत के कश्मीर और कच्छ इलाके में पाए गए जीवाश्मों से इस बात की पुष्टि हुई की डॉलफिन और व्हेल शार्क और सार्डीन की तुलना में हिप्पोपोटोमस और गायों के ज्यादा नजदीकी तौर से संबंधित थे.

जलवायु परिवर्तन के साथ इंसान ने कैसे ढाला था खुद को 3 लाख साल पहले

इस तरह के जीवों की बहुतायत
मिश्रा और उनके डच-अमेरिकी जीवाश्मविज्ञानी साथी हैन्स थेविसीन ने कच्छ में इयोसीन युग की लाल एवं पीली चट्टानों के आसपाल के इलाकों में खोजबीन की. उस समय दुनिया का मौसम शांत था. उस दौर का वह मौसम बिल्ली के आकार के हिरण के जैसे खुर वाले स्तनपायी जानवरों के लिए अच्छा था जिन्हें इंदूहायस या भारतीय सुअर कहा जाता है.

कश्मीर में भी मिले थे बहुता सारे जीवाश्म
साल 1980 में भारत के एक भूगर्भशास्त्री ए. रंगा राव ने कश्मीर के कालाकोट में बहुत सारे जीवाश्म जमा किए थे. जिसमें इंदुहायस भी शामिल थे. इस राव के गुजरने के बाद उनकी पत्नी ने थेविसीन को 2005 में सौंपे थे. थेविसीन के जीवाश्म की देखरेख करने वाले से अखरोट के आकार का खोल जैसी हड्डी टूट गई. यह हट्टी एक कटोरे के आकार की कान की हड्डी थी जो बिलकुल व्हेल की हड्डी की जैसी थी.

Wolf, whale, fossil,
व्हेल (Whale) के पूर्वज 5 लाख साल पहले भेड़ियों (Wolf) की तरह दिखाई देते थे. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


व्हेल को चार पैर वाले पूर्वज
यह खोज पहला ऐसा संकेत थी जिससे पता चला कि व्हेल मछली के विकास खुर वाले जमीन पर चलने वाले शाकाहारी जानवरों से संबंधित था जबकि ऐसा आज की व्हेल में बिलकुल दिखाई नहीं देता. इंदुहायर शायद व्हेल के सबसे पुराने पूर्वजों में से एक थे. उस समय चार पैरों वाले व्हेल के पूर्वज पानी में गोता लगाते थे.

रूसी वैज्ञानिकों ने खोजी खोपड़ी जिसकी 5 हजार साल पहले हुई थी दिमाग की सर्जरी

और जयादा अध्ययन से पता चला कि कैसे अन्य पुराने जीवों का विकास हुआ जैसे तीखे दातों वाले कैकीसेटस से ओटर जैसे एम्पुलोसेटस और छोटे पैरों वालेरेमिंग्टनोसेटस में विकसित हुए. थिविसेन का कहना है कि व्हेल के पूर्वज पहले व्हेल के बजाय भेड़ियों की तरह ज्यादा लगते थे और बाद में मगरमच्छ के जैसे लगने लगे. फिर इसके बाद व्हेल सील या सी लायन्स और ओटर्स के जैसी लगने लगीं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज