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1200 प्रकाश वर्ष दूर मिला गुरू से 3 गुना बड़ा बाह्यग्रह, जानिए क्या है खासियत

1200 प्रकाश वर्ष दूर मिला गुरू से 3 गुना बड़ा बाह्यग्रह, जानिए क्या है खासियत

हमारे सौरमंडल में पृथ्वी जैसे और ग्रहों के न होने का कारण गुरू ग्रह है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हमारे सौरमंडल में पृथ्वी जैसे और ग्रहों के न होने का कारण गुरू ग्रह है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खगोलविदों को 1200 प्रकाशवर्ष दूर एक सौरमंडल में गुरू ग्रह (Jupiter) से तीन गुना बड़ा बाह्यग्रह (Exoplanet) मिला है जिससे कई सवालों के जवाब मिले हैं.

नई दिल्ली: हमारे खगोलविद (Astronomers) अंतरिक्ष में गहराई से नई-नई जानकारी ढूंढने की कोशिश करते रहते हैं. इस बार उन्हें एक और चौंकाने वाली जानकारी मिलती है. हमारी धरती से 1259 प्रकाश वर्ष दूर एक सौरमंडल में हमारे गुरू या बृहस्पति ग्रह (Jupiter) से तीन गुना ज्यादा बड़ा ग्रह मिला है.

कैसा है इस ग्रह का सौरमंडल
केप्लर 88 नाम के इस सौरमंडल मे दो और ग्रह हैं. द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल के अनुसार यह बहुत ही बड़ा सौरमंडल माना जा रहा है. केप्लर 88-डी नाम का यह ग्रह अंडाकार कक्षा में अपने सूर्य का चक्कर हर चार साल में लगाता है. हवाई इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने डब्ल्यू एम केक ऑबजर्वेटरी में छह साल के अवलोकन से इस ग्रह को खोजा है.

बहुत समय से उलझा रखा था इस सिस्टम ने वैज्ञानिकों को
इस खोज ने केप्लर 88 सिस्टम पर नया प्रकाश डाला है जिसकी विशेषताओं के संबंध में खगोलविद बहुत समय से परेशान थे. इस सिस्टम के दो ग्रह अपने तारे के बहुत ही पास हैं. इन्हें केप्लर 88बी और केप्लर 88सी कहा जाता है. इन दोनों की कक्षाओं में खास संबंध है जिसे ‘मोशन रजोनेन्स’ (motion resonance) कहा जाता है.

क्या है इस सिस्टम के ग्रहों की रेजोनेन्स
इस सिस्टम के केप्लर-बी जो कि एक नेप्च्यून के आकार का ग्रह है, अपने सूर्य के सबसे पास है और उसका चक्कर 11 दिन में लगा लेता है. वहीं इसका दूसरा ग्रह केप्लर 88-सी ग्रह जो हमारे गुरू ग्रह के बराबर है 22 दिन में अपना चक्कर पूरा कर लेता है. केप्लर-बी की हर दो परिक्रमा पर उससे 22 गुना ज्यादा बड़ा केप्लर-सी एक परिक्रमा पूरी करता है.

Planet
सुदूर ग्रहों में इतना बड़ा ग्रह आज तक नहीं देखा गया.


गुरुत्वाकर्षण की भी है इसमें भूमिका
 इसी रेजोनेन्स के कारण दोनों ग्रहों का एक दूसरे पर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव भी पड़ता है. इसी वजह से छोटे ग्रह की परिक्रमा की गति में भी परिवर्तन होता है जो कभी कम होती है तो कभी ज्यादा लेकिन नतीजा संतुलित ही रहता है.

हमारे सौरमंडल के ग्रहों पर भी है बृहस्पति का असर
हमारे सौरमंडल में भी गुरू ग्रह का अपने ज्यादा भार के कारण दूसरे ग्रहों पर बहुत प्रभाव है. माना जाता है कि हमारे सौरमंडल में मंगल ग्रह का आकार छोटा है और क्षुद्रग्रहों की उपस्थिति गुरू ग्रह के प्रभाव के कारण ही है.

केप्लर-डी की भी होगी प्रभावशाली भूमिका
शोधकर्ताओं को लगता है कि इसी प्रकार का प्रभाव केप्लर-डी अपने सिस्टम के बाकी ग्रहों पर डालता होगा. प्रमुख शोधकर्ता लॉरेन वेइस का मानना है कि  पूरी संभावना है कि गुरू ग्रह के वजन का केप्लर-सी पर अपने से तीन गुना बड़े ग्रह केप्लर-डी का खासा असर हुआ होगा. और केप्लर डी ही इस सिस्टम में सबसे प्रभावशाली ग्रह हो.

ऐसे ही बेहतरीन तालमेल वाले मिले हैं छह ग्रह
गौरतलब है कि पिछले महीने ही शोधकर्ताओं ने एक छह ग्रहों का सौरमंडल खोजा था जिनकी परिक्रमा का तालमेल भी एक बेहतरीन मोशन रेजोनेन्स दिखाता है. उस सिस्टम में ग्रहों की रेजोनेन्स 3:2 के अनुपात की सटीकता से काम करती है. इसमें जब सूर्य के पास वाला ग्रह तीन चक्कर लगाता है तब उससे अगला ग्रह दो चक्कर पूरे करता है. यह बर्ताव सारे के सारे छह ग्रहों में भी दिखाई देता है.

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Tags: Research, Science, Space

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