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तीन तारों के सिस्टम के बाह्यग्रह की खोज की हुई पुष्टि, 10 साल का लगा समय

यह बाह्यग्रह (Exoplanet) 10 साल पहले नासा (NASA) के केप्लर टेलीस्कोप की मदद से खोजा गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
यह बाह्यग्रह (Exoplanet) 10 साल पहले नासा (NASA) के केप्लर टेलीस्कोप की मदद से खोजा गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

दस साल पहले खोजे गए एक बाह्यग्रह (Exoplanet) की पुष्टि खगोलविदों ने हाल ही में की है जो एक जटिल तीन तारों के सिस्टम (Triple Star System) का हिस्सा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 17, 2021, 1:04 PM IST
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पृथ्वी (Earth) के इतिहास और उस पर जीवन की उत्पत्ति (Origin of Life) को समझने के लिए वैज्ञानिक बाह्यग्रहों (Exoplanet) का अध्ययन करते हैं. ये ग्रह हमारे सौरमंडल (Solar Ssytem) के बाहर सुदूर तारों (Stars) के बीच स्थित होते हैं जिनका अपना सूर्य (Sun) होता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि बहुत सारे बाह्यग्रह ऐसे भी जिनका एक नहीं बल्कि अधिक सूर्य हैं. हमारी गैलेक्सी मिल्की वे (Milky Way) में पाए गए ऐसे सिस्टम की पुष्टि की गई है जिसमें ग्रह तीन तारों (Triple Stars) का चक्कर लगा रहा है.

एक दशक पहले देखा था इसे पहली बार
यह सिस्टम पृथ्वी से 1800 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है जिसमें एक ग्रह तीन तारों का चक्कर लगा रहा है. KOI-5 नाम के यह सिस्टम सिग्नस तारामंडल में स्थित है और इसके बाह्यग्रह की पुष्टि इसे पहली बार देखने के एक दशक बाद हुई. दस साल पहले नासा के केप्लर स्पेस टेलीस्कोप से इसे सबसे पहले देखा गया था. इस खोज की घोषणा अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की 237वीं सभा में हुई है.

क्यों नहीं मिली तब इसे मान्यता
इस ग्रह का नाम KOI-5b रखा गया है. यह साल 2009 में केप्लर टेलीस्कोप के कामकाज दोबारा शुरू करने के बाद खोजा गया दूसरा टेलीस्कोप था.नासा के एक्सोप्लैनेट साइंस इंस्टीट्यूट के खगोलविद डेविड सिआर्डी ने बताया कि KOI-5b को उस समय मान्यता नहीं दी गई थी क्योंकि वह जटिल था और खगोलवोदों के पास अध्ययन करने के लिए हजारों उम्मीदवार थे जबकि KOI-5Ab से ज्यादा आसान ग्रह अध्ययन के लिए उपलब्ध थे. सिआर्डी का कहना था कि खगोलविद हर दिन केप्लर से नया सीख रहे थे. इसलिए KOI-5Ab इसे एक तरह से भुला ही दिया गया था.





बहुत कम ध्यान दिया जाता है इन पर
यह कोई अपवाद वाली स्थिति नहीं है कि बाह्यग्रहों का अध्ययन करने वाले बहु तारों के सिस्टम से बचने की कोशिश करते हैं. अभी तक 4300 बाह्यग्रहों की खोज की जा चुकी है इनमें से करीब 10 प्रतिशत बहु तारों के सिस्टम के हैं. जबकि हकीकत यह है कि गैलेक्सी में बहु तारों के सिस्टम की संख्या ज्यादा है.

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दो और तारों की खोज
केप्लर टेलीस्कोप से KOI-5Ab की पहचान के  बाद सिआर्डी और दूसरे खलोलविदों ने जमीन पर स्थित पालोमर वेधशाला, डब्ल्यूएम केक वेधशाला और जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप का उपयोग कर सिस्टम का अध्ययन किया. साल 2014 तक KOI-5B और KOI-5C नाम के दो साथी तारों की भी खोज कर ली. लेकिन इससे समस्या यह आई कि जो केप्लर से तारों में जो धुंधलापन अवलोकित किया गया था वह बाह्यग्रह के कारण आ रहा है या किसी और वजह से. इसके बाद बहुत कठिन होने के कारण यह प्रोजोक्ट फिर से ठंडे बस्ते में चला गया.

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बाह्यग्रह (Exoplanet) का अध्ययन वैसे भी बहुत ही मुश्किल काम होता है ऐसे में तीन तारों के सिस्टम ने इसमें जटिलता ला दी थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: @ESO)


कैसा है यह बाह्यग्रह
पुराने आंकड़ों का फिर से अवलोकन करने के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि वास्तव में एक ग्रह KOI-5A तारे का चक्कर लगा रहा है और यह तीन तारों का सिस्टम है. KOI-5Ab यह एक विशाल गैस ग्रह है जिसका भार हमारे शनि ग्रह का आधा है, आकार पृथ्वी से सात गुना ज्यादा है, और इसकी कक्षा भी तिरछी है. यह ग्रह KOI-5A का चक्कर 5 दिनों में लगा लेता है.

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और तीन तारों का हाल
KOI-5A और KOI-5B मिलकर पास के दो तारों का छोटा सिस्मट बनाते हैं और उनकी कक्षा का समय करीब 30 साल है. वहीं तीसरा तारा KOI-5C  दो तारों से ज्यादा दूर स्थित है और यह उनका चक्कर 400 साल में लगाता है. जो  कि प्लूटो के 248 साल की कक्षा से कहीं ज्यादा है. KOI-5Ab के आकाश में KOI-5A प्रमुखता से दिखेगा, KOI-5B भी ऐसे दिखेगा जैसे शनि ग्रह पर सूर्य दिखता है, लेकिन KOI-5C एक चमकीले तारे की तरह दिखाई देगा.
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