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किम जॉन्ग उन के साथ उत्तर कोरिया में तानाशाही का होगा अंत!

किम जॉन्ग उन के साथ उत्तर कोरिया में तानाशाही का होगा अंत!

किम जॉन्ग उन के स्वास्थ्य को लेकर लगातार संशय बरकरार है.

किम जॉन्ग उन के स्वास्थ्य को लेकर लगातार संशय बरकरार है.

एक्सपर्ट का दावा है कि द्वितीय विश्वयुद्ध (Second world war) के बाद से अब तक कुल 18 तानाशाही फैमिली (Family Dictatorship) में से 12 के शासन का अंत हो चुका है. खानदानी तानाशाही एक झटके के साथ खत्म होती हैं.

    उत्तर कोरिया(North Korea) के शासक किम जोंग उन (Kim Jong Un) के स्वास्थ्य को लेकर रहस्य बरकरार है. सबसे पहले उसकी सर्जरी फेल होने की खबरें आईं. फिर दक्षिण कोरिया की तरफ से किम की मौत की खबरों को नकारा गया. इसी बीच मीडिया में ऐसी भी खबरें चलीं कि अब किम की बहन किम यो जॉन्ग उत्तर कोरिया की शासक बन सकती है. लेकिन ऐसे भी दावे किए जा रहे हैं कि कहानी उलट भी सकती है. उत्तर कोरिया में लंबे तानाशाही शासन का अंत भी हो सकता है.

    फॉरेन पॉलिसी मैगजीन में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक उत्तर कोरिया में तानाशाही का अंत भी हो सकता है. लेख में कहा गया है कि दुनिया के कई तानाशाही शासन छोटी सी त्रासदी के कारण एक साल के भीतर ही खत्म हुए हैं. वैसे भी दुनिया में एक्सपर्ट ये दावा करते रहे हैं कि उत्तर कोरिया में तानाशाही का अंत नजदीक है.

    कहा जा रहा है कि किम जोंग उन के बाद उनकी बहन किम यो उत्तर कोरिया की सत्ता संभालेंगीं.


    ढह चुकी हैं कई खानदानी तानाशाही
    एक्सपर्ट का दावा है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से अब तक कुल 18 तानाशाही फैमिली में से 12 के शासन का अंत हो चुका है. इन परिवारों के तानाशाही शासन का औसत 32 वर्ष है. हालांकि उत्तर कोरिया में किम जॉन्ग उन का परिवार सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब रहा है. 1948 से शुरू हुए इस तानाशाही के दौर में देश ने जबरदस्त अकाल, भीषण आर्थिक मुश्किलें, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और विदेशी व्यापार पर प्रतिंबध देखे हैं.

    अगर अभी के लिहाज से देखा जाए तो किम जॉन्ग उन की सत्ता को कोई चैलेंज तो नहीं दिखाई देता. न जनता की तरफ से और न ही राजनीतिक तौर पर. लेकिन एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि इस तरह की खानदानी तानाशाही एक झटके में ही खत्म होती है. कई बार इसके खात्मे के पहले कोई भी लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. माना जा रहा है कि किम के बाद उनकी बहन देश की शासक बन सकती हैं जो शायद दुनिया की पहली महिला तानाशाह होगी.



    चीन और अमेरिका का बढ़ सकता है दखल
    अगर किम जॉन्ग उन की मौत होती है तो उत्तर कोरिया के मामले में चीन और अमेरिका का दखल बढ़ सकता है. बीते सालों में दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर अमेरिका ने कई युद्धाभ्यास किए हैं. माना जाता है कि इन युद्धाभ्यासों का मंतव्य दक्षिण कोरिया की युद्ध के समय तैयारियों का जायजा लेना होता है. दोनों देशों के बीच गठबंधन मजबूत है.

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और दक्षिण कोरिया दोनों ही इस वक्त उत्तर कोरिया की स्थितियों पर गंभीरता के साथ निगाह बनाए गुए हैं. उत्तर कोरिया में किम के अंत के साथ अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता परमाणु हथियारों को समाप्त करने की होगी. फॉरेन पॉलिसी के लेख में दावा किया गया है कि इस वक्त उत्तर कोरिया के पास के 20 से 60 तक परमाण हथियार मौजूद हो सकते हैं.

    उत्तर कोरिया पर चीन की निगाहें भी इस वक्त बनी हुई हैं. बीते एक दशक के दौरान चीन अमेरिका के लिए बड़ा प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरा है. सामान्य तौर पर माना जा रहा है कि चीन का उत्तर कोरिया के मामले में दखल सिर्फ बॉर्डर तक सीमित होगा. और अगर वहां से रिफ्यूजी आए तो चीन उन्हें अपने देश में घुसने नहीं देगा. लेकिन परमाणु हथियारों और बदलती हुई भूराजनीतिक स्थितियों की वजह से संभव है कि चीन का दखल ज्यादा हो. चीन इस इलाके में ज्यादा दखल के लिए मिलिट्री का इस्तेमाल भी कर सकता है.

    यह भी दावा किया जा रहा है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों तक चीन की पहुंच अमेरिका से जल्दी हो जाएगी. इसका कारण चीन की उत्तर कोरिया के साथ भूराजनीतिक नजदीकी है. चीन ने किम जॉन्ग उन के इलाज के लिए उत्तर कोरिया डॉक्टरों का दल भी भेजा है. उत्तर कोरिया से नजदीक होने की वजह से इंटेलिजेंस के जरिए सटीक जानकारी मिलना भी चीन के लिए ज्यादा आसान है.

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    Tags: America, China, Donald Trump, North Korea, North korea tension, Xi jinping

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