Explained : देश में अचानक क्यों बेतहाशा बढ़ने लगे हैं COVID-19 के केस?

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा नए केस सामने आए हैं

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा नए केस सामने आए हैं

एक तरफ वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों को जागरूक (Vaccination Program) किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ अचानक कोरोना वायरस (Corona Virus) के मामले कई गुनी रफ्तार से बढ़ने लगे हैं. जानिए कि आंकड़े और एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 22, 2021, 4:26 PM IST
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कोविड-19 का प्रकोप एक बार फिर भारत के राज्यों में बढ़ता हुआ दिख रहा है. दिल्ली (Delhi Covid-19) और महाराष्ट्र समेत आठ राज्यों में लगातार ग्राफ (Covid-19 Cases in Maharashtra) बढ़ रहा है तो केरल में लगातार केस कम होते दिखने लगे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों की ज़ुबानी पूरी कहानी समझी जाए तो कोरोना की इस नई लहर (Corona New Wave) में 81 फीसदी से ज़्यादा मौतें सिर्फ़ पांच राज्यों में हुई हैं. इन आंकड़ों की पूरी कहानी के बीच जानने की बात यह है कि भारत में कोरोना की इस दूसरी लहर के पीछे विशेषज्ञ कारण क्या मान रहे हैं?

16 राज्यों के 70 ज़िले सबसे खराबहाल

स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो इन 70 ज़िलों में 1 से 15 मार्च के बीच कोरोना केसों में 150% की बढ़ोत्तरी देखी गई. वहीं 17 राज्यों के 55 ज़िलों में संक्रमण की रफ्तार 100 से 150% तक दिखी. ये ज़िले ज़्यादातर पश्चिम और उत्तर भारत के बताए गए.

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आंकड़ों की गंभीरता यह है कि इस लहर में कोरोना संक्रमण हर हफ्ते 43% बढ़ रहा है, जबकि देश भर में रोज़ाना होने वाली मौतों की संख्या 37% की रफ्तार से बढ़ती देखी गईं. देश भर के नए केसों का 76.22 फीसदी हिस्सा सिर्फ तीन राज्यों में है. महाराष्ट्र में 62%, केरल में करीब 9% और पंजाब में करीब 5%.

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कोविड-19 के दौर में हरिद्वार में कुंभ का आयोजन हुआ,​ जिसमें लाखों करोड़ों श्रद्धालु शामिल हुए.




कुल मिलाकर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उनके मुताबिक महाराष्ट्र और गुजरात में कोविड-19 की नई लहर को लेकर हालात ज़्यादा खराब हो रहे हैं. यहां भारी लॉकडाउन की नौबत आ रही है, जबकि गुजरात में तो हीरा और कपड़ा उद्योग पर मार पड़ने की खबरें तक आ गई हैं. देश के साथ ही इन दो राज्यों में नई लहर के कारणों का मुआयना करते हैं.

क्या हैं नई लहर की वजहें?

फरवरी के महीने में जहां देश भर में 10,000 से भी कम केस दर्ज किए गए, वहीं 20 मार्च तक साप्ताहिक औसत 31,651 नए केसों का रहा. अब विशेषज्ञों के मुताबिक जो खबरें आ रही हैं, उनकी मानें तो एक नहीं, कई कारणों से केसों के बढ़ने का दौर जारी है.

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1. पांच राज्यों में कुछ ही दिनों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, तो लंबे समय से चुनावी रैलियां और कार्यक्रम जारी हैं. एक्सपर्ट साफ कह रहे हैं कि यह केस बढ़ने की बड़ी वजह है.

2. पिछले करीब डेढ़ महीनों से देश भर में शादियों की संख्या के साथ ही अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में भी तेज़ी आई है. सामाजिक कार्यक्रम बढ़े हैं.

3. हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन हुआ, जिसमें देश भर से लाखों नहीं, करोड़ों लोग शामिल हुए. और मेला हो या मांगलिक सामाजिक कार्यक्रम, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क संबंधी नियमों की बेतहाशा अनदेखी हुई.

4. डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्करों ने पिछले साल दिन रात काम किया इसलिए इस साल केस लोड कम होने पर उन्होंने भी आराम का समय निकाला. पूरा सिस्टम एक तरह से ढीला पड़ा.

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महाराष्ट्र में कोरोना के केस बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं.


5. मीडिया ने कोरोना संक्रमण को लेकर कवरेज कम किया, जिससे लोगों ने संक्रमण को काफी हल्के में लेना शुरू कर दिया. वहीं, लॉकडाउन पूरी तरह खुल गए और लोग सामान्य जीवन में लौटे तो दूरी रखने और मास्क लगाने जैसी सावधानियां भी छोड़ दी गईं.

महाराष्ट्र में नई लहर की वजहें?

विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य के बॉर्डर खुल जाने से आवागमन बेतहाशा बढ़ा. इसी वजह से महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में केस बढ़ने लगे और बढ़ेंगे. सेरो सर्वे के मुताबिक महाराष्ट्र के संवेदनशील ज़िलों में पहले ही संक्रमण काफी फैल चुका था. हालांकि यह साबित नहीं हो सका है कि दोबारा संक्रमण के मामले ज़्यादा हैं या नहीं.

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दूसरी तरफ, कुछ हिस्सों में देखा गया कि इस बार वायरस फैलने की रफ्तार ज़्यादा है, लेकिन उसके घातक होने की कम. इस बार उम्रदराज़ लोग पहले की तुलना में ज़्यादा चपेट में आ रहे हैं और यह भी गौरतलब ट्रेंड है कि पूरा परिवार या मोहल्ला ही संक्रमित पाया जा रहा है.

यह भी कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में प्रति दस लाख आबादी पर टेस्टिंग कम हो रही है. एक्स्पर्ट मान रहे हैं कि हालात जुलाई से सितंबर 2020 जैसे होते नज़र आ रहे हैं. इस बार नए स्ट्रेनों को भी संक्रमण का एक कारण माना जा रहा है ​लेकिन ये स्ट्रेन पहले जितने जानलेवा नहीं बताए गए हैं.

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इंटरनेशनल मैच के दौरान भीड़ न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और न ही मास्क का.


गुजरात में क्यों बढ़ रहे हैं केस?

एक्सपर्टों की मानें तो अन्य राज्यों से शादी व कारोबार के सिलसिले में यात्राएं बढ़ने और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच बड़े स्तर पर आयोजित किए जाने के चलते गुजरात में केस बढ़े. गुजरात के सूरत जैसे कुछ ज़िलों में प्रवासी लोगों की आबादी अच्छी खासी है, जिसके चलते यात्राएं बढ़ीं.

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इसके अलावा गुजरात में स्थानीय निकायों के चुनाव भी पिछले दिनों हुए, जिसके चलते भीड़ जमा होने की नौबत तो बनी ही, सावधानियों में लापरवाही भी साफ रही.

अब आगे क्या?

गुजरात के साथ ही कुछ राज्य सरकारें इस अंदेशे को गलत कह रही हैं कि पूरी तरह लॉकडाउन की नौबत आ सकती है, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह खतरा बना हुआ है. महाराष्ट्र में तो इस तरह की घोषणाएं होने भी लगी हैं. वहीं, होली का त्योहार अगले हफ्ते है और उसके कुछ ही दिनों बाद पांच राज्यों में चुनाव भी, तो संक्रमण का दौर फिलहाल टलता हुआ नहीं दिख रहा.
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