सवाल-जवाब: कोविड वैक्सीन एस्ट्राजेनेका को क्यों सही मान रहे हैं एक्सपर्ट

एस्ट्राजेनिका (Astra Zeneca) वैक्सीन के एक बैच की वैक्सीन लगवाने वालों में कुछ लोगों को ब्लड क्लॉट की शिकायत मिली है. (कॉन्सेप्ट इमेज.)

यूरोपीय देशों (European Countries) ने कोविड वैक्सीन एस्ट्राजेनेका (Astra Zeneca) पर रोक लगा दी है. ऐसा साइड इफेक्ट के रूप में हुए ब्लड क्लॉट (Blood Clots) की रिपोर्ट्स के आधार पर हुआ है.

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    कोरोना वायरस (Corona Virus) एक बार फिर से बहुत तेजी से यूरोप (Europe) में फैल रहा है. विशेषज्ञ इसे तीसरी लहर मान रहे है. इसी बीच कई यूरोपीय देशों ने ऑक्सफोर्ड- एस्ट्राजेनेका (Astra Zeneca) वैक्सीन पर अस्थाई रोक लगा दी है. ऐसा वैक्सीन के साइड इफेक्ट के तौर पर हुए ब्लड क्लॉट (Blood Clots) की रिपोर्ट्स के आधार पर हुआ है. इस रोक की वजह से कई आशंकाएं और सवाल भी उठने लगे हैं.

    क्या हुआ था आखिर
    यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी (EMA) के विशेषज्ञ इस मामले की छानबीन कर रहे हैं. इससे पहले पिछले सप्ताह ऑस्ट्रिया दवा नियामक प्राधिकरण ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के एक बैच के उपयोग को रद्द कर दिया था जबकि एक व्यक्ति की इस बैच से वैक्सीन लगने के दस दिन के बाद मौत हो गई. उसे मल्टीपल थर्मोबायोसिस यानी खून की नसों में थक्के जमने की शिकायत हुई थी जो उसके लिए जानलेवा साबित हुई.

    किन देशों ने लगाई है इस वैक्सीन पर रोक?
    इस वैक्सीन पर फ्रांस, इटली, जर्मनी, डेनमार्क, नॉर्वे, आइसलैंड, ऑस्ट्रिया, एसटोनिया, बुल्गारिया, रोमानिया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, लातविया, जैसे देशों ने इस वैक्सीन के उपयोग पर अस्थाई रोक लगा दी है. इन देशों का कहना है कि यह उन्होंने एहतियाती कदम के तौर पर ऐसा किया है और यह केवल जांच पूरी होने तक रोग लगाई गई है.

    क्या हर मामले में जानलेवा साबित हो रही है वैक्सीन
    फिलहाल जांच जारी है, लेकिन यह दावा करना गलत ही होगा. यूरोप के नियामक निकाय का कहना है कि कोविड-19 को रोकने के लिए वैक्सीन के उपायों का पलड़ा साइड इफेक्ट के जोखिमों पर भारी है. वहीं यह भी कहा गया कि एक दूसरे व्यक्ति को वैक्सीन लगने के बाद अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था जिसे पल्मनरी एम्बॉलिज्म की शिकायत हुई थी. इसमें फेफड़ों के नसों में ब्लॉकेज हो जाता है. बताया जा रहा है कि अब इस मरीज की हालत में सुधार आ रहा है.

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    यूरोप में वैक्सीन (Vaccine) लगवाने वाले से बहुत कम लोगों से इस तरह की शिकायत मिली है.


    कितने लोगों को लगी थी इस बैच की वैक्सीन
    ईएमए के मुताबिक 9 मार्च तक ऑस्ट्रिया के इसी बैच की वैक्सीन के लगने वाले लोगों में दो और थर्मोबोएमबॉलिक मामले सामने आए हैं. यूरोपीय इकोनॉमिक एरिया में 30 लाख लोगों में से 22 मामलों में इस तरह की शिकायत पाई गई है. बैच ABV5300 की वैक्सीन 17 यूरोपीय देशों में  वितरित की गई थी. इनसे 10 लाख लोगों को वैक्सीन लगी थी.

    क्या करें और क्या ना करें, जब लगवाने जाएं वैक्सीन

    बहुत ही कम संख्या है ये और...
    15 मार्च तक की जांच के बारे में ईएमए का कहना है कि वैक्सीन लेने वालों में ब्लड क्लॉट से संबंधित कुछ असामान्य मामले सामने आए हैं जो बहुत ही कम मामले हैं. ईएमए ने यह बताया कि यूरोपीय यूनियन में हर साल हजारों लोगों को अलग अलग कारणों से ब्लड क्लॉट की शिकायत होती है. आम लोगों की तुलना में वैक्सीन लगवाने वालों में थर्मोबोएम्बोलिक मामलों की संख्या ज्यादा दिखाई नहीं दी है.

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    वैक्सीन (Vaccine) को लेकर आमतौर पर पहले से ही लोंगों में आशंकाएं होती है.


    कहीं जल्दबाजी तो नहीं
    इतना ही नहीं ईएमए खून की बीमारियों वाले विशेषज्ञों के साथ भी काम कर रही है.  ईएमए का कहना है कि वह फिलहाल यही मानती है कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के फायदे अस्पताल में भर्ती करने की नौबत और मौत के जोखिम वाले साइड इफेक्ट्स से कहीं ज्यादा है. दूसरी ओर यह भी गलत नहीं है कि वैक्सीन को लेकर लोगों में पहले से ही शंकाएं होती हैं और इस वजह से लोग अफवाहों पर भी जल्दी भरोसा करते हैं जबकि अभी जांच एजेसियां अंतिम नतीजे पर  पहुंचने की स्थिति में नहीं आई हैं.

    क्या वाकई अल्ट्रासाउंड तरंगों से खत्म हो सकता है कोरोना वायरस?

    ऑस्ट्रिया के अलावा डेनमार्क की मेडिसिन एजेंसी का भी यह मानना है कि अभी बल्ड क्लॉट और वैक्सीन का आपस में सीधा संबंध नहीं पता लग सका है. एस्ट्राजेनेका का कहना है कि वैक्सीन पर शुरू से निगरानी रखी जा रही है डेढ़ करोड़ से ज्यादा को वैक्सीन लग चुकी है जिनमें कोई साइड इफेक्ट्स नहीं दिखे हैं. वहीं शिकायत वाले मामले भी जताई गई संभावना से बहुत ही ज्यादा कम है. भारत में भी वैक्सीन और किसी गंभीर मामले का कोई संबंध अभी तक नहीं दिखा है. फिर भी पूरी एहतियात बरती जा रही है.