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Fastag : क्या है, क्यों ज़रूरी, कैसे पाएं, कब तक वैध... हर सवाल का जवाब

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

हाईवे पर वाहनों से शुल्क वसूली (Toll Collection) के लिए फास्टैग (FASTag) इलेक्ट्रॉनिक तकनीक है, जिसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) होता है. 2021 शुरू होते ही हर वाहन के लिए यह अनिवार्य होगा इसलिए अब आप इसे इग्नोर नहीं कर सकेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 29, 2020, 8:10 PM IST
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अगर आप सड़क मार्ग (By Road Travelling) के ज़रिये नेशनल हाईवे या फिर दो प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करते हैं तो आपने यकीनन टोल प्लाज़ा (Toll Plaza on Highways) पर फास्टैग (FASTag) के बोर्ड पिछले कुछ समय में देखे होंगे. सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय (Road Transport & Highway Ministry) ने 1 जनवरी से टोल प्लाज़ा से गुज़रने वाले वाहनों के लिए FASTag अनिवार्य करने की पुष्टि कर दी है. हालांकि मंत्रालय ने पिछले साल इसे ​अनिवार्य किए जाने के साथ ही यात्रियों को टोल पर कैश भुगतान (Cash Payment Facility) की सुविधा भी दी गई थी.

अब, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने FASTag को ही एकमात्र विकल्प के तौर पर अनिवार्य किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा ​है कि टोल भुगतान के समय ई भुगतान भी हो सकेंगे ताकि कैशलेस और कॉंटैक्टलेस पेमेंट हो सकें. यहां FASTag से जुड़े हर सवाल का जवाब हम आपको फटाफट दे रहे हैं.

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क्या है फास्टैग?


जैसे ही आपकी गाड़ी देश में किसी भी नेशनल हाईवे के किसी भी टोल प्लाजा पर आती है, तो टोल प्लाजा पर लगा सेंसर वाहन के विंडस्क्रीन पर लगे फास्टैग स्टिकर को ट्रैक करता है. आपके फास्टैग अकाउंट से उस टोल प्लाजा पर लगने वाला शुल्क कट जाता है. इस तरह आप प्लाजा पर रुके बगैर भुगतान कर पाते हैं. जब आपके फास्टैग अकाउंट की राशि खत्म हो जाएगी, तो आपको उसे रिचार्ज करवाना पड़ेगा. इसे चेक या यूपीआई/डेबिट कार्ड/क्रेडिट कार्ड/NEFT/नेट बैंकिंग आदि के माध्यम से रिचार्ज किया जा सकता है.

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अब तक टोल प्लाज़ा पर फास्ट लेन के साथ ही कैश पेमेंट की सुविधा भी रही.


क्या हैं फास्टैग के फायदे?
>> इससे आप टोल प्लाज़ा जल्दी क्रॉस कर जाते हैं क्योंकि आपको पेमेंट के लिए रुकना नहीं होता.
>> नॉन स्टॉप पेमेंट होने से महामारी और संक्रमण के खतरे न के बराबर होते हैं.
>> कैशलेस भुगतान होने से मिलने वाली तमाम सुविधाएं यहां भी मिल जाती हैं और डिजिटल इंडिया बनने की दिशा में यह बड़ा कदम साबित होता है.
>> चूंकि यह कैशलेस पेमेंट होता है इसलिए इसमें धांधली की गुंजाइश कम हो जाती है.
>> आपके वाहन से ईंधन, समय की खपत कम होती है और प्रदूषण भी कम होता है.

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फास्टैग के लिए कौन से दस्तावेज़ ज़रूरी हैं?
इसके लिए आपको वाहन के रजिस्ट्रेशन के साथ ही अपनी निजी पहचान संबंधी दस्तावेज़ केवाईसी के तौर पर देने होते हैं. अगर आप स्टिकर उस बैंक से ले रहे हैं, जहां पहले ही आप कस्टमर हैं तो वहां आपको सिर्फ आरसी देनी होगी. इसी तरह एयरटेल और पेटीएम के अगर कस्टमर हैं तो सिर्फ आरसी ज़रूरी है.

क्या है फास्टैग की कीमत?
>> कार, जीप, बस, ट्रक यानी वाहन के हिसाब से इसकी कीमत तय होती है.
>> आप जिस बैंक या जगह से फास्टैग खरीदते हैं, सिक्योरिटी डिपॉज़िट और फीस आदि को लेकर उसकी अपनी नीतियां होती हैं.

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फिर भी मिसाल के तौर पर अगर पेटीएम के ज़रिये आप अपनी निजी कार के लिए फास्टैग लेते हैं और 500 रुपये अदा करते हैं तो इसमें 250 रुपये सिक्योरिटी डिपॉज़िट होता है, 100 रुपये जारी करने का शुल्क और 150 रुपये मिनिमम बैलेंस. किसी बैंक से यह 400 रुपये तक में भी मिल सकता है और टोल प्लाज़ा पर इसकी कीमत और कम भी हो सकती है.

फास्टटैग कैसे खरीदें?
राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा और भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई, कोटक, एचडीएफसी, एक्सिस जैसे 22 विभिन्न बैंकों से फास्टैग स्टिकर खरीदे जा सकते हैं. ये पेटीएम, एमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं. अगर आपका बैंक अकाउंट फास्टैग से लिंक होता है, तो पैसे सीधे खाते से कट जाते हैं और Paytm वॉलेट फास्टैग से लिंक हो तो भुगतान सीधे वॉलेट से हो जाता है.

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अब नेशनल हाईवे से गुज़रने वाले सभी वाहनों के लिए फास्टैग ज़रूरी होगा.


क्या हम एक फास्टैग का उपयोग दो या अधिक वाहनों के साथ कर सकते हैं?
नहीं, दो वाहनों के लिए दो अलग फास्टैग खरीदने होंगे.

कब तक वैध होता है फास्टैग?
जारी होने की तारीख से फास्टैग की वैधता अगले पांच साल तक की होती है. आपके रिचार्ज की कोई वैधता नहीं होती यानी अगर आपने रिचार्ज के बाद लंबे समय तक नेशनल हाईवे पर यात्रा नहीं की तो यह रिचार्ज फास्टैग की वैधता तक वैध रहेगा.

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किसे फास्टैग की ज़रूरत नहीं होगी?
यह सिर्फ कैश भुगतान के विकल्प के तौर पर अमल में लाया जाने वाला सिस्टम है इसलिए यह सभी के लिए अनिवार्य है. भारत की हाईवे अथॉरिटी ने जिन लोगों को पहले ही टोल भुगतान से रियायत दी है, जैसे जजों, राजनीतिज्ञों, इमरजेंसी सेवाओं के कर्मचारियों आदि को ही इससे मुक्त रखा जाएगा.
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