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Explainer : धर्म परिवर्तन कर हिंदू बनने वाले के लिए कैसे तय होती है जाति, वसीम क्यों बने त्यागी

Explainer : धर्म परिवर्तन कर हिंदू बनने वाले के लिए कैसे तय होती है जाति, वसीम क्यों बने त्यागी

यति नरसिंहानंद सरस्वती ने वसीम रिजवी को हिन्दू धर्म में शामिल कराते हुए कहा कि अब वह त्यागी बिरादरी से जुड़ेंगे.

यति नरसिंहानंद सरस्वती ने वसीम रिजवी को हिन्दू धर्म में शामिल कराते हुए कहा कि अब वह त्यागी बिरादरी से जुड़ेंगे.

Washim Rizvi to Jitendra Narayan Singh Tyagi : एक दिन पहले वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी धर्म बदलकर हिंदू बन गए. उन्होंने अपना नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी रखा है. जिसके बाद ये चर्चाएं भी शुरू हो गईं कि धर्म बदलने के बाद आखिर जाति कैसे तय होती है. इसे लेकर अतीत में कई बार विवाद भी हुए हैं. मामला कोर्ट तक पहुंचा है. संविधान में भी इस बारे में कहा गया है लेकिन ये जानना चाहिए कि वसीम रिजवी के त्यागी जाति स्वीकार करने के पीछे वजह क्या है.

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    उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म कबूल कर लिया है. धर्म बदलने के बाद उनका नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी हो गया. अब सवाल ये उठता है कि कोई शख्स धर्म बदलकर अगर हिंदू बन रहा हो तो वो अपनी जाति कैसे तय करेगा या फिर उसे किस तरह किस जाति में माना जाएगा.

    भारतीय संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता को मूल अधिकारों में रखा गया है. हर नागरिक अपनी पसंद के धर्म को मानने और उसके कर्मकांडों की प्रैक्टिस करने के लिए स्वतंत्र है. वो चाहे तो जरूरत महसूस होने पर धर्म बदल ले. जरूरत न हो तो किसी भी धर्म को न माने. ये बड़ी वजह है कि सामाजिक और धार्मिक परंपराएं अक्सर संवैधानिक मूल्यों से टकराती दिखती हैं.

    ईसाई धर्म में न तो जाति है और न जातिवाद. अगर कोई हिंदू से ईसाई बन रहा है तो उसकी जाति मायने नहीं रखती. वहीं सिखों में भी जाति कोई मायने नहीं रखती. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के एक सदस्य का कहना है कि अगर कोई अपने मन से सिख धर्म को अपनाना चाहता है तो उसका स्वागत है. इसके लिए उसे अमृतपान करना पड़ता है. लेकिन जाति का मामला अक्सर यहां भी उलझता है.

    मुस्लिम धर्म में जाति
    अगर कोई मुस्लिम बनता है तो उसमें जाति का कोई मसला नहीं होता है. मुस्लिम बनने वाले की जाति नहीं खोजी जाती है. हालांकि अगर कोई दलित मुस्लिम बन रहा है तो मुस्लिम समाज में उसे कोई परेशानी नहीं आती है और ना ही उसके साथ किसी तरह का डिस्क्रिमिनेशन होता है.

    जहां तक आरक्षण की बात है तो ये सच है कि अगर कोई दलित मुस्लिम बन रहा है तो वो अपने आरक्षण का लाभ खो देगा. हालांकि कुछ राज्यों में ओबीसी के तहत आने वाली कुछ मुस्लिम जातियां, जो पेशे के हिसाब से बांटी गई हैं, उन्हें सरकार ने ओबीसी माना है और उन्हें आरक्षण का लाभ मिलता है.

    धर्मांतरण होने के बाद हिंदू बनने वालों के सामने जाति तय करना एक गूढ़ विषय रहा है.

    अदालत ने क्या कहा
    फरवरी 2015 में केरल के केपी मनु ईसाई से हिंदू बने. वह अनुसूचित जाति के तहत थे. इसलिए ईसाई से हिंदू बनने के बाद अनुसूचित जाति के कोटे से सरकारी नौकरी करने लगे. इस पर आपत्ति दर्ज हुई और अदालत ने कहा कि उन्हें धर्म बदलने के कारण आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता. फिर ये मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में गया.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘किसी व्यक्ति को हिंदू धर्म में वापसी पर अनुसूचित जाति का लाभ दिया जा सकता है, अगर उस जाति के लोग उसे अपना लें तो. लेकिन उसे ये साबित करना होगा कि उसके पूर्वज उसी जाति के थे.’ कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला कहता है अगर उसकी पुरानी बिरादरी उसको स्वीकार कर लेती है, तो वो उसी जाति का माना जाएगा. मतलब ये भी है कि आप धर्म तो बदल सकते हैं लेकिन जाति नहीं.

    रिजवी क्यों बने त्यागी 
    ये बड़ा सवाल है कि वसीम रिजवी ने जब हिंदू धर्म स्वीकार किया तो उन्होंने अपने नए नाम के साथ त्यागी ही क्यों जोड़ा. पत्रकार से धर्मगुरु बने डॉक्टर नरेश त्यागी कहते हैं, संभव है कि उनके पूर्वज कन्वर्ट होने से पहले त्यागी रहे हों. वैसे भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत से त्यागी मुस्लिम भी हैं. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि त्यागी जाति के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन साथ ही अपने नाम के साथ त्यागी का इस्तेमाल करने वाला ये भी कह सकता है कि उसने सब कुछ त्याग दिया है, इसलिए वो अब त्यागी बन गया है.

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    वसीम रिजवी अक्सर अपने बयानों से विवादों में रहते आए हैं. ये बड़ा सवाल है कि वो हिंदू धर्म स्वीकार करने के बाद त्यागी क्यों बने. क्या उनके पूर्वज कभी त्यागी बिरादरी से ताल्लुक रखते थे. (फाइल फोटो)

    हालांकि रिजवी के त्यागी बनने की एक और वजह सामने आ रही है, वो ये है कि डासना के जिस मंदिर में उन्होंने धर्म बदला, वो त्यागी लोगों के असर वाला मंदिर है. मेरठ निवासी एक पत्रकार कुलदीप त्यागी का कहना है कि इसकी बड़ी वजह उन्हें धर्मांतरण कराने वाले महाराज नरसिंहानंद हैं. वो खुद त्यागी जाति से ताल्लुक रखते हैं, लिहाजा रिजवी ने अपने सरनेम के साथ त्यागी के तौर पर जाति का नाम जोड़ा होगा.

    क्या होते हैं त्यागी
    त्यागी जाति से जुड़ी एक सामुदायिक साइट कहती है कि उत्तर भारत में मुगलों ने बहुत अत्याचार किया. यहां त्यागी, जाट, गुर्जर, राजपूत आदि लोगो ने इसका विरोध किया. कुछ डर के कारण या मजबूरी में मुसलमान भी बने. लिहाजा त्यागी जाति में हिंदू और मुसलमान दोनों पाए जाते हैं. ये लोग मुस्लिम होने के बावजूद आज भी हिंदू उपनाम जैसे त्यागी, मलिक, राणा, बालियान आदि अपने नाम के साथ लगाते हैं.

    विकीपीडिया कहती है, त्यागी पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में पायी जाने वाली एक जमींदार ब्राह्मण जाति है. त्यागी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी जमींदारी व रियासतों से जाने जाते हैं. निवाड़ी, असौड़ा रियासत, रतनगढ़ , हसनपुर दरबार (दिल्ली), बेतिया रियासत, राजा का ताजपुर, बनारस राजपाठ (भूमिहार), टेकारी रियासत, आदि बहुत सारे प्रमुख राजचिह्न हैं.

    संविधान क्या कहता है
    संविधान के (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में है कि अगर किसी शख्स का उसी धर्म में पुन: धर्मांतरण हुआ है जिसे उसके माता-पिता या पिछली पीढ़ियां मानती थीं. तो उसे ये भी साबित करना होगा कि वापसी के बाद उसे उस समुदाय ने अपना लिया है. यानी- एक व्यक्ति अपना धर्म और आस्था बदल सकता है, लेकिन उस जाति को नहीं जिससे वे संबंधित है, क्योंकि जाति का संबंध जन्म से है.

    Tags: Conversion, Conversion of Religion, Religious conversion, Wasim Rizvi

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