क्रीम लगाकर आप सांवले से गोरे कैसे हो जाते हैं?

फेयरनेस का दावा करने वाली क्रीम एक सीमा है और स्थायी तौर पर वो त्वचा की रंगत नहीं बदल सकतीं, बल्कि इनके लंबे इस्तेमाल से त्वचा को नुकसान भी हो सकता है

News18Hindi
Updated: July 12, 2019, 4:52 PM IST
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एशिया को ब्यूटी प्रॉडक्ट्स का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है. गोरा करने वाली क्रीम यहां बिकती भी खूब हैं. जो शर्तिया गोरा करने का दावा करती हैं. कहना गलत नहीं होगा कि दुनियाभर में गोरेपन को लेकर जबरदस्त दीवानगी है. क्रीम से लेकर साबुन और पाउडर तक सभी गोरेपन के साथ चेहरे के दाग-धब्बे-काली झाइयां दूर करने का दावा करते हैं. ये प्रॉडक्ट्स गांव से लेकर शहरों तक खूब बिकते भी हैं.

गोरी त्वचा के साथ भारत का लगाव ब्रिटिश शासन के बाद शुरू हुआ. उससे पहले सांवले रंग को  खूबसूरती का पैमाना माना जाता था.



फेयर एंड लवली
1975 में, हिंदुस्तान यूनिलीवर ने "फेयर एंड लवली" नाम की एक गोरा करने वाली क्रीम लॉन्च की. देश में गोरेपन की क्रीम के बाजार का 50-70 फीसदी हिस्सा "फेयर एंड लवली" के पास ही है. "फेयर एंड लवली" ने पिछले साल 2000 करोड़ क्लब में प्रवेश किया, जिससे पता चलता है कि भारत में गोरा करने वाली क्रीम खूब बिकती हैं.



गोरापन है क्या ?
हमारी त्वचा का रंग जेनेटिकली तय होता है. ये इससे तय होता है कि हमारी त्वचा के सबसे ऊपरी हिस्से में मेलानोसोम्स कितने बड़े, कितनी जगह घेरे हुए और किस तरह बंटे हैं. मेलानोसोम्स असल में एक किस्म की बारीक थैली होती है जिसमें मेलानिन या पिगमेंट भरे होते हैं, यही त्वचा के रंग पर असर डालते हैं.
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- असल में गोरापन ये मेलानिन ही है. त्वचा में जितना कम मेलानिन उतनी गोरी त्वचा.

ये क्रीमें गोरा करती कैसे हैं? करती भी है कि नहीं?
- गोरा करने वाली क्रीमों में मौजूद केमिकल आपकी त्वचा की ऊपरी परत में मौजूद मेलानिन या पिगमेंट कम करता है. क्रीम में मौजूद बाकी कारक चेहरे की त्वचा तो अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचाते हैं.

- कोई भी क्रीम हमेशा के लिए गोरा नहीं कर सकती, क्योंकि चेहरे की त्वचा में मौजूद पिगमेंट कम ज्यादा हो सकते हैं लेकिन उनका बेस नहीं बदल सकता.

- ज्यादातर फेयरनेस क्रीम में स्टेरॉइड्स की अधिक मात्रा का इस्तेमाल होता है. इसकी वजह डीपिगमेंटेशन होता है. इससे काला रंग कम होने लगता है. यूं तो क्रीम की वजह से काले रंग का सफेद होना एक तरह का साइडइफेक्ट है पर ये फेयरनेस क्रीम इन्हें इफेक्ट की तरह इस्तेमाल करती हैं.

- फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करने के बाद शुरुआती महीनों में डीपिगमेंटशन की वजह से चेहरा गोरा दिखता है. लेकिन चेहरे का स्वाभाविक रंग या शेड नहीं बदलता.

इन क्रीम में क्या पारा होता है
- हाल ही में सेंटर फौर साइंस एंड एनवार्नमेंट नामक संस्था द्वारा कराए शोध के नतीजे कहते हैं, भारत में 44 प्रतिशत लोकप्रिय फेयरनेस क्रीम में मरक्यूरी यानि पारा होता है. ओले नेचुरल ह्वाइट (33.4 प्रतिशत), पोंड्स ह्वाइट ब्यूटी (25.2), फेयर एंड लवली एंटी मार्क्स (15), लोरियल पर्ल एफेक्ट (12.9),रेवलोन टच एंड ग्लो (4.6) गारनियर मेन पावर लाइट (4.4), विवेल एक्टिव फेयर (4.3), इमामी मलाई केशर कोल्ड क्रीम (4.1), लेक्मे परफेक्ट रेडियंस (3.5) में पारा की मात्रा पाई गई. गौरतलब बात यह है कि क्रीम की सामग्री में कहीं पारे की मौजूदगी का जिक्र नहीं होता है. जबकि कॉस्मेटिक एंड ड्रग अधिनियम में पारा को निषिद्ध घोषित किया गया है.



क्या पूर्वजों की त्वचा से तय होता है गोरापन
- जेनेटिक लीनिएज यानि पूर्वजों की त्वचा का रंग ही आगामी पीढ़ी की त्वचा का रंग तय करता है. त्वचा विशेषज्ञों का मानना है कि त्वचा की रंगत में महज 20 प्रतिशत बदलाव हो सकता है. इससे ज्यादा नहीं.

धूप में क्या करती हैं फेयरनेस क्रीम
- फेयरनेस क्रीम बहुत हुआ तो सूरज की पराबैंगनी किरण को रोक सकती है. ऐसा करने से मेलानिन का स्राव कम होता है और त्वचा की रंगत कम काली होती है. लेकिन कोई भी क्रीम, वह कितना भी कीमती क्यों न हो, त्वचा की रंगत को बदल नहीं सकती.

इनके इस्तेमाल के क्या नुकसान भी हैं
- आप इस तरह की क्रीम के इस कदर आदी हो जाते हैं कि अगर इन्हें कुछ दिन इस्तेमाल नहीं करें तो चेहरे पर ड्राइनेस आ जाती है. त्वचा खिंची-खिंची सी नजर आने लगती है. कई बार त्वचा इतनी पतली हो जाती है कि चेहरे पर खून की नलियां तक नजर आने लगती हैं.



फेयरनेस क्रीम के साइड इफेक्ट्स-
-इससे हमेशा के लिए स्किन डैमेज होने का खतरा होता है
-चेहरे की स्किन का पतला होना
-लड़कियों के चहरे पर बालों का उगना
-स्ट्रेनिंग की समस्या होना
-प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना
-चेहरा लाल पड़ने लगता है जिसे रोशिया कहते हैं

क्रीम के नुकसान से बचने के उपाय
धूप की वजह से काली होती स्किन को बचाने के लिए आप सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा आप नारियल का तेल, एलोवीरा और मॉइश्चराइजिंग क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं. कोई भी स्टेरॉइड्स युक्त क्रीम के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह आप लें.
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