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Explainer : सालभर चलती रहती है नोबेल पीस प्राइज की प्रक्रिया फिर मिलता है विजेता

नोबेल शांति पुरस्कार बेलारूस के अधिकार कार्यकर्ता, रूसी समूह ‘मेमोरियल’ और ‘यूक्रेनियन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज’ को देने का ऐलान. (सांकेतिक तस्वीर)

नोबेल शांति पुरस्कार बेलारूस के अधिकार कार्यकर्ता, रूसी समूह ‘मेमोरियल’ और ‘यूक्रेनियन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज’ को देने का ऐलान. (सांकेतिक तस्वीर)

फैक्ट चेक करने वाली वेबसाइट अल्टन्यूज के फाउंडर्स प्रतीक सिन्हा और मोहम्मद जुबैर का नाम कैसे नोबेल शांति पुरस्कार के लि ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

भारत के प्रतीक सिन्हा, मोहम्मद जुबैर और हर्ष मंदेर नोबल शांति पुरस्कारों की दौड़ में
हर साल सितंबर से अगले साल अक्टूबर तक चलती है इस पुरस्कार की प्रक्रिया
नामांकन का काम सितंबर से शुरू होता है और 31 जनवरी की आधी रात तक चलता है

नोबेल पीस प्राइज की घोषणा नार्वे की राजधानी ओस्लो में की जा चुकी है. इस बार ये पुरस्कार एक व्यक्ति के साथ-साथ दो संगठनों को दिया गया है. जेल में बंद बेलारुस के मानवाधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की के साथ रूस के मानवाधिकार संगठन मेमोरियल और यूक्रेन के मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज को इस पुरस्कार से नवाजा गया है.

नोबल शांति पुरस्कार दुनिया का सबसे बड़ा अवार्ड माना जाता है. हालांकि नोबल पुरस्कार अब कई फील्ड मसलन फिजिक्स, केमेस्ट्री, साहित्य और मेडिकल क्षेत्र के लिए दिया जाता है लेकिन शांति पुरस्कार की अहमियत अलग ही है. इस पुरस्कार की चयन प्रक्रिया करीब एक साल तक चलती है. पिछले कुछ सालों में इसके लिए नोमिनेटेड लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है.

पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में फ्रांस के फ्रेडरिक पेसी और स्विस जीन हेनरी डुनेंट को दिया गया था. फ्रेडरिक फ्रांस के इकोनॉमिस्ट थे तो देश में कई शांति सोसायटी के संस्थापक. खासकर यूरोपियन यूनियन में उनके पीस मूवमेंट के चलते उन्हें ये पुरस्कार दिया गया. जब डुनेंट मानवतावादी थे. वह बिजनेसमैन भी थे तो सोशल एक्टीविस्ट भी.

हालांकि नोबल शांति पुरस्कार को लेकर हर बार विवाद भी होता है. इसके नामांकन और प्राइज तक पहुंचने की पूरी एक प्रक्रिया होती है. इस प्राइज का निर्धारण नार्वे की संसद द्वारा बनाई गई नार्वेजियन नोबल कमेटी करती है. इसके सदस्यों का चुनाव आमतौर पर नार्वे के सियासी दलों द्वारा ही किया जाता है. इस कमेटी के लोग भी नार्वे के ही होते हैं.

कैसी होती है प्राइज देने वाली कमेटी
ये कमेटी 06 सालों के लिए होती है. इसमें दो चेयरमैन, एक वाइस चेयरमैन, एक सेक्रेट्री और दो सदस्य होते हैं. इस समय इस कमेटी की चेयरमैन बेरिट रेइस एंडरसन नार्वे सरकार में मंत्री रह चुकी हैं, वैसे पेशे से वह वकील भी हैं.

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ये है नार्वे की राजधानी ओस्लो में स्थित द नार्वेजियन नोबल इंस्टीट्यूट, जहां फरवरी से वो नोबेल कमेटी अपनी मीटिंग शुरू करती है, जो शांति के लिए नोबेल पुरस्कारों के लिए विजेता का चयन करती है. (विकी कामंस)

कौन कर सकता है नामांकन
नोबेल पीस प्राइज के नामांकन किसी भी शख्स द्वारा किया जा सकता है जो इसकी पात्रता को पूरा करता है. इसके लिए कोई आमंत्रण नहीं होता. मतलब ये है कि किसी शख्स का काम अगर किसी को पसंद आ रहा है तो वह उसके लिए नोमिनेशन कर सकता है लेकिन नोमिनेशन करने वाला कौन हो, इसकी अपनी शर्तें जरूर होती हैं….और ये भी कि जिन लोगों का नाम नामांकित हुआ है, उसे गुप्त रखा जाता है.

इसे किसी भी हालत में बताया नहीं जाता. कम से कम अगले 50 सालों तक इसको उजागर नहीं करते.
ऐसे में ये हैरानी जरूर हो सकती है कि अल्ट न्यूज के संस्थापकों के नाम कैसे बाहर आ गए. वैसे नोबल कमेटी ये जरूर करती है कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर टोटल नंबर्स जरूर जाहिर करती है कि इस साल पुरस्कारों के लिए कितने लोगों के नाम आए हैं यानि कितने लोग दावेदार हैं.

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ये नोबेल पीस प्राइज के मेडल का सामने का और पिछला हिस्सा है. मेडल के सामने इसके संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल की तस्वीर उकेरी हुई है तो दूसरी ओर चिंतन की मुद्रा में मनुष्य (विकी कामंस)

इस बार कितने लोग हैं नामांकित
इस साल कुल मिलाकर 343 लोगों को नामित किया गया है, जिसमें 251 व्यक्तिगत नाम हैं तो 92 संस्थाएं हैं, जो शांति के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रही हैं. ये संख्या नोबल शांति पुरस्कारों के इतिहास में दूसरी बड़ी संख्या है. इससे पहले वर्ष 2016 में 376 लोगों के नाम नामित हुए थे. पिछले साल ये नंबर 329 का था.

कौन कर सकता है किसी का नोमिनेशन
कोई नामांकन तभी वैध माना जाता है जबकि वह निम्न लोगों या संस्थाओं द्वारा किसी के पक्ष में किया जाए
– नामांकित करने वाला राष्ट्रीय संसद का सदस्य हो या राष्ट्रीय सरकार में सदस्य या मंत्री. देश का मुखिया भी नामांकन कर सकता है
– द हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के सदस्य और द हेग स्थित द पर्मानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के सदस्य
– इंस्टीट्यूट डि डिट्रायट इंटरनेशनल के सदस्य
– वूमन इंटरनेशनल लीग फार पीस एंड फ्रीडम के इंटरनेशनल बोर्ड की सदस्य
– यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स, इतिहास, सोशल साइसेंस, कानून, दर्शन, थेयोलॉजी और धर्म के एसोसिएट प्रोफेसर्स
– यूनिवर्सिटी के रेक्टर्स और यूनिवर्सिटी डायरेक्टर्स या उनके समतुल्य, पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट और फारेन पालिसी इंस्टीट्यूट्स के निदेशक
– वो शख्स जो नोबल पीस प्राइज जीत चुका हो
– उस संस्थान के सदस्य जो नोबेल पीस प्राइज जीत चुके हों
– नार्वेजियन नोबेल कमेटी के मौजूदा या पूर्व सदस्य
– नार्वेजियन नोबेल कमेटी के पूर्व सलाहकार

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ये नोबेल पीस प्राइज के लिए दिया जाने वाला डिप्लोमा यानि प्रमाणपत्र है. (विकी कामंस)

जिनका नामांकन हुआ हो उसकी पात्रता
– वो सभी लोग नोबेल पीस प्राइज की पात्रता रखते हैं, जिन्हें ऊपर दिए लोगों द्वारा नामांकित किया गया हो. अगर आपने खुद का ही नामांकन किया हो तो उस पर विचार नहीं किया जाएगा.

इसके लिए पूरी तरह से द नार्वेजियन नोबेल कमेटी ही जिम्मेदार होती है, जो योग्य उम्मीदवारों का चयन करती है. इसकी घोषणा नार्वे की राजधानी ओस्लो ें की जाती है. ना कि स्वीडन के शहर स्टाकहोम में. दरअसल फिजिक्स, केमेस्ट्री, मनोविज्ञान या चिकित्सा, साहित्य और इकोनामिक्स के लिए नोबल पुरस्कार प्राइज की घोषणा हर साल स्टाकहोम में ही होती है.

कैसे चयन होता है उसकी प्रक्रिया
जिस साल के लिए पुरस्कार का चयन होता है, उसकी प्रक्रिया उसके एक साल पहले सितंबर में शुरू हो जाती है. मतलब वर्ष 2022 में 07 अक्टूबर को नोबेल पीस प्राइज की जो घोषणा होगी, उसकी प्रक्रिया सितंबर 2021 में शुरू हुई.

सितंबर – द नार्वेजियन नोबेल कमेटी नामांकन प्राप्त करना शुरू करती है. इन्हें संसद सदस्यों, सरकारों, अंतरराष्ट्रीय अदालतों, यूनिवर्सिटी के कुलपतियों, प्रोफेसरों, शांति संस्थानों, विदेश नीति संबंधी संस्थाओं के लीडर्स या पूर्व नोबल पीस प्राइज विनर्स या नोबल पीस प्राइज कमेटी के मौजूदा या पूर्व सदस्यों या इससे जुड़े सलाहकारों के जरिए मिलती है. ये काम करीब 05 महीने तक चलता रहता है.

फरवरी – नामांकन काम 31 जनवरी खत्म हो जाता है. फिर ये सारे नाम ओस्लो में नार्वेजियन नोबेल कमेटी को 01 फरवरी को भेज दिए जाते हैं. अगर इसके बाद भी नामांकन प्राप्त होते हैं तो उन्हें अगले साल के पुरस्कार के विचारार्थ रख लिया जाता है. पिछले कुछ सालों से कमेटी के पास कम से कम 200 या इससे ज्यादा नामांकन तो आते ही हैं.

फरवरी -मार्च – नामांकन को छांटा जाता है. इसके बाद कमेटी दावेदारों के कामों पर गौर करती है और इसके जरिए इन्हें छांटा जाता है.

मार्च – अगस्त – अब कमेटी सलाहकारों से छंटे हुए उम्मीदवारों का रिव्यू करने को कहती है. ये सलाहकार नोबेल इंस्टीट्यूट से जुडे़ स्थायी सलाहकार होते हैं.

अक्टूबर – नोबल प्राइज विजेता अक्टूबर महीने की शुरुआत में चुन लिया जाता है. इसे कमेटी बहुमत वोटिंग के आधार पर तय करती है. ये फैसला फाइनल होता है. इस पर कोई पुर्नविचार नहीं होता.फिर नोबल पीस प्राइस विजेता के नाम की घोषणा की जाती है.

दिसंबर – नोबल पीस प्राइज विजेता को पुरस्कार दिया जाता है. ये अवार्ड सेरेमनी 10 दिसंबर को ओस्लो में होती है, जहां विजेता इसे लेने जाते हैं. इसमें मेडल और प्रमाण पत्र होता और एक डाक्युमेंट दिया जाता है, जो तसदीक करता है कि विजेता को कितनी प्राइज मनी दी जा रही है.

क्या नामांकन आनलाइन होता है
हां, नोमिनेशन आनलाइन होता है, जिसका फॉर्म सितंबर से फरवरी तक वेबसाइट पर उपलब्ध रहता है.

इसकी डेडलाइन क्या है
31 जनवरी की आधी रात यानि ठीक 12 बजे तक . इसके बाद आने वाले नामांकन अगले साल के पुरस्कारों के लिए विचार किए जाते हैं. हालांकि नोबल पीस प्राइज कमेटी के सदस्य अगर चाहें तो वो लोग देर से भी नामांकन समिट कर सकते हैं. हालांकि ये काम डेडलाइन के बाद पहली मीटिंग तक हो जाना चाहिए.

Tags: Nobel Peace Prize, Nobel Prize

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