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Explainer : क्या होता है ED के प्रापर्टी अटैचमेंट का मतलब, वापस मिल पाती है या नहीं संपत्ति

प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले 02-03 सालों में बड़ी संख्या में प्रापर्टी अटैच की है.

प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले 02-03 सालों में बड़ी संख्या में प्रापर्टी अटैच की है.

प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही शिव सेना नेता संजय राउत और आम आदमी पार्टी के नेता और मंत्री सत्येंद्र जैन से संंबंधित करोड़ों की प्रापर्टी को मुंबई और दिल्ली में अटैच कर दिया है. कानूनी तौर पर अटैच करने पर संपत्ति का क्या होता है और इसके बाद ये संपत्ति क्या वापस भी मिलती है या फिर इसे कुर्क कर दिया जाता है. क्या होती है पूरी प्रक्रिया

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हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय यानि डायरेक्टरेट ऑफ इनफोर्समेंट (ED) ने शिवसेना नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत से संबंधित और सत्येंद्र जैन के परिवार की करोड़ों की संपत्ति अटैच कर ली. पिछले 02-03 सालों में ईडी की इस तरह की कार्रवाइयों में काफी तेजी आई है हालांकि इनमें से बहुत कम मामले अदालत में पहुंच पाए और उनमें कुछ फैसला हुआ. हालांकि संपत्ति अटैच करने के मामले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है और कई बार ये अटैचमेंट वापस भी होता रहा है.

आमतौर पर प्रवर्तन निदेशालय मनी लांड्रिंग और संपत्ति या आय संबंधी गड़बड़ियों को लेकर उन मामलों में कार्रवाई करता है, जहां उसे आर्थिक तौर पर गड़बड़ियां नजर आती हैं. हालांकि विपक्ष ये आरोप लगाता रहा है कि हाल के बरसों में प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी द्वारा की जा रही कार्रवाइयां सियासी ज्यादा रही हैं.

पीटीआई के अनुसार, संजय राउत की मुंबई के अलीबाग स्थित आठ प्लॉट जब्त किए गए हैं. साथ ही दादर उपनगर के फ्लैट को भी अटैच किया गया है. ये संपत्तियां संजय राउत और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर हैं. ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (PMLA) के तहत शिवसेना नेता के खिलाफ यह कार्रवाई की.

वही, दूसरा तरफ दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन के परिवार और रिश्तेदारों से जुड़े 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई. यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है. कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन के परिवार के सदस्य किसी ऐसी फर्म से जुड़े थे जो PMLA की जांच के दायरे में है.

प्रापर्टी अटैचमेंट को लेकर एडवोकेट राजन गुप्ता से बात हुई, जो अल्फा राजन एंड पार्टनर्स लॉ फर्म में पार्टनर हैं. उन्होंने इस बारे में पूरी प्रक्रिया और अहम बातों की जानकारी दी.

क्या है प्रापर्टी अटैचमेंट की प्रक्रिया?
– ईडी जब किसी संपत्ति को अटैच करती है तो प्रिवेंसन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत करती है. कहा जा सकता है कि प्रापर्टी अटैचमेंट काले धन या धन की अनियमितता में कार्रवाई की शुरुआती प्रक्रियाओं में तब होती है, जब ईडी के पास ऐसा करने के समुचित कारण मौजूद होते हैं. इसके बाद संबंधित मामले की जांच होती है.

फिर ये मामला अदालत में जाता है, जहां इस पर कार्रवाई शुरू होती है. लेकिन ईडी जब कोई प्रापर्टी अटैच करती है तो उसका मतलब ये नहीं होता कि उसका इस्तेमाल नहीं हो सकता. उसका व्यक्तिगत या कामर्शियल इस्तेमाल हो सकता है, बस उसकी खरीद फरोख्त या उस संपत्ति का किसी के नाम पर ट्रांसफर नहीं हो सकता.

लेकिन कई मामलों में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक कानून प्रतिवादी को उस संपत्ति से बाहर रहने या उसका प्रयोग न करने का भी प्रावधान कर सकता है.

अगर प्रवर्तन निदेशालय किसी प्रापर्टी का कंस्ट्रक्टिव अटैचमेंट करता है तो इसका उपयोग प्रतिवादी द्वारा हो सकता है बस प्रापर्टी की खरोदफरोख्त या ट्रांसफर नहीं हो सकता. (ANI)

क्या प्रापर्टी अटैचमेंट के बाद उस प्रापर्टी का इस्तेमाल किन कंडीशंस में हो सकती है?
– ईडी की कारवाइयां उतनी कड़ी नहीं होतीं कि उसके द्वारा अटैच की गई प्राप्रटी का इस्तेमाल नहीं हो सकता. अगर कोई उस मकान या संपत्ति में रह रहा है या उसका इस्तेमाल कर रहा है तो वो आमतौर पर फाइनल फैसला आने तक उसका इस्तेमाल कर सकता है. उसे किराए पर भी उठा सकता है. यानि मोटे तौर पर उस प्रापर्टी का इस्तेमाल उसका मालिक तब तक कर सकता है जब तक कि उस पर अंतिम फैसला नहीं हो जाए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट कई बार इस पर बहुत सख्त टिप्पणियां भी ईडी के खिलाफ कर चुका है.

प्रापर्टी अटैच के बाद की प्रक्रिया क्या होती है?
– माना जाता है कि मनी लांड्रिंग या धन के लेन देन को लेकर अनियमितता होने को लेकर प्रवर्तन निदेशालय पहले खुद अपने स्तर होमवर्क करता है. कुछ ऐसे प्राथमिक दस्तावेज जुटाता है जिसके आधार पर वो ये सुनिश्चित करे कि ये मामला आगे की कार्रवाई लायक है कि नहीं लेकिन कई बार संदेह के आधार पर भी ईडी कार्रवाई करता है और मामले से संबंधित सारे दस्तावेज जब्त कर लेता है. इसके साथ उस संपत्ति को कानूनी तौर पर अटैच कर लेता है.

ईडी प्रापर्टी अटैच करने के बाद उसके पूरे सबूत और दस्तावेज जुटाती है. फिर इस मामले को अदालत में लेकर जाती है. फैसला होने तक प्रापर्टी ईडी के पास अटैच ही रहती है.
– बिल्कुल कई मामलों में ऐसा हो भी चुका है. उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है. अगर अदालत को लगता है कि ईडी द्वारा की गई ये कार्रवाई सही नहीं है या वो अपनी कार्रवाई के पक्ष में उचित दस्तावेज नहीं दे पाती तो अटैच की गई प्रापर्टी उसके मालिक को वापस मिल जाती है.

कई बार जो प्रापर्टी अटैच होती है, उसे अगर अदालत में चुनौती दी जाती है तो अदालत उसे वापस कर सकता है. कई बार फाइनल फैसला होने तक भी प्रापर्टी अटैच रहती है.

क्या प्रापर्टी अटैचमेंट की कोई मियाद भी होती है कि इसके भीतर उसका फैसला हो जाना चाहिए?
– नहीं ऐसी कोई मियाद नहीं होती. कई बार ये मामले काफी लंबा भी चलते हैं. तब तक प्रापर्टी अटैच स्थिति में भी रह सकती है. हालांकि ऐसे मामलों में कई बार कोर्ट के पास पहुंचने पर वो अटैचमेंट को हटाने के लिए कह सकता है.

वैसे नियम ये भी कहता है कि ईडी का आदेश 180 दिनों के लिये वैध होगा और इस दौरान सील करने के आदेश की पुष्टि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत निर्णायक प्राधिकरण द्वारा की जानी चाहिये. यदि इसकी पुष्टि नहीं की जाती है, तो संपत्ति स्वचालित रूप से कुर्क मुक्त (Release) हो जाएगी.
यदि इस बात की पुष्टि कर दी जाती है, तो प्रतिवादी 45 दिनों के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण में इस निर्णय को चुनौती देने के साथ-साथ बाद में संबंधित उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में भी इसे ले जा सकता है.

क्या हाल में ईडी द्वारा प्रापर्टी अटैचमेंट के मामले बढ़े हैं?
– हां, पिछले 02-03 सालों में ऐसे मामले बढ़े हैं. सालभर में ऐसे 800-1000 केस ऐसे हो रहे हैं लेकिन हकीकत ये है कि कुछ ही मामलों में फाइनल फैसला हो पाता है. उससे पहले ही या तो मामले रफा-दफा हो जाते हैं या फिर लटके रहते हैं.

अगर फैसले में ईडी की कार्रवाई को सही पाया गया तो क्या होगा?
– अगर फाइनल फैसला ईडी के हक में होता है तो जिस प्रापर्टी को अटैच किया गया है, वो मालिक से ले ली जाती है और इसे फिर कुर्क कर दिया जाता है.

प्रवर्तन निदेशालय क्या है और उसका क्या काम है?
प्रवर्तन निदेशालय एक संघीय संस्था है. इसकी स्थापना 01 मई, 1956 को तब हुई थी, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम,1947 (फेरा,1947) के अंतर्गत विनिमय नियंत्रण विधियों के उल्लंघन को रोकने के लिये आर्थिक कार्य विभाग के नियंत्रण में एक ‘प्रवर्तन इकाई’ गठित की गई थी.
वर्तमान में यह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन एक विशेष वित्तीय जाँच एजेंसी है. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है. इसके 05 क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता तथा दिल्‍ली में हैं.

इसके प्रमुख कार्यों में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के प्रावधानों के उल्लंघन की जाँच और निपटारा करने के साथ-साथ धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के अंतर्गत जांच और कार्यवाही करना शामिल है.

Tags: ED, ED investigation, Property sized, Sanjay Nirupam

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