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Explainer : क्यों राज्यसभा में मनोनीत होते हैं सदस्य, कौन होते हैं ये

राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत होकर पहुंचते हैं. इसके लिए संविधान में खास व्यवस्था की गई है.

राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत होकर पहुंचते हैं. इसके लिए संविधान में खास व्यवस्था की गई है.

केंद्र सरकार ने राज्यसभा के लिए 04 मनोनीत सदस्यों के नामों की घोषणा की है. राष्ट्रपति ने इनके नामों पर मुहर लगाई है. इनका कार्यकाल 28 जुलाई से शुरू होगा और 06 साल के लिए होगा. राज्यसभा में संविधान की वो कौन सी व्यवस्था है, जिसके तहत मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति होती है और ये किस क्षेत्र से संबंधित लोग होते हैं.

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राज्यसभा के लिए 04 सदस्यों के मनोनयन की घोषणा की गई है. ये चारों अपने-अपने क्षेत्र की नामी हस्तियां हैं. आमतौर पर राज्यसभा में जो सदस्य मनोनीत किये जाते हैं वो अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गज या एक्सपर्ट होते हैं. राज्यसभा में लोगों के मनोनयन के पीछे संवैधानिक अवधारणा भी यही रही है कि ये लोग जब राज्यसभा में आएंगे तो अपने ज्ञान और अनुभव से विधायी कार्यों में अहम रोल निभाएंगे.

जिन चार लोगों का मनोयन राज्यसभा में हो रहा है, उसमें संगीतज्ञ इलैयाराजा, ट्रैक-फील्ड धाविका रहीं पीटी ऊषा, तेलुगु स्क्रिप्टराइटर वी विजेंद्रप्रसाद और आध्यात्मिक गुरु वीरेंद्र हेगड़े शामिल हैं. ये चारों तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से ताल्लुक रखते हैं. इनका कार्यकाल 06 सालों के लिए होगा और 28 जुलाई 2028 तक चलेगा.

राज्यसभा में राष्ट्रपति 12 सीटों पर मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति करते हैं. अभी राज्यसभा में 05 नोमिनेटेट सदस्य पहले से हैं. इन चार को लेकर उनकी संख्या 09 हो जाएगी. 03 सीटों पर मनोनयन और होना है. फिलहाल जो सदस्य राज्यसभा में मनोनीत सदस्य के तौर पर पहले से हैं, उनमें कानूनविद महेश जेठमलानी, नृत्यांगना सोनल मानसिंह, राजनीतिज्ञ राम सकाल, प्रोफेसर राकेश सिन्हा और पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई शामिल हैं.

सवाल – संविधान के किस प्रावधान से राज्यसभा में सदस्यों का मनोनयन होता है?

– संविधान का आर्टिकल 80 इसका प्रावधान करता है कि राज्यसभा में राष्ट्रपति के जरिए 12 ऐसे सदस्यों का मनोनयन किया जाना चाहिए जो अपने अपने क्षेत्रों और विधाओं में नामी लोग और एक्सपर्ट हों. इसी आर्टिकल का क्लाज 3 ये कहता है कि राज्यसभा में 12 सदस्यों की नियुक्ति अगर मनोनीत करने के जरिए होगी तो 238 से ज्यादा सदस्य चुने हुए नहीं हो सकते.

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सवाल – मनोनीत सदस्य आमतौर पर कैसे लोग होते हैं?

– ये लोग विशेष क्षेत्रों के विशेषज्ञ या उसमें काम करने वाले नामवर लोग होते हैं, जिनके कामों से राष्ट्र को योगदान मिला हो. आमतौर पर ये लोग साहित्य, कला, समाज सेवा और राजनीति से जुड़े क्षेत्रों की नामी हस्तियां होती हैं.

सवाल – राज्यसभा के गठन के बाद से क्या हर बार सदस्यों का मनोनयन होता रहा है?

– आजादी के बाद और देश के संवैधानिक होने के बाद 1952 में राज्यसभा का गठन हुआ. तब से 142 लोगों की नियुक्ति राज्यसभा में सदस्यों के तौर पर मनोनयन के जरिए की जा चुकी है. इसमें स्कॉलर, कानूनविद, इतिहासकार, साहित्यकार, वैज्ञानिक, चिकित्सक, खिलाड़ी, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ शामिल हैं. हालांकि ये सभी आमतौर पर सरकार के भरोसे के लोग होते हैं.

सवाल – उनके अधिकार और कार्यकाल क्या होते हैं?

– उनके पास वही अधिकार और शक्तियां होती हैं और वही सुविधाएं मिलती हैं, जो एक लोकसभा या राज्यसभा में चुनकर आए सांसद को हासिल होती हैं. वो सदन की कार्यवाहियों में हिस्सा ले सकते हैं. विधायी कार्यों को अपनी विशेषज्ञता और अनुभव से बेहतर बना सकते हैं. उनकी मौजूदगी से राज्यसभा में बहस का स्तर बेहतर और अनुभवजनित हो जाएगा.

राज्यसभा में मनोनीत सदस्यों को वही अधिकार और सुविधाएं हासिल होती हैं जो लोकसभा या राज्यसभा के अन्य सांसदों को लेकिन ये देखा गया है कि हाल के बरसों में मनोनीत सदस्य राज्यसभा की कार्यवाहियों में कम मौजूद रहते हैं.

हालांकि हाल फिलहाल में जो सदस्य मनोनयन के जरिए राज्यसभा में पहुंचे, उनमें से ज्यादातर के बारे में कहा जाता रहा है कि उनकी दिलचस्पी राज्यसभा की कार्यवाहियों में कम होती है. मौजूदगी भी ज्यादा नहीं होती और विधायी कार्यों और बहस में भी वो हिस्सा लेते नहीं दिखते. हां, मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते, लेकिन उप राष्ट्रपति के चुनाव में जरूर शिरकत कर सकते हैं.

सवाल – सदस्यों को राज्यसभा में मनोनीत क्यों किया जाता है?

– इसके पीछे संविधान तैयार करने वालों की अवधारणा ये रही कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों और विधाओं में मह्त्वपूर्ण काम करने वाले जब राज्यसभा में पहुंचेंगे तो उसका बौद्धिक स्तर ऊंचा होगा, वहां कुछ ऐसी वास्तविक बहस का माहौल बनेगा, जो लोकसभा में संभव नहीं है. फिर राजनीतिज्ञों के अलावा भी एक्सपर्ट्स और जानी हस्तियों को राज्यसभा में पहुंचने का कोई जरिया तो होना चाहिए.

संविधान के प्रारूप को तैयार करने वाली कमेटी के सदस्य एन गोपालस्वामी आयंगर कहते थे, हमें ऐसे लोगों को मौका देना चाहिए, जो राजनीति का हिस्सा नहीं हैं लेकिन देश के विकास में उनका योगदान बहुत खास रहा है, उनके ज्ञान और अनुभव से सदन को लाभ होगा.

वैसे संसदीय वास्तुकला में मनोनीत सदस्यों की उपस्थिति भारतीय समाज को अधिक समावेशी बनाने वाली व्यवस्था का समर्थन करती है. राज्य सभा के लिये सदस्यों का मनोनयन संबंधी प्रावधान आयरलैंड के संविधान से लिया गया है.

सवाल – 1952 में जो 12 लोग पहली बार राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए गए वो कौन थे?

– जो लोग पहली बार मनोनीत हुए वो इस तरह हैं

जाकिर हुसैन – जो बाद में राष्ट्रपति बने

कालीदास नाग – इतिहासकार

राधाकुमुद मुखर्जी – इतिहासकार

मैथिलीशऱण गुप्त – कवि

काकासाहेब कालेलकर – गांधीवादी लेखक

सत्येंद्रनाथ बोस – वैज्ञानिक

एनआर मलकानी – समाजसेवी

रुक्मणी देवी अरुंडेल – नृत्यांगना

जेएम कुमारप्पा – गांधीवादी स्कॉलर

अल्लादी कृष्णन – न्यायविद

पृथ्वीराज कपूर – अभिनेता

मेजर जनरल एसएस सोखे – मेडिकल साइंटिस्ट

सवाल – मनोनीत सदस्यों के बारे में भारत के पहले प्रधानमंत्री का क्या विचार था?

– जब राज्यसभा में पहली बार 12 सदस्यों का मनोनयन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया तो उसके बाद 13 मई 1953 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भाषण में कहा, “राष्ट्रपति ने कुछ सदस्य मनोनीत किये हैं, जो कला से लेकर विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में अपना लोहा मनवा चुके है, वो उस क्षेत्र की जानी मानी हस्तियां हैं. वो किसी सियासी दल के प्रतिनिधि नहीं हैं लेकिन उनका कद साहित्य से लेकर कला और अन्य विधाओं में बहुत ऊंचा है.”

सवाल – क्या मनोनीत सदस्य राज्यसभा में पहुंचने के बाद किसी सियासी दल की सदस्यता भी ले सकते हैं?

– हां, वो ऐसा कर सकते हैं लेकिन उन्हें मनोनयन के 06 महीने के भीतर ही ये करना होता है. आमतौर पर बहुत कम मनोनीत सदस्य किसी सियासी पार्टी की सदस्यता लेते हैं.

सवाल – कब मनोनयन को लेकर विवाद हुआ था?

– जब सचिन तेंदुलकर के नामांकन हुआ तो सवाल खड़े हुए थे कि संविधान के अनुच्छेद 80 (3) में निर्दिष्ट श्रेणियों- ‘साहित्य, कला, विज्ञान और सामाजिक सेवा’ में खेल शामिल नहीं हैं, इसलिए कोई भी खिलाड़ी मनोनयन का पात्र नहीं है. हालांकि बाद में माना गया कि निर्दिष्ट श्रेणियां अपने आप में पूर्ण नहीं हैं बल्कि उदाहरण मात्र हैं.

Tags: Constitution of India, PT Usha, Rajya sabha, Rajya Sabha MP

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