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Explainer : सितंबर में हाहाकारी बारिश क्यों, क्या फिर देर से लौटेगा मानसून

देश में जितनी बारिश जून से लेकर अगस्त तक नहीं हुई. उससे ज्यादा मध्य सितंबर तक हो चुकी है (Photo ShutterStock)

देश में जितनी बारिश जून से लेकर अगस्त तक नहीं हुई. उससे ज्यादा मध्य सितंबर तक हो चुकी है (Photo ShutterStock)

ये लगातार दूसरा साल है जबकि सितंबर में काफी ज्यादा बारिश कहर ढहा रही है. वैसे इस सितंबर में बारिश पिछले साल भी इस महीने की बारिश से ज्यादा है. कहीं कहीं तो ये सामान्य से 800 गुना ज्यादा भी हुई है. क्या है इसकी वजह

  • News18Hindi
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    पिछले साल की ही तरह इस बार भी जुलाई से अगस्त देशभर में सामान्य और इससे कम बारिश हुई लेकिन सितंबर के आते ही बारिश ने पहले 15 दिनों में ऐसे रिकॉर्ड तोड़े कि हर कोई हैरान रह गया. जरा सोचिए एक दिन में अगर कहीं सामान्य से 1500 फीसदी बारिश हो जाए तो क्या होगा. ऐसा ही हुआ. भारी बारिश तो सितंबर के दूसरे हफ्ते में ऐसी हुई कि ना तो उत्तर के इलाके बचे और ना ही दक्षिण के.

    आखिर बात क्या है. क्या बारिश का साइकल आगे खिसक रहा है या फिर कोई और वजह है, जिसके चलते सितंबर में पिछले दो सालों से इतनी ज्यादा बारिश हो रही है कि मौसम पंडित भी कह रहे हैं ऐसा होना सामान्य नहीं.

    भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि करीब आधे देश में सितंबर के पहले दो हफ्तों में बहुत ज्यादा बारिश हुई. अगर पूरे देश की बात करें तो वहां सामान्य से 129 फीसदी ज्यादा बारिश हो गई. 10 से 14 सितंबर के बीच तो क्या दिल्ली, क्या लखनऊ, क्या गोवा और क्या ओडिसा के इलाके-हर जगह बारिश ने जनजीवन को ठप कर दिया.

    केवल 14 सितंबर को देश के कई हिस्सों में हाहाकारी बारिश हुई. इतनी ज्यादा कि अलग अलग राज्यों में मौसम विभाग को रेड अलर्ट जारी करने पड़े. ओडिसा में इस एक दिन की बारिश ने वहां की आधा दर्जन नदियों में उफान ला दिया. नदियों के किनारे रहने वाले 1500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया.

    देश में कितने मेट्रोलॉजिकल सब डिविजन
    भारतीय मौसम विभाग देश को 36 मेट्रोलॉजिकल सब डिविजन में बांटता है. ये सब अलग अलग भौगोलिक स्थितियों वाले क्षेत्र हैं. मसनल यूपी को दो ईस्ट और वेस्ट दो सबडिविजन हैं तो गुजरात में सौराष्ट्र और बाकी गुजरात अलग डिविजन. इसी तरह राजस्थान में भी ईस्ट और वेस्ट दो डिविजन हैं. महाराष्ट्र में एक तरह से 04 डिविजन हैं- कोंकण और गोवा, विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र. देश के मौसम सबडिविजन को कैसे समझें, इसके लिए हम नीचे इसके बारे में आपको एक मैप भी दे रहे हैं.

    देश के मेट्रो सबडिविजन का मैप, जिससे पता चलता है कि देश को मौसम के हिसाब से कितने हिस्सों में बांटा गया है.

    14 सितंबर को हुआ क्या
    सौराष्ट्र औऱ गुजरात में सामान्य से 951 फीसदी बारिश हुई. राजकोट में 516 फीसदी ज्यादा बारिश तो जामनगर में बाढ़ जैसे हालात. ओडिसा में 881 फीसदी ज्यादा वर्षा. कुछ ऐसा ही हाल दिल्ली, यूपी और महाराष्ट्र में भी देखा गया. 20 सितंबर के आसपास कोलकाता में इतनी बारिश हुई कि वो डूब गया. इतनी बारिश वहां पिछले 14 सालों में कभी एक दिन में नहीं देखी गई.

    क्यों हुआ ऐसा
    मौसम विज्ञानी कहते हैं कि क्लायमेट चेंज के चलते बंगाल की खाड़ी में सितंबर के महीने में 02-03 बार कम दबाव का क्षेत्र बना. इसके बाद गहरा विक्षोभ पैदा हुआ. बारिश वाले बादलों की गतिविधियां यकायक उत्तर से लेकर पूर्वी तटों तक सक्रिय हो गईं. मौसम विज्ञानी मानते हैं कि अब ऐसा बार बार हो सकता है. गीले दिन और ज्यादा गीले हो सकते हैं तो गर्म दिन और ज्यादा गर्म. जब भी लो प्रेसर का क्षेत्र बनता है तो इसका असर 10 दिनों तक आमतौर पर रहता है.

    सितंबर के मध्य तक देश में कहां कितनी बारिश हुई. कहीं कम तो कहीं बहुत ज्यादा। (ग्राफिक – न्यूज18)

    ओडिसा में तो एक्स्ट्रीम हालात
    क्लाइमेट चेंज के चलते ओडिसा में मौसम हर तरह से ज्यादती वाला हो गया. पहले वहां गर्मियों में ज्यादा गर्म हवाएं यानि लू चली तो फिर सूखा भी पड़ता लगा. जुलाई और अगस्त में धान की खेती करने वालों को निराशा होने लगी थी. पैडी तो लगा दी गई लेकिन खेतों में पानी ही नहीं था. फिर इतना पानी बरसा कि पैडी डूब गई.
    चूंकि क्लायमेट चेंज की स्थिति बढ़ रही है, इसी वजह से देश के तमाम इलाकों में ऐसी बारिश हो रही है, जो दशकों में नहीं हुई. माना जा रहा है कि अलग कुछ दशकों में इस मौसम बदलाव के चलते ऐसी स्थितियां पैदा होंगी कि बडे़ पैमाने पर लोगों को इधर से उधऱ होना होगा.

    इस बार भी क्या देर से लौटेगा मानसून
    आमतौर पर सितंबर महीने में इतनी बारिश नहीं देखी जाती. ये मानसून के लौटने का वक्त होता है. लेकिन इस बार सितंबर महीने में जोरदार बारिश हो रही है. मतलब ये हुआ कि मानसून लगातार दूसरे साल देरी से लौट रहा है. 60 साल में लगातार दूसरे साल अब मानसून के देरी से लौटने का अनुमान है. 1960 में आखिर बार मानसून देर से विदा हुआ था.मौसम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 1901 के बाद ऐसा चौथी बार होगा.

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