Explained : क्या आप दूसरी बार कोरोना के शिकार हो सकते हैं? 10 ज़रूरी बातें जानें

न्यूज़18 कार्टून

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अगर आपको ऐसा लगता है कि एक बार कोविड-19 से रिकवर हो जाने के बाद कोई चिंता की बात नहीं है, तो आपको सचेत रहना चाहिए. रीइन्फेक्शन (Corona Virus Reinfection) के संबंध में आपके मन में उठने वाले 10 सवालों के जवाब यहां हैं.

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कैम्ब्रिज में हुई एक स्टडी में कहा गया कि कोविड-19 संक्रमित 1300 व्यक्तियों में से 58 दूसरी बार संक्रमित हुए. एक बार कोरोना संक्रमण होने के बाद दूसरी बार कितनी आशंका रहती है, इस बारे में भारत की शीर्ष स्वास्थ्य संस्था आईसीएमआर और दुनिया की प्रतिष्ठित अन्य संस्थाओं ने भी स्टडीज़ की हैं, जिनमें कई फैक्ट्स सामने आए हैं. कोरोना की पहली लहर के दौरान दोबारा इन्फेक्शन का खतरा न के बराबर था, जबकि नई लहर के दौर में इस खतरे से इनकार नहीं किया जा रहा है.

किसी व्यक्ति को दूसरे कोरोना संक्रमण का खतरा कितना और किस तरह होता है? किन लोगों के लिए यह जोखिम की बात है और इससे जुड़े हर सवाल का जवाब जानिए.

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सवाल : रीइन्फेकशन का रिस्क किसे होता है?
जवाब : ऐसे लोगों में दोबारा संक्रमण का खतरा होता है, जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है. यानी इन लोगों का इम्यून रिस्पॉन्स लंबा नहीं चल पाता या फिर इनका शरीर वायरस के खिलाफ तगड़ी इम्युनिटी डेवलप ही नहीं कर पाता.

सवाल : दोबारा संक्रमण के खतरे के ग्रुप को लेकर क्या कोई स्टडी हुई?
जवाब : इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. स्वप्निल पारिख ने संयुक्त रूप से एक किताब लिखी है, जो कोरोना वायरस के बारे में कई फैक्ट्स पर आधारित है. इस किताब में यह बताया गया है कि किसे रीइन्फेक्शन का खतरा ज़्यादा होता है. इसके अलावा, द लैंसेट में छपी एक स्टडी में भी कहा गया कि यह दुर्लभ है लेकिन 65 साल से ज़्यादा उम्र वाले इस जोखिम में रहते हैं.

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मास्क और सतर्कता ही कोरोना वायरस के खिलाफ बचाव है.


सवाल : दोबारा संक्रमण के चांस कितने हैं?
जवाब : उम्रदराज़ों के साथ ही यह खतरा उन लोगों में भी होता है, जो पहले ही थैलेसीमिया जैसे रोगों से जूझ रहे हों. वैश्विक महामारी की शुरूआत में माना गया था कि रीइन्फेक्शन बहुत दुर्लभ बात है, लेकिन लगातार हुए अध्ययनों के बाद इसकी आशंका 10% तक देखी गई.

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सवाल : आखिर दोबारा संक्रमण होता ​कैसे है?
जवाब : इसे समझना चाहिए कि एक बार कोरोना संक्रमण होने पर शरीर दूसरी बार वायरस अटैक के समय एंटीबॉडी बनाकर वायरस के हमले को बेअसर करता है. लेकिन, कुछ कमज़ोर शरीर वायरस के दूसरे हमले के समय एंटीबॉडी असरदार नहीं कर पाते. अगस्त 2020 में पहली बार रीइन्फेक्शन की पुष्टि हुई थी.

सवाल : रीइन्फेक्शन कितनी गंभीर बात है?
जवाब : एक तरफ भारत में वैक्सीनेशन चल रहा है, तो दूसरी तरफ बढ़ते केसों के साथ ही खबरें हैं कि नए वैरिएंट्स भी देश में सक्रिय हैं. ऐसे में, रीइन्फेक्शन के डेटा से खतरा यह है कि रिकवर हो चुके मरीज़ दोबारा वायरस से संक्रमित हो सकते हैं.

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सवाल : क्या दोबारा संक्रमित होना ज़्यादा घातक होता है?
जवाब : रीइन्फेक्शन ज़्यादा गंभीर हो सकता है, इस बारे में दुनिया की पहली स्टडी में शामिल रहे डॉ. पारिख की मानें तो ज़्यादातर केसों में यह गंभीर नहीं होता, लेकिन लोगों के एक छोटे ग्रुप में गंभीर केस देखे गए. खास तौर से उन लोगों के मामले में यह सही है, जो पहली बार में एसिम्प्टोमैटिक रहे हों.

सवाल : इस खतरे के पीछे विज्ञान का क्या कहना है?
जवाब : ICMR की स्टडी के मुताबिक भी माना जा चुका है पहले संक्रमण के मुकाबले दूसरी बार में हालत ज़्यादा गंभीर होती है. अस्ल में अगर पहले एसिम्प्टोमैटिक रहते हुए आप संक्रमित होते हैं, तो शरीर वायरस के खिलाफ पूरी तरह से एंटीबॉडी को शरीर की याददाश्त में रख नहीं पाता. वायरस के दूसरे अटैक के समय शरीर समय पर मज़बूत ढंग से रिएक्ट नहीं कर पाता.

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खबरों की मानें तो वैक्सीन से दोबारा संक्रमण पर काफी हद तक काबू संभव है.


सवाल : वैक्सीन से कितनी मदद मिलती है?
जवाब : निश्चित तौर पर वैक्सीन से संक्रमण रोकने और दोबारा संक्रमण की गंभीरता कम होने में मदद मिलती है, लेकिन कितने समय तक? फिलहाल इसका कोई पुष्ट डेटा नहीं है. वहीं, वैक्सीन कंपनियों फाइज़र व बायोएनटेक का दावा रहा है कि वैक्सीन लेने के बाद 6 महीने तक संक्रमण नहीं हो सकता. लेकिन, बात यही है कि वैक्सीन के बाद भी कोई कितने समय तक संक्रमण से बच सकता है, यह उसके शरीर के इम्यून सिस्टम से ही तय होता है.

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डॉ. पारिख के मुताबिक वैक्सीन ले चुके व्यक्ति को दोबारा संक्रमण हो भी तो उसके गंभीर होने की आशंका न के बराबर ही होगी.

सवाल : क्या नए वैरिएंट्स से दोबारा संक्रमण को लेकर जोखिम में कोई फर्क पड़ता है?
जवाब : यूके वैरिएंट (B 1.1.7) और साउथ अफ्रीकन वैरिएंट (B.1.351) के बारे में आपको बताया जा चुका है कि ये ज़्यादा तेज़ी से संक्रमण फैलाने वाले स्ट्रेन हैं. डॉ. पारिख के मुताबिक अगर वैरिएंट के मामले में एंटीजेनिक बदलाव होगा, तो दोबारा संक्रमण हो सकता है.

सवाल : क्या रीइन्फेक्शन से बचने का कोई तरीका है?
जवाब : कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचने के लिए जो सावधानियां बताई जाती हैं, वही यहां भी लागू होती हैं. मास्क, साफ सफाई, सैनिटाइज़ेशन और उचित दूरी को आदत बनाएं. भले ही आप युवा हों, स्वस्थ हों या वैक्सीन ले चुके हों, ये आदतें आपको दोबारा संक्रमण के खतरे से दूर रखने में मददगार साबित होंगी.
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