कितना खतरनाक है वो लाल त्रिभुज, जिसके कारण Facebook को हटाना पड़ा ट्रंप का विज्ञापन?

कितना खतरनाक है वो लाल त्रिभुज, जिसके कारण Facebook को हटाना पड़ा ट्रंप का विज्ञापन?
लाल रंग के उल्टे त्रिकोण के पीछे हजारों-लाखों यहूदियों के कत्लेआम की कहानी छिपी है

कंसन्ट्रेशन कैंपों (concentration camps) में कपड़ों पर लगे अलग-अलग रंगों से त्रिभुज से तय होता था कि कैदियों को कितनी ज्यादा यातना मिलनी चाहिए.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक (social media platform Facebook) ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का एक विज्ञापन हटा दिया. रीइलेक्शन कैंपेन (reelection campaign in America) के तहत इस विज्ञापन में ट्रंप की प्रचार समिति ने लाल रंग का उल्टा त्रिभुज (upside-down red triangle) बनाया था. ये त्रिभुज नाजियों से जुड़ा हुआ है. विज्ञापन को हटाते हुए फेसबुक ने कहा कि लाल त्रिभुज का इस्तेमाल सिर्फ नाजियों की निंदा के लिए या उनके हवाले के लिए हो सकता है. अब क्योंकि ट्रंप के विज्ञापन में ऐसा कुछ नहीं दिखा तो फेसबुक ने उसे बैन कर दिया. जानिए, क्या है लाल रंग के त्रिभुज का मतलब और कैसे वो नाजियों के कत्लेआम से जुड़ा हुआ है.

कैसे हुई फेसबुक विवाद की शुरुआत
अगले पांच महीने में होने जा रहे राष्टपति चुनाव को लेकर ट्रंप तैयारियों में जुटे हुए हैं. इसी के तहत उनकी टीम ने एक विज्ञापन दिया, जिसमें लाल रंग का त्रिभुज बना हुआ था. ये 18 जून की बात है. तुरंत ही फेसबुक ने एक्शन लेते हुए विज्ञापन हटा दिया. उसके अनुसार नरसंहार के इस प्रतीक को किसी संदर्भ में ही सोशल साइट पर लगाया जा सकता है.

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इधर ट्रंप के प्रचार अभियान के संपर्क निदेशक टिम मुर्तो के मुताबिक उन्होंने ये त्रिभुज एंटीफा के लिए लगाया था, जिसका प्रतीक यही है.



फेसबुक ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक विज्ञापन हटा दिया


बता दें कि पिछले महीने एक अश्वेत अमेरिकी नागरिक की पुलिस की बर्बरता के कारण मौत के बाद पूरे देश में हिंसा भड़क उठी थी. इस दौरान ट्रंप ने आतंकी संगठन एंटीफा को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार कहा था. हालांकि अब तक इसका कोई सबूत नहीं मिला है.

खूनी है इसका इतिहास
लाल रंग के त्रिकोण को लेकर सोशल प्लेटफॉर्म यूं ही संवेदनशील नहीं. इसके पीछे हजारों-लाखों यहूदियों के कत्लेआम की कहानी छिपी है. दरअसल हिटलर के शुरू किए गए कंसेंट्रेशन कैंपों में कैदियों की पहचान को लेकर प्रतीक बनाए गए थे. हिटलर का मानना था कि जर्मन लोग सबसे अच्छी नस्ल के हैं. बाकी सारी नस्लें कमतर हैं. खासकर यहूदियों के लिए हिटलर के मन में सबसे ज्यादा नफरत थी. यही वजह है कि उन्हें अलग से पहचानने के लिए यहूदी कैदियों की यूनिफॉर्म पर पीला स्टार टंका होता था. इसी तरह से राजनैतिक कैदियों के लिए उल्टा लाल त्रिभुज था, जो उनके कपड़ों पर लगा होता था. यूएसए टुडे के अनुसार ये लाल त्रिभुज 95 प्रतिशत से ज्यादा कैदियों की पहचान था.

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गे लोगों से भी नफरत का चिन्ह
अगर कोई कैदी होमोसेक्सुअल है तो उसके कपड़ों पर पहचान के लिए उल्टा लेकिन गुलाबी त्रिभुज होता था. वहीं अगर किसी ने कोई भी ऐसा काम किया हो, जो जर्मनों के लिए क्राइम की श्रेणी में आता हो तो उसके कपड़ों पर ग्रीन त्रिभुज लगा होता, चाहे वो कोई छोटा बच्चा भी क्यों न हो. कई बार ऐसा भी होता था कि किसी एक कैदी के कपड़ों पर कई प्रतीक लगे होते हैं. ऐसे कैदियों को जानलेवा यंत्रणा देने के बाद गैस चैंबर में भेजकर उन्हें मरवा दिया जाता था.

कैदियों को जानलेवा यंत्रणा देने के बाद गैस चैंबर में भेजकर उन्हें मरवा दिया जाता था


यहूदियों के अलावा होमोसेक्सुअल लोगों के लिए भी हिटलर के दिल में बहुत नफरत थी. वो मानता था कि ऐसे लोग संक्रामक होते हैं और नस्लें खराब करते हैं. यही वजह है कि उल्टे गुलाबी त्रिभुज वालों को भी काफी प्रताड़नाओं से गुजरना पड़ता था.

स्वस्तिक भी आया दायरे में
वैसे त्रिभुज ही क्यों, हिटलर ने अपनी पार्टी के लिए स्वस्तिक का भी इस्तेमाल किया था. साल 1920 में नाजी पार्टी, जिसे नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी के तौर पर भी जाना जाता था, के नेता एडोल्फ हिटलर ने अपनी पार्टी का प्रतीक चुना. इसे वहां हेकेनक्रुएज़ कहा जाता था. मालूम हो कि स्वस्तिक की हिंदुओं में काफी मान्यता है. यहां तक कि ये दुनिया के कई देशों में सौभाग्य का प्रतीक रहा. लेकिन नाजी पार्टी द्वारा इसके इस्तेमाल के बाद से लोग इस प्रतीक से बचने लगे. आततातियों की उस याद को मिटाने के लिए जर्मनी ने काफी कोशिश की. वहां स्वस्तिक के इस्तेमाल पर रोक लग गई. यहां तक साल 2007 में जर्मनी ने पूरे यूरोप में इस प्रतीक पर बैन लगवाने की कोशिश की, जो कि नाकामयाब रही. अब स्वस्तिक पर जर्मन अत्याचार के कलंक को मिटाने के लिए यूरोप में कई जगहों पर प्रयास हो रहे हैं.

हिटलर ने अपनी पार्टी के लिए स्वास्तिक का भी इस्तेमाल किया था


साल 2013 में 13 नवंबर को कोपेनहेगन में स्वस्तिक दिवस मनाया गया, जहां दुनियाभर से टैटू कलाकार स्वस्तिक को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए इकट्ठा हुए. आयोजकों का कहना था कि हिटलर की पार्टी ने इस चिह्न पर जो धब्बा लगा दिया, उसे साफ करने की जरूरत है.

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क्या है एंटीफा
अब जानते हैं उस ग्रुप एंटीफा के बारे में, जिनके बारे में ट्रंप की प्रचार समिति ने कहा कि उन्होंने इसके संदर्भ में त्रिभुज लगाया था. अमेरिका में फासीवाद के विरोधी (anti-fascists) समूह को Antifa के नाम से जाना जाता है. प्रतीक के तौर पर उल्टे लाल त्रिभुज का इस्तेमाल करने वाले ये लोग नव-नाजी, फासीवाद और रंगभेद के खिलाफ खड़े रहने का दावा करते हैं. यही वजह है कि अश्वेत मूल के अमेरिकी व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत के बाद अमेरिका में हिंसा भड़कने पर ट्रंप ने इसके लिए इसी एंटीफा को दोषी माना था. हालांकि इसका कोई प्रमाण अब तक नहीं मिला है.
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