Explained: क्यों ऑस्ट्रेलिया और फेसबुक की ठनी, क्या होगा अंजाम?

फेसबुक ने गुरुवार से ऑस्‍ट्रेलिया में न्यूज वेबसाइट्स को प्रतिबंधित कर दिया- सांकेतिक फोटो (Photo- news18 via Twitter)

फेसबुक ने गुरुवार से ऑस्‍ट्रेलिया में न्यूज वेबसाइट्स को प्रतिबंधित कर दिया- सांकेतिक फोटो (Photo- news18 via Twitter)

फेसबुक ने गुरुवार से ऑस्‍ट्रेलिया में न्यूज वेबसाइट्स को प्रतिबंधित (Facebook switching off news in Australia) कर दिया. यहां तक कि उसने अपना पेज भी ब्लॉक कर दिया. अब गूगल भी यही धमकी दे रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 19, 2021, 11:57 AM IST
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पहले कोरोना से प्रभावित ऑस्ट्रेलिया में अब एक नई मुसीबत आ गई. वहां फेसबुक ने सभी समाचार वेबसाइटों को खबरें पोस्‍ट करने पर प्रतिबंध लगा दिया और यहां तक कि खुद अपना पेज भी ब्लॉक कर रखा है. फेसबुक के बाद अब गूगल भी कह रहा है कि वो इस देश में अपना सर्च इंजन बंद कर सकता है. फेसबुक से एक विकसित देश के तनाव का असर देश की कई जरूरी सेवाओं पर भी पड़ने लगा है.

फेसबुक और ऑस्ट्रेलिया के बीच विवाद का कारण एक नया कानून है. वर्ल्ड फर्स्ट नाम का ये ऑस्ट्रेलियाई संसद के निचले सदन में पास हो चुका है और अब सीनेट में रखा जाने वाला है. इस कानून को समझने से पहले ऑस्ट्रेलियाई सरकार की चिंता समझते हैं. साल 2016 से ही सरकार को लगने लगा था कि फेसबुक या गूगल जैसी टेक कंपनियों ने बाजार पर कब्जा कर रखा है. सभी बड़े मीडिया संस्थान अपनी खबरों को प्रमोट करने के लिए इनपर निर्भर हो चुके हैं.

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सरकार को मीडिया और टेक कंपनियों के बीच ताकत का असंतुलन दिखा- सांकेतिक फोटो (pixabay)




ऐसे में सरकार को मीडिया और टेक कंपनियों के बीच ताकत का असंतुलन दिखा. जांच के बाद एक सरकारी संस्था ने इस तरह की रिपोर्ट दी और साथ में एक कानून बनाने की सिफारिश भी की ताकि दोनों को बराबरी की ताकत मिले. कुल मिलाकर देखा जाए तो टेक कंपनियों के पर कतरने का ये एक प्रयास था. इसके लिए विधेयक लाया गया, जो कहता है कि टेक कंपनियां खबरों के लिए पैसों का भुगतान करें.
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इससे होगा ये कि मीडिया संस्थानों के पास ताकत आ जाएगी और वे टेक कंपनियों से बराबरी पर बात कर सकेंगी. साथ ही उन खबरों की कीमत तय होगी, जो टेक कंपनियों की न्यूज फीड में लगातार दिखती हैं. यहां ध्यान देंगे तो पाएंगे कि काफी सारे लोग किसी खास न्यूज साइट पर जाकर खबरें देखने की बजाए सीधे गूगल सर्च में आई खबरें देखते हैं ताकि मुख्य खबरें पता चल सकें. ये टेक कंपनी का सीधा फायदा है लेकिन अब नया कानून टेक कंपनियों को सीधा ये फायदा देने की बजाए उससे नेगोशिएट करने की कोशिश में है.

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फेसबुक का कहना है कि सरकार उसके और निजी मीडिया संस्थानों के बीच के रिश्ते में दखल दे रही है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


इसके पीछे सरकार का ये भी सोचना है कि टेक कंपनियों को तो खबरें अपनी फीड में लेने से फायदा हो ही रहा है, लेकिन थोड़ा फायदा न्यूज कंपनियों को भी मिले. बता दें कि कोरोना काल में बंदी के दौरान कई बड़े मीडिया संस्थान भी कटौती और कई सारी आर्थिक तंगी से गुजरे. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की सरकार टेक कंपनियों से ये घाटा वसूल करने की कोशिश में है. गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों को कोरोना से कोई नुकसान नहीं हुआ, बल्कि मुनाफा बढ़ा तो सरकार को अपना कानून वाजिब लग रहा है.

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दूसरी ओर फेसबुक जैसी बड़ी टेक कंपनी इससे नाराज हो गई है. उसका कहना है कि सरकार उसके और निजी मीडिया संस्थानों के बीच के रिश्ते में दखल दे रही है और मजबूरन उन्हें अपनी साइट ब्लॉक करनी होगी. ये कहने के बाद फेसबुक ने ऐसा कर भी दिया.

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फेसबुक ने जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की खबरों समेत अपनी साइट ब्लॉक की, तुरंत वहां कोहराम मच गया- सांकेतिक फोटो (flickr)


यूजर लगातार कह रहे हैं कि वे फेसबुक पर कोई खबर नहीं देख पा रहे. गूगल भी फेसबुक की तर्ज पर विधेयक के पारित होने पर अपना सर्च इंजन ऑस्ट्रेलिया से हटाने की कह चुका है, हालांकि वो मीडिया के बेताज बादशाह रुपर्ट मर्डोक की कंपनी न्यूज कॉर्प को खबरों के लिए पैसे देने को तैयार हो चुका है.

इधर फेसबुक ने जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की खबरों समेत अपनी साइट ब्लॉक की, तुरंत वहां कोहराम मच गया. यूजर न केवल खबरें देखने से वंचित हो रहे हैं, बल्कि इसकी चपेट में कई जरूरी सरकारी विभाग भी आ गए. जैसे वहां मौसम विभाग का पेज फेसबुक पर भी था, जो बंद हो गया. इसके बाद विभाग में लोगों से अपनी खुद की वेबसाइट पर जाकर ताजा अपडेट देखने की गुजारिश की.
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