क्या सबसे ज्यादा युवाओं का राज्य बिहार इस बार युवा नेताओं पर दांव खेल चुका है?

तेजस्वी यादव 31 साल के हैं, जबकि चिराग पासवान की उम्र 38 साल है- (news18 hindi)
तेजस्वी यादव 31 साल के हैं, जबकि चिराग पासवान की उम्र 38 साल है- (news18 hindi)

तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) 31 साल के हैं, जबकि चिराग पासवान (Chirag Paswan) की उम्र 38 साल है. दोनों ने ही इस बार बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar assembly election 2020) का एजेंडा बदलकर रख दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2020, 6:15 PM IST
  • Share this:
एग्जिट पोल के अनुमानों के अनुसार बिहार में इस बार राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन की सरकार बन सकती है. युवा नेताओं के तौर पर तेजस्वी यादव और चिराग पासवान उभरे और लगातार 15 सालों के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार की नींद उड़ा दी. दोनों ही नेता उम्र और राजनीति के खास जानकार न होने के बाद भी बिहारी युवाओं का मन जीतते दिख रहे हैं. जानिए, युवा नेतृत्व इस बार बिहार में क्या कमाल कर सकता है.

चिराग ने की बिहार फर्स्ट की बात
लोक जनशक्ति पार्टी ने चिराग पासवान को स्टार प्रचारक बनाते हुए चुनाव लड़ा. इसमें चिराग के कॉन्फिडेंस का अंदाजा इसी बात से लग सकता है कि उन्होंने दावा कर दिया कि नीतीश कुमार अब कभी बिहार के सीएम नहीं बन सकेंगे. क्या ये दावा महज नई उम्र का दावा है, या फिर इस दावे के पीछे कोई दूसरा गणित भी काम कर रहा है?

गौर से देखने पर चिराग का दावा बिहार के युवाओं की मदद से किया हुआ दावा दिखता है. वे चुनाव में बिहार फर्स्ट और बिहारी फर्स्ट की बात करते रहे. ये एकदम अमेरिका फर्स्ट की तर्ज पर है, जो उतनी ही आक्रामकता से वोटरों को लुभाता है.
लोक जनशक्ति पार्टी ने चिराग पासवान की अगुवाई में चुनाव लड़ा




सालभर किया सर्वे
साथ ही साथ चिराग ने अपने विजन डॉक्युमेंट में युवाओं के लिए कई योजनाएं रखीं. ये डॉक्युमेंट एक रोज में नहीं बना, बल्कि इसपर काम साल 2019 में ही शुरू हो चुका था. हाल ही में दिवंगत पिता रामविलास पासवान ने केंद्र की राजनीति की जगह बेटे चिराग को बिहार की राजनीति को समझने के लिए एक सर्वे की सलाह दी. इस सर्वे में 10 हजार युवा जुड़े, जिनमें से अधिकतर नीतीश से गुस्साए दिखे.

ये भी पढ़ें: क्या कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए NASA में संस्कृत भाषा अपनाई जा रही है?

दिया दमदार विजन डॉक्युमेंट
सीएम पर लोगों को गुस्से से प्रेरित होकर चिराग और पार्टी ने मिलकर विजन डॉक्युमेंट बना डाला, जिसमें बिहार फर्स्ट की बात है. केवल 38 साल के चिराग ने दो तरह से राजनीति की- एक तो विरोधी को कमजोर नब्ज पर वार किया और दूसरा- खुद को मजबूत दिखाते हुए युवाओं को अपनी ओर खींचा. चुनाव के दौरान उनकी सभाओं में कोरोना के बाद भी भीड़ दिखी, साथ ही वे सोशल मीडिया पर भी युवाओं को आक्रामक तेवरों से एड्रेस करते हैं. ये बात भी उनके ठीक-ठाक पक्ष में जा सकती है.

ये भी पढ़ें: जानिए, क्यों एथेंस में 200 सालों तक कोई मस्जिद नहीं बन सकी 

तेजस्वी यादव को माना जा रहा भावी CM
अब बात करते हैं, दूसरे बेहद संभावनाशील युवा तेजस्वी यादव की. बिहार में इनके पक्ष में हवा का अनुमान लगाना अब कोई मुश्किल बात नहीं. परिणाम कल यानी 10 नवंबर को आने हैं लेकिन बिहार में अभी से जगह-जगह सीएम तेजस्वी यादव को बधाई जैसे पोस्टर लगने की खबरें आने लगी हैं.

तेजस्वी यादव को परिणाम आने से पहले ही बिहार का भावी सीएम कहा जा रहा है


उठाया बेरोजगारी का मुद्दा
केवल 31 साल के तेजस्वी की लोकप्रियता ने भाजपा जैसी वरिष्ठ नेताओं की पार्टी को हिलाकर रख दिया. इसकी क्या वजह हो सकती है? दरअसल तेजस्वी ने भी घिसे-पिसे मुद्दे उठाने की बजाए सीधा युवाओं की नब्ज टटोली. उन्होंने अपनी सारी चुनाव प्रचार सभाओं में बेरोजगारी और रोजगार शब्द बार-बार कहे. एजेंडा में भी तेजस्वी ने कुछ हजार नहीं, बल्कि सीधे 10 लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कही.

ये भी पढ़ें: ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी से महिला का समानार्थी 'बिच' शब्द हटा, जानिए, क्यों हुए बदलाव  

‘बेरोजगारी हटाओ' पोर्टल से ली जानकारी
रोजगार का वादा काफी बड़ा वादा है, खासकर उन हालातों में, जब बिहार के युवा तैयारी के बाद भी परीक्षा देने से वंचित हो रहे हैं. ये देखते हुए राजद के इस सबसे युवा नेता ने सितंबर में ‘बेरोजगारी हटाओ' पोर्टल लॉन्च किया. लोगों का दिल टटोलने के लिए इसके साथ एक टोल-फ्री नबंर भी जारी किया गया, जिसपर मिस्ड कॉल देना था. पार्टी का दावा है कि लगभग साढ़े 9 लाख युवाओं ने वेबसाइट पर खुद रजिस्टर किया और 12 लाख से ज्यादा लोगों ने मिस्ड कॉल दिया.

ये भी पढ़ें: क्यों पाकिस्तानी जनता दोस्त China से कोरोना वैक्सीन लेते हुए डर रही है?  

भरोसा जीतने को ये काम कर रहे
तेजस्वी कैबिनेट की पहली है बैठक में 10 लाख नौकरियां देने का वादा कर ही चुके हैं. साथ ही साथ वे हर सरकारी विभाग में जगहों के खाली होने के आंकड़े भी गिनाते जाते हैं ताकि युवाओं को भरोसा उनपर बढ़े. बता दें कि बिहार में युवा सबसे बड़ा वोट बैंक हैं, जहां राज्य की 60 प्रतिशत आबादी युवा है. नौकरियां न होने और बाढ़ जैसी मुसीबतों के कारण यहां पलायन बढ़ रहा है. ऐसे में तेजस्वी का ये दांव केवल युवाओं ही नहीं, बल्कि वोटरों के पूरे समुदाय के लिए आकर्षण बन गया है, जो योग्यता के बाद भी पलायन पर मजबूर हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज