कौन है वो आर्किटेक्ट, जिसने राम मंदिर का डिजाइन तैयार किया

कौन है वो आर्किटेक्ट, जिसने राम मंदिर का डिजाइन तैयार किया
साल 1987 में भी राम मंदिर का नक्शा वास्तुविद चंद्रकांत सोमपुरा ने ही तैयार किया था

राम मंदिर का मॉडल तैयार करने वाले वास्तुविद चंद्रकांत सोमपुरा (Chandrakant Sompura, the architect who designed Ram Mandir in Ayodhya) की सबसे अनोखी बात ये है कि इनके पास वास्तुकला की कोई औपचारिक डिग्री नहीं है. इसके बाद भी इन्हें मंदिरों के नक्शे के लिए देश-विदेश से न्यौता मिलता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 21, 2020, 12:44 PM IST
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अयोध्या (Ayodhya) में राम जन्मभूमि (Ram Janambhoomi) पर 5 अगस्त को भव्य श्रीराम मंदिर (Ram Temple) का भूमि पूजन होने जा रहा है. इस बीच 18 जुलाई को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में मंदिर के मॉडल में थोड़े बदलाव की बात हुई. साथ ही ये भी तय हुआ कि सोमपुरा परिवार से जुड़े चंद्रकांत सोमपुरा ही मंदिर का डिजाइन तैयार करेंगे. बता दें कि साल 1987 में भी राम मंदिर का नक्शा वास्तुविद चंद्रकांत सोमपुरा ने ही तैयार किया था. जानिए, कौन है ये शख्स, जिसे उस मंदिर के निर्माण का काम मिला है, जिसपर सारे देश की नजरें हैं.

विरासत में मिला मंदिरों के नक्शे बनाने का हुनर
भारत की बहुसंख्यक आबादी की आस्था के स्थल का नक्शा तैयार करना आसान बात नहीं. वैसे यहां पर मूलतः दो शैलियों के मंदिर बनाए जाते हैं. एक है द्रविड़ शैली, जिसके मंदिर दक्षिण भारत में बनते हैं. दूसरी शैली को नागर शैली कहते हैं. ये शैली उत्तर भारतीय मंदिरों में दिखती है. गुजरात से ताल्लुक रखने वाला सोमपुरा परिवार इसी नागर शैली के मंदिरों की वास्तुकला का जानकार माना जाता है. ये पूरा परिवार ही नागर शैली के मंदिर बनाने में महारत रखता है. चंद्रकांत सोमपुरा के पिता प्रभाकर सोमपुरा ने ही गुजरात का ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर का डिजाइन तैयार किया था. उन्होंने मथुरा का मंदिर भी बनाया था.

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उन्होंने ही नागर मंदिरों के निर्माण की शैलियां अपने परिवार को भी सिखाईं. यही वजह है परिवार के लगभग सारे ही सदस्य मंदिर निर्माण के काम से जुड़े हुए हैं और देश-विदेश में हिंदू मंदिरों का नक्शा बना रहे हैं.



चंद्रकांत सोमपुरा ने पूरे देश और दुनिया में भी नागर स्टाइल के मंदिरों का नक्शा तैयार किया


कौन हैं चंद्रकांत
चंद्रकांत सोमपुरा ने पूरे देश और दुनिया में भी नागर स्टाइल के मंदिरों का नक्शा तैयार किया. लंदन के प्रसिद्ध अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण मंदिर का नक्शा इन्होंने ही तैयार किया था. अपने स्थापत्व और भव्यता के कारण इस मंदिर का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. माना जाता है कि राम मंदिर निर्माण के लिए इनसे सबसे पहले बात विश्व हिंदू परिषद के मुख्य अशोक सिंघल ने की थी. इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद साल 1987 में उन्होंने मंदिर का डिजाइन बनाया, जिसपर साल 1990 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) कुंभ के दौरान संतों की उपस्थिति में सहमति बनी.

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मंदिर पर चल रहा काम 
इसके बाद उस मॉडल को अयोध्या के कारसेवक पुरम में रखा गया. ये जगह विहिप का मुख्य कार्यालय है. प्रस्तावित मंदिर का नक्शा बनाने के बाद फिलहाल चंद्रकांत सोमपुरा अयोध्या में ही हैं. इधर मंदिर निर्माण के काम में तेजी आ चुकी है. डिजाइन के आधार पर सहायक वास्तुविद अलग-अलग जगहों पर काम कर रहे हैं ताकि मंदिर से जुड़ी सारी चीजें एक ही समय पर तैयार हो सकें. चंद्रकांत सोमपुरा के मुताबिक पत्थरों पर नक्काशी का 40 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. माना जा रहा है कि मंदिर निर्माण लगभग 2 से ढाई साल में पूरा हो जाएगा.

गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर का डिजाइन इनके पिता ने तैयार किया था


फॉर्मल डिग्री नहीं है इनके पास
राम मंदिर का मॉडल तैयार करने वाले इस वास्तुविद की सबसे अनोखी बात ये है कि इनके पास वास्तुकला की कोई औपचारिक डिग्री नहीं है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र है कि इन्होंने जो भी सीखा, अपने पिता से ही सीखा. इसके बाद भी इन्हें देश-दुनिया से बड़े-बड़े मंदिरों का मॉडल बनाने के लिए बुलाया जाता है. खुद सोमपुरा अपने-आप को मंदिर का वास्तुविद कहलाना पसंद करते हैं.

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79 साल के चंद्रकांत सोमपुरा ने नागर शैली के 131 मंदिर देश-विदेश में बनवाए हैं. इस काम में उनका पुत्र भी उनकी मदद करता है. वैसे राम मंदिर में सोमपुरा के सुझाए मॉडल में थोड़ा बदलाव किया गया है. प्रस्तावित मंदिर 161 फीट ऊंचा होगा और इसमें तीन की जगह पांच शिखर होंगे. इसके अलावा राम मंदिर के नक्शे में मौलिक रुप से कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

कोणार्क का सूर्य मंदिर नागर शैली के मंदिरों का एक उदाहरण है


क्या है नागर शैली की खासियत
जिस नागर शैली में ये मंदिर बनाया जा रहा है, वो पूरे उत्तर भारत के मंदिरों में दिखती है. उत्तर भारतीय हिन्दू स्थापत्य कला की एक खास पहचान है, वो ये कि इसमें आधार से लेकर ऊपर तक ये चतुष्कोण होती है. मंदिर में गर्भगृह, उसके साथ क्रमशः अन्तराल, मण्डप तथा अर्द्धमण्डप होते हैं. इन सारे हिस्सों का निर्माण एक ही अक्ष पर होता है. मंदिर का ऊपरी हिस्सा इस शैली की खासियत है, जिसे कलश कहते हैं. माना जाता है कि सबसे पहले मध्यकालीन भारत में परमार वंश के शासकों ने मंदिरों के लिए इस शैली को पसंद किया. सोमनाथ मंदिर, जनन्नाथ मंदिर, कोणार्क का सूर्य मंदिर, उड़ीसा का लिंगराज मंदिर इस शैली के कुछ ख्यात मंदिर हैं. वैसे खजुराहो का शिल्प भी नागर शैली का ही है.

मिली-जुली शैली भी है चलन में
वैसे द्रविड़ और नागर शैलियों के अलावा एक और शैली भी भारत के मंदिरों में दिखती है. इसे वेसर शैली कहते हैं. ये नागर और द्रविड़ शैली का मिलाजुला रूप है. मध्य भारत, खासकर मालवा और कर्नाटक के मंदिरों में इसी शैली के मंदिर ज्यादा दिखते हैं. इसमें मंदिरों का शिखर गोलाकार या चपटा भी हो सकता है. वृंदावन का वैष्णव मंदिर इसी शैली का एक उदाहरण है.
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