कौन है सीरियल किलर साइनाइड मोहन, जिसे 20 हत्याओं के मामले में पुलिस ने धर दबोचा

कौन है सीरियल किलर साइनाइड मोहन, जिसे 20 हत्याओं के मामले में पुलिस ने धर दबोचा
महिलाओं की हत्या के अपने तरीके की वजह से उसे सायनाइड मोहन के नाम से ही जाना जाता है- सांकेतिक तस्वीर (Photo-pixabay)

दोषी के पास एक डायरी मिली, जिसमें उन सारे नामों का ब्यौरा था, जिन्हें वो शिकार बनाता (police found a diary where the serial killer had maintained a list of all the women he approached) था. उसमें ऐसी युवतियों के नाम भी लाल अक्षरों में लिखे थे, जो इस हत्यारे के जाल में नहीं फंसी थीं.

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सायनाइड मोहन ने (Serial Killer Cyanide Mohan) ने एक के बाद एक 20 युवतियों से शादी की, उनके साथ वक्त बिताया और फिर जहर की गोली देकर हत्या कर दी. ये घटना कासरगोड (Kasaragod) की है, जो साल 2009 में घटी. इसमें सायनाइड मोहन ने हॉस्टल में खाना पकाने वाली 25 वर्षीया युवती से जान-पहचान की. धीरे-धीरे बात शादी तक पहुंच गई. इसके बाद मोहन युवती को लेकर बेंगलुरु चला गया. वहां लॉज में दोनों के बीच संबंध बने. इससे अगले ही दिन मोहन ने युवती को मंदिर ले जाने की पहल की. मंदिर जाने के लिए बस का इंतजार करते हुए अपराधी ने उसे सायनाइड की गोली दे दी. कहा कि ये गर्भनिरोधक गोली है. युवती ने बस स्टैंड के पास टॉयलेट में जाकर दवा खाई. कुछ ही देर बाद वो मृत मिली. ये अकेला मामला नहीं, साइनाइड मोहन पर कई महिलाओं के साथ दोस्ती कर उनसे रेप और फिर सायनाइड देकर हत्या का दोष साबित हो चुका है. जानिए, कौन है ये सीरियल किलर.

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इस सीरियल किलर का असल नाम आनंद कुलल (Anand Kulal) है. वैसे महिलाओं की हत्या के अपने तरीके की वजह से उसे सायनाइड मोहन के नाम से ही जाना जाता है. मोहन इसलिए क्योंकि वो हर युवती से मिलने के दौरान अपना नाम बदलता था लेकिन मोहन नाम उसने कई बार इस्तेमाल किया था. वैसे मोहन नाम के इस शख्स का दरिंदगी-भरा चेहरा सबसे पहले साल 2009 में सामने आया. तब मीरा (नाम बदला हुआ) नाम की युवती अपने गांव से गायब हुई तो गांववालों को लगा कि ये लव जेहाद जैसा कोई मामला होगा. दक्षिणी कर्नाटक के बंटवाल गांव में इससे पहले भी हिंदू-मुस्लिम शादियों जैसे मामले आए थे. गांववालों ने गुस्से में भरकर हंगामा कर दिया. यहां तक कि पुलिस स्टेशन का घेराव तक हो गया. तब पुलिस मामले की छानबीन में तेजी से जुट गई.



इस शख्स का दरिंदगी-भरा चेहरा सबसे पहले साल 2009 में सामने आया

मृतका की फोन डिटेली खंगालने पर पता चला कि वो किसी दूसरी युवती के नाम पर है. उस दूसरी युवती के पते पर जाने पर पता चला कि वो महीनों से गायब है. उसकी जांच-पड़ताल पर किसी अन्य युवती का नंबर मिला, जिसपर आखिरी बार फोन हुआ था. वहां पहुंचने पर पुलिस को पता चला कि वो युवती भी गायब है. एक-एक करके कड़ी जोड़ने पर एक ऐसी युवती तक पुलिस पहुंच सकी, जिसका फोन तो चालू था लेकिन जो युवती गायब हो चुकी थी. उस चालू मोबाइल नंबर को धनुष नाम का शख्स चला रहा था. कड़ी पूछताछ में उसने बताया कि उसे वो फोन उसके चाचा मोहन कुमार ने दिया है.

मंगलौर के पास डेरलाकट्टा गांव में मोहन अपनी तीसरी पत्नी के घर पर मिला. उससे बातचीत में जो सामने आया, उससे पुलिस भी चौंक गई. दोषी ने कुबूला कि बीसों युवतियों की उसने रेप के बाद जहर देकर हत्या कर दी. इससे पहले पुलिस इसे सेक्स रैकेट का मामला समझ रही थी. पहले दोषी ने 32 लड़कियों को मारने की बात कही थी, लेकिन फिर बयान से मुकर गया.

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सीरियल किलर ने इसके बाद जो कहानी बयान की, वो किसी को भी हिलाकर रख दे. उसने बताया कि सबसे पहले वो अपने शिकार की पहचान करता था. ये आमतौर पर गरीब घरों की लड़कियां होतीं, जो दहेज न देने के कारण शादी नहीं कर पाती थीं. ऐसी युवती की पहचान के बाद किसी बहाने से उससे दोस्ती करता. अपना गलत नाम बताता और सरनेम वही रखता, जो युवती का हो ताकि उसे शादी में कोई अड़चन न दिखे. विश्वसनीयता बनाने के लिए वो बताया करता था कि वो सरकारी टीचर है. ये बात कुछ हद तक सच भी थी. मोहन पहले प्रायमरी स्कूल में टीचर रह चुका था. पूरी तरह से भरोसे में आ चुकी युवती को मोहन एक दिन घर से भागने का प्रस्ताव देता. साथ में गहने रखने को भी कहता ताकि वे शादी कर सकें.

दोषी ने खुद को जुलरी से जुड़ा हुआ बताया और एक केमिकल डीलर से सायनाइड खरीदा (Photo-pixabay)


दूसरे किसी शहर के सस्ते लॉज में युवती के साथ संबंध बनाता और अगले दिन गर्भनिरोधक गोली के बहाने सायनाइड देकर मार देता था. सायनाइड हर जगह नहीं मिलता है. इसे पाने के लिए दोषी ने खुद को जुलरी से जुड़ा हुआ बताया और एक केमिकल डीलर से सायनाइड खरीदा. बता दें कि सायनाइड का उपयोग आज भी आभूषणों की बहुत सी दुकानों में जुलरी साफ करने के लिए होता है. यही सायनाइड वो किसी गोली में इंजेक्ट कर देता था और युवती को दे देता. इसी बीच वो गहने लेकर फरार हो जाता.

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साल 2003 से लेकर 2009 के बीच दक्षिण कर्नाटक के छह शहरों में अलग-अलग बस स्टैंड के पास टॉयलेट से 20 महिलाओं की लाशें मिलीं. इनमें कई बातें एक समान थीं. जैसे महिलाओं की उम्र 25 से लेकर 30 के बीच थी. सभी ने कीमती साड़ियां पहनी हुई थीं लेकिन किसी के भी शरीर पर कोई गहना नहीं था. साफ था कि ये किसी खास आयोजन में जाने के लिए तैयार थीं और तभी उनसे लूटपाट हुई. अलग-अलग शहरों में मौत के कारण पुलिस को इनमें कोई जोड़ नहीं दिखा लेकिन साल 2009 में भीड़ के गुस्से के बाद हरकत में आई पुलिस ने कड़ियां जोड़ीं और तब जाकर ये दरिंदा सामने आया.

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पुलिस को उसके घर से जहर, नकली पहचान पत्र, सरकारी स्कूल की सील, अलग-अलग नामों के विजिटिंग कार्ड्स, सोने के गहने और कई सारे मोबाइल फोन मिले. साथ में एक डायरी भी मिली, जिसमें उन सारे नामों का ब्यौरा था, जिन्हें वो शिकार बनाता था. उनमें ऐसे नाम भी लाल अक्षरों में लिखे थे, जो इस अपराधी के जाल में नहीं फंसी थीं. पुलिस का अंदाजा था कि मौका मिलने पर वो उनके साथ ही कोई क्रूर हरकत करता.

उसी साल गिरफ्तारी के बाद से उसे साइनाइड मोहन कहा जाने लगा. बेहद तेज दिमाग दोषी कोर्ट में अपना केस भी खुद ही लड़ रहा था. आखिरकार साल 2013 में मंगलौर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उसे कई हत्याओं का दोषी माना और फांसी की सजा सुनाई. इस बीच भी दोषी को पांच मामलों में मौत व तीन में उम्रकैद की सजा हो चुकी है.

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