कौन हैं फैसल खान, जिन्होंने मथुरा के मंदिर में पढ़ी नमाज?

मथुरा के नंद मंदिर में नमाज पढ़ने वाला शख्स फैसल खान (Photo- Facebook)
मथुरा के नंद मंदिर में नमाज पढ़ने वाला शख्स फैसल खान (Photo- Facebook)

फैसल खान खुदाई खिदमतगार संगठन के राष्ट्रीय संयोजक (Faisal Khan is national organizer of Khudai Khidmatgar) हैं और खुद को गांधीवादी बताते हैं. उनकी फेसबुक प्रोफाइल पूजा-पाठ की तस्वीरों से भरी पड़ी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 9:43 PM IST
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मथुरा के नंद मंदिर में मुस्लिम युवकों के नमाज (namaz at temple in Mathura) पढ़ने की घटना पर विवाद गहरा गया है. इनमें से एक युवक फैसल खान (Faisal Khan) के तौर पर पहचाना गया. वे खुद को गांधीवादी एक्टिविस्ट (Gandhian activist) बताते हैं. वो एक संगठन खुदाई खिदमतगार के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं. फैसल का कहना है कि वो पांच दिनों तक ब्रजधाम की तीर्थयात्रा पर थे और उसी दौरान ये वाकया घटा. जानिए, कौन है ये शख्स, जो एकाएक सुर्खियों में है.

यहां से शुरू हुआ विवाद 
आगे बढ़ने से पहले एक बार मामला समझते चलते हैं. असल में 29 अक्टूबर को 4 मुस्लिम युवकों ने मंदिर में नमाज पढ़ उसकी तस्वीरें पोस्ट कीं. ये तस्वीरें वायरल हो गईं. इसके बाद आनन-फानन FIR दर्ज करके युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया. इन युवकों में से एक का कहना है कि मंदिर दर्शन के दौरान नमाज का समय हो जाने पर वहीं के लोगों ने उनसे परिसर में ही नमाज पढ़ लेने को कहा.

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फैसल के मुताबिक लोगों ने कहा कि आप पहले से ही भगवान के घर में हैं इसलिए आपको कहीं और जाने की क्या जरूरत. लोगों और पुजारी के भी ऐसा कहने पर फैसल समेत बाकी मुस्लिम युवकों ने बात मान ली और वहीं नमाज पढ़ी.



मथुरा के मंदिर में मुस्लिम युवकों के नमाज पढ़ने की घटना पर विवाद गहरा गया है


इन धाराओं के तहत गिरफ्तारी 
इसकी तस्वीरें जल्दी ही वायरल हो गईं, तब जाकर ये मामला उछला और चारों युवकों पर धारा 153-A (विभिन्न समुदायों के बीच धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने, 295 (किसी धर्म का अपमान करने के इरादे से प्रार्थना की जगह को अशुद्ध करना), और 505 (सार्वजानिक शरारत) के तहत केस दर्ज हुआ. अब फैसल की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.

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फैसल की संस्था ने किया उनका बचाव
फैसल की गिरफ्तारी के बाद खुदाई खिदमतगार नामक संस्था ने आधिकारिक बयान जारी किया. संस्था का कहना है कि संयोजक फैसल खान गोवर्धन की प्राचीन चौरासी कोसी यात्रा में भाग ले रहे थे. इसी दौरान नमाज का समय पड़ने पर ऐसा हुआ. संस्था के मुताबिक फैजल खुद गांधीवादी हैं, और जिस संस्था से जुड़े हैं, उसका काम ही सांप्रदायिक सौहाद्र बढ़ाना है. तब ऐसी किसी कोशिश का सवाल ही नहीं आता है.

अब्दुल गफ्फार खान ने जीवन का तीन दशक से भी ज्यादा समय जेल में गुजारा


आजादी से पहले बना था संगठन
जो संस्था फैसल की पैरवी कर रही है, उसकी स्थापना साल 1929 में खान अब्दुल गफ्फार खान ने की. उन्हें फ्रंटियर गांधी भी कहते थे. यही वजह है कि ये आंदोलन गांधीजी की अहिंसा से प्रेरित रहा. खुदाई खिदमतगार एक फारसी शब्द है जिसका हिन्दी में अर्थ होता है ईश्वर की बनायी हुई दुनिया के सेवक. आजादी से पहले संस्था की एक्टिविटी पाकिस्तान (अब) के खैबर पख्तूनख्वा में होती थी.



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ड्रेस कोड भी था
इसके सदस्यों का ड्रेस कोड था. पुरुष लाल रंग की शर्ट और महिलाएं काले कपड़े पहनती थीं. वे भारत की आजादी चाहते थे लेकिन बंटवारे के सख्त खिलाफ थे. अब्दुल गफ्फार खान की लोकप्रियता बढ़ने के बाद डरी हुई अंग्रेज सरकार ने उन्हे गिरफ्तार कर लिया. इससे गुस्साए समर्थकों ने आंदोलन किया, जिसपर उन्हें भी हिंसा झेलनी पड़ी.

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देश ने दिया भारत रत्न
अब्दुल गफ्फार खान ने अपने जीवन का तीन दशक से भी ज्यादा समय जेल में गुजारा. और नजरबंदी में ही पाकिस्तान के पेशावर में उनकी मौत हुई. बता दें कि देश के बंटवारे पर खान को इतना गुस्सा था कि उन्होंने पख्तून प्रांत के अलग हिस्सा होने की मांग की थी. साल 1987 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मनित किया गया.

फैसल की फेसबुक प्रोफाइल में इस तरह की तस्वीरें काफी हैं- (Photo- Facebook)


दशकभर पहले ही दोबारा संगठन पर काम
देश की आजादी के साथ खुदाई खिदमतगार संस्था लगभग बंद हो गई, जिसे साल 2011 में फैसल खान ने दोबारा जिंदा दिया. ये वही युवक है, जिन्होंने मंदिर में नमाज पढ़ी. फैसल के पक्ष में आई संस्था का कहना है कि वे एक दशक से लगातार हिंदू-मुस्लिम एकता पर काम कर रहे हैं. और इसी के तहत कृष्ण नगरी के दर्शन को निकले थे.

कैसी है फैसल की फेसबुक प्रोफाइल
इस बारे में संस्था फैसल की फेसबुक प्रोफाइल का भी हवाला दे रही है. प्रोफाइल में मुख्य तस्वीर में फैसल किसी हिंदू परिवार में खाना खा रहे हैं, ऐसा दिखता है. साथ ही पुजारी की वेशभूषा में भी कोई उनके पास बैठा हुआ है. आगे बढ़ने पर दिखता है कि फैसल ने खुद ही अपने वॉट्सएप स्टेट्स में मंदिर में नमाज का जिक्र किया है. वे लिखते हैं कि जुहर की नमाज का वक्त होने पर खुद मुख्य पुजारी ने उन्हें वहीं नमाज पढ़ लेने को कहा. हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है. वैसे फैसल खुद को कृष्ण भक्त कहते हैं और एकाध तस्वीर में वो तिलक लगाए पूजा करते भी दिख रहे हैं.
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