क्या है फर्जी Oximeter एप, जो डाटा चोरी के अलावा मरीजों की जान से कर रहा खिलवाड़

ऑक्सीमीटर  डिवाइस खून में ऑक्सीजन की मात्रा बताती रहती है- सांकेतिक फोटो

ऑक्सीमीटर डिवाइस खून में ऑक्सीजन की मात्रा बताती रहती है- सांकेतिक फोटो

कोरोना संक्रमित के खून में ऑक्सीजन का प्रवाह बताने वाली डिवाइस ऑक्सीमीटर (Oximeter to detect blood oxygen level) को बहुत से लोग इंटरनेट से डाउनलोड कर रहे हैं. ये नकली भी हो सकता है, जो न केवल बायोमैट्रिक डिटेल चुरा (biometric detail theft) सकता है, बल्कि मरीज की सही हालात की जानकारी भी नहीं होने देगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:39 PM IST
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होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना संक्रमितों के लिए विशेषज्ञ लगातार कई सलाहें दे रहे हैं. इन्हीं में से एक है ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल. बता दें कि ये पोर्टेबल डिवाइस खून में ऑक्सीजन की मात्रा बताती रहती है. इससे ऑक्सीजन की कमी के हालात में समय रहते डॉक्टरी मदद मिल सकती है. हालांकि ऑक्सीमीटर डिवाइस खरीदने की बजाए बहुत से लोग मोबाइल पर ऑक्सीमीटर डाउनलोड कर रहे हैं. ये फेक हो सकता है, और ये भी हो सकता है कि इसके इस्तेमाल से आपका सारा जरूरी डाटा गलत हाथों तक पहुंच जाए.

पहले दौर में ऑक्सीमीटर का जिक्र बढ़ा 

साल 2020 में ही सरकार ने ऑक्सीमीटर मोबाइल एप को लेकर अलर्ट जारी किया था. ये महामारी का पहला दौर था, जब पहली बार ही लोगों को ऑक्सीमीटर की जरूरत महसूस हुई. दुकानों से ऑक्सीमीटर खरीदे जाने लगे, वहीं बहुत से लोगों ने मोबाइल पर इसका एप डाउनलोड कर लिया. तभी केंद्र सरकार की साइबर यूनिट ने ट्वीट करते हुए इसे लेकर एडवायजरी जारी की, जिसमें इसके खतरों को लेकर अलर्ट किया गया.

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क्यों किया गया सचेत 

एडवायजरी में कहा गया कि यूजर्स को अज्ञात यूआरएल से ऑक्सीमीटर एप डाउनलोड नहीं करना चाहिए. ये एप भले ही ऑक्सजीन स्तर की जांच का दावा करें लेकिन ये नकली हो सकते हैं. इसे डाउनलोड करते ही यूजर की निजी जानकारी समेत, बायोमैट्रिक डिटेल तक चोरी हो सकती है. साइबर सेल ने ये बात कई शिकायतों के आधार पर की.



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ऑक्सीमीटर देखने में कपड़ों पर लगाने वाली क्लिप की तरह होता है (Photo- news18 English via Reuters)


अंगुलियों के निशान की चोरी 

बता दें कि बायोमैट्रिक डिटेल, जिसमें अंगुलियों या अंगूठे का प्रिंट होता है, ये हमारी सबसे खुफिया जानकारियों में से है. इसके चोरी जाने और गलत हाथों में पड़ने पर इसका दुरुपयोग न केवल बैंक से पैसे उड़ाने, बल्कि हमारी पहचान के गलत इस्तेमाल में भी हो सकता है. यानी यूजर केवल एक गलत एप डाउनलोड करने पर भारी मुसीबत में फंस सकता है. यही देखते हुए सरकार ने एडवायजरी निकाली.

बाजार में भी फेक मशीन 

इस बीच कई अलग ही तरह के मामले दिखे. ऑक्सीमीटर की बढ़ी हुई मांग के बीच दुकानों में भी फेक ऑक्सीमीटर की बाढ़ आ गई. लगभग 400 रुपए से मिलने वाली ये डिवाइस बिल्कुल असल की तरह दिखने के बाद भी नकली होती है और इसे खरीदना केवल पैसे बर्बाद करना नहीं, बल्कि मरीज की जान से खिलवाड़ भी है.

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मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है 

फर्जी मशीन केवल इंसानी शरीर में खून में ऑक्सीजन का स्तर नहीं बताती, बल्कि ये किसी भी निर्जीव चीज का ऑक्सीजन स्तर बता पाती है, जैसे टूथब्रश, कागज या फिर पेंसिल. इन ऑक्सीमीटर में पहले से ही दो-चार रीडिंग्स डली होती हैं, जो डिस्प्ले में दिखाने लगती हैं. ऐसे में होम आइसोलेशन पर रहता मरीज अगर इस फेक ऑक्सीमीटर की रीडिंग पर यकीन करे तो उसकी स्थिति जानलेवा होने पर भी उसे पता नहीं चलेगा.

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ऑक्सीमीटर एप डाउनलोड करने से पहले अच्छी तरह से पड़ताल कर लेनी चाहिए- सांकेतिक फोटो (pixabay)


क्यों है पड़ताल जरूरी 

यही कारण है कि आंख मूंदकर कोई भी आक्सीमीटर मशीन या ऑक्सीमीटर एप डाउनलोड करने से पहले अच्छी तरह से पड़ताल कर लेनी चाहिए. कोशिश करें कि किसी ठीक ब्रांड की डिवाइस लें ताकि कोई गड़बड़ी न हो. वैसे ऑक्सीमीटर लेने के बाद एक बार उसके इस्तेमाल और खून मे ऑक्सीजन के सही स्तर की जानकारी भी रहनी चाहिए.

कैसे काम करती है डिवाइस

देखने में ये कपड़ों पर लगाने वाली क्लिप की तरह होता है, जिसे अंगुली में फंसाया जाता है, लेकिन इससे पहले इसे ऑन करते हैं. चूंकि ये डिस्प्ले मशीन होती है तो तुरंत ही इसकी स्क्रीन पर ऑक्सीजन का स्तर दिखने लगता है. साथ में मरीज की पल्स यानी नब्ज का स्टेटस भी दिखता है. कोरोना के मरीज कुछेक घंटों पर लगातार ये लेते रहें, तो उन्हें पता रहता है कि उनके लंग्स ठीक तरह से काम कर रहे हैं.

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कब हो जाएं अलर्ट 

कोरोना संक्रमित लेकिन इसके अलावा स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में ऑक्सीजन का सैचुरेशन लेवल 95 से 100 फीसदी के बीच होता है. 95 फीसदी से कम ऑक्सीजन लेवल इस बात का संकेत है कि उसके फेफड़ों में परेशानी हो रही है. ऑक्सीजन का स्तर अगर 94 से नीचे जाने लगे तो सचेत हो जाना चाहिए और अगर ये स्तर 93 या इससे नीचे हो जाए तो मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए क्योंकि ये संकेत है कि उसके शरीर की 8 फीसदी तक कोशिकाएं ऑक्सीजन का प्रवाह नहीं कर पा रही हैं.
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