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भूतिया फिल्मों के शहंशाह 7 रामसे बदर्स में कोई भाई प्रोडक्शन एक्सपर्ट था तो कोई साउंड और राइटिंग का

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Updated: September 19, 2019, 12:22 PM IST
भूतिया फिल्मों के शहंशाह 7 रामसे बदर्स में कोई भाई प्रोडक्शन एक्सपर्ट था तो कोई साउंड और राइटिंग का
रामसे ब्रदर्स और हॉरर फिल्में एक दूसरे के पर्याय बन गए थे

भूतिया-हॉरर फिल्मों (Horror Movies) के शहंशाह 7 रामसे बदर्स (Ramsay Brothers) में कोई भाई प्रोडक्शन एक्सपर्ट था तो कोई साउंड और राइटिंग का. ये भाई शायद ही कभी बाहर के कोई फिल्म यूनिट लेते थे. प्रोडक्शन से लेकर रिलीज तक का काम वो खुद करते थे. उनकी बीवियां भी इसमें हिस्सा बंटाती थीं.

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आप देश में कहीं भी रामसे ब्रदर्स (Ramsay Brothers) का नाम लीजिए तो तुरंत लोग उन्हें पहचान लेंगे. जवाब होगा-वहीं हॉरर फिल्मों (Horror Movies) वाले रामसे ब्रदर्स. रामसे ब्रदर्स और हॉरर फिल्म इस देश में एक दूसरे के पूरक हो गए थे. आजादी के बाद रामसे परिवार कराची से मुंबई आया. फिर देखते ही देखते सातों भाइयों ने फिल्म के सारे डिपोर्टमेंट संभाल लिये. हर भाई फिल्म की किसी ना किसी विधा का विशेषज्ञ बन गया. कोई अच्छा डायरेक्टर तो कोई प्रोड्यूसर, कोई एडीटर तो कोई राइटर ..कोई तकनीक मामलों का जानकार तो कई उम्दा सिनेमेटोग्राफर.

60 औऱ 70 के दशक में जब रामसे ब्रदर्स फिल्में बनाते थे तो उन्हें बाहर से यूनिट के लिए किसी की जरूरत नहीं पड़ती थी. हर कोई उनके परिवार का ही होता था, जो फिल्म प्रोड्कशन से जुड़ा कोई ना कोई विभाग संभाल लेता था. यहां तक सात रामसे ब्रदर्स की बीवियां भी उनकी यूनिट से जुड़ी होती थीं. उसमें कोई यूनिट के खाने का जिम्मा संभाल रही होती थी तो कोई डिजाइनर का काम करती थी कोई व्यवस्था का काम संभालती थी.

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ये कहा जाता था कि जब रामसे ब्रदर्स फिल्म बनाते हैं तो उन्हें केवल कलाकारों के अलावा किसी की जरूरत नहीं होती थी. ये बात काफी हद तक सही थी. 80 के दशक तक रामसे ब्रदर्स की हॉरर फिल्मों का जलवा खूब चला लेकिन फिर ये हल्का पड़ने लगा.

30 से ज्यादा हिट हॉरर फिल्में
रामसे ब्रदर्स ने 30 से ज्यादा हिट हॉरर फिल्में बनाई. जितनी फिल्में बनाईं वो सभी कम बजट की थीं. बॉलीवुड में जब भी कभी हॉरर फिल्मों की बात की जाएगी तो वो बगैर इस परिवार के अधूरी रहेगी. उनकी पहली फिल्म दो गज जमीन के नीचे थी.

रामसे ब्रदर्स को फिल्म बनाने के लिए किसी बाहरी एक्सपर्ट की जरूरत नहीं पड़ती थी. उनका हर भाई किसी ना किसी विधा का विशेषज्ञ था, जिसकी फिल्म निर्माण में जरूरत पड़ती है

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जिसने फिल्मी दुनिया में हॉरर फिल्म की सफलता के झंडे गाड़ दिये. ये फिल्म जब बनी तब कहा जाता था कि बॉलीवुड की कोई भी फिल्म एक साल और 50 लाख रुपए से कम में नहीं बनती लेकिन ये केवल 40 दिनों में साढ़े तीन लाख रुपए में बनी. इस फिल्म में 45 लाख रुपए का फायदा कमाया.

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एक्टर्स से अपने कपड़े खुद लाने को कहा
इस फिल्म के बारे में कहा जाता है कि सभी सात रामसे ब्रदर्स अपनी बीवियों, पेरेंट्स और एक छोटे से फिल्म क्रू के साथ दो बसों में बैठी और ये महाबलेश्वर के एक सरकारी गेस्ट हाउस में पहुंची. जहां आठ कमरे उन्होंने किराये पर लिये. इसी में सारी शूटिंग पूरी हुई. कोई सेट भी नहीं बनाया गया. उन्होंने एक्टर्स के लिए कोई कपड़े भी डिजाइन नहीं कराए बल्कि एक्टर से अपने कपड़े खुद लाने को कहा. कैमरे किराए पर लाए गए थे.
जैसे ही ये फिल्म रिलीज हुई, ये हाउसफुल हो गई. रामसे ब्रदर्स की फिल्में आमतौर पर सेक्स और भूत-प्रेतों के कांबिनेशन के तौर पर याद की जाती थीं.

रेडियो की दुकान से फिल्मों तक
रामसे ब्रदर्स के पिता फतेहचंद यू रामसिंघानी कराची में एक रेडियो की दुकान चलाते थे. जब वो मुंबई आए तो उन्होंने अपने नाम के आगे रामसे जोड़ा. वहां उन्होंने फिल्मों में हाथ आजमाने का फैसला किया. उन्होंने शुरुआती दो तीन फिल्में हॉरर नहीं बनाईं थीं लेकिन जब ये अच्छी चलीं तो उन्होंने हॉरर फिल्मों के साथ ही जुड़े रहने का फैसला किया.

रामसे ब्रदर्स ने पहली हॉरर फिल्म "दो गज जमीन के नीचे" बनाई, ये जबरदस्त हिट रही


बीवियां यूनिट के खाने का डिपार्टमेंट देखती थीं
70 और 80 के दशक में रामसे बंधुओं का नाम सफलता का पर्यात था. रामसे ब्रदर्स में आमतौर पर सभी सात भाई प्रोडक्शन से रिलीज तक काम संभालते थे. उनमें कोई प्रोड्यूसर था तो कोई डायरेक्टर था. ये भाई म्युजिक कंपोजिंग, कैमरा मैन, एडीटिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग के साथ पोस्ट प्रोडक्शन में उस्ताद थे. बल्कि ये केवल फिल्म ही नहीं बनाते थे बल्कि फिल्म ड्रिस्ट्रीब्यूशन का काम भी करते थे. जब भी रामसे ब्रदर्स फिल्में बनाते थे तो उनकी बीवियां यूनिट के खाने से लेकर मेकअप और कास्ट्यूम डिजाइनिंग का काम संभालती थीं.

रामसे ब्रदर्स की एक पुरानी हॉरर फिल्म पुराना दरवाजा का पोस्टर


अब टूटने लगा है तिलिस्म
रामसे बंधुओं में तुलसी रामसे की मृत्यु दो तीन साल पहले हो गई थी जबकि श्याम रामसे का निधन 18 सितंबर को हुआ. इसके अलावा रामसे बंधुओं में कुमार, केशु, किरन, गांगुली और अर्जुन रामसे भी शामिल हैं. अधिकतर फिल्मो में निर्देशन का काम तुलसी और श्याम ने संभाला तो स्टोरी और स्क्रीनप्ले का काम कुमार रामसे, प्रोडक्शन डिजाइन का काम अर्जुन ,सिनेमेटोग्राफी का काम गांगुली रामसे और केशु रामसे ने म्य़ुजिक और साउंड का काम किरन रामसे ने संभाला.
अब तो रामसे ब्रदर्स की तीसरी और चौथी पीढ़ी भी आ गई है. इनमें से कुछ फिल्म निर्माण से जुड़े हैं तो कुछ अलग क्षेत्रों में भाग्य आजमा रहे हैं. दरअसल 90 के दशक के बाद रामसे ब्रदर्स का तिलिस्म टूटने लगा और उनकी फिल्में फ्लॉप होने लगीं थीं.

1990 में लोगों का रुझान कम होने की वजह से उन्होंने बी Grade की कई हॉरर फिल्में बनाईं. अब नई तकनीक और बदले रुझान के साथ इंटरनेट पर फिल्मों के प्रसार के बाद उनकी फिल्मों का बाजार खत्म हो गया. रामसे ब्रदर्स का ग्राउंड फ्लोर ऑफिस पिछले 18 सालों से कहीं ज्यादा समय से बंद पड़ा है. फिर भी हम मान सकते है हिंदी हॉरर फिल्मों का अकेला शहंशाह घराना रामसे ब्रदर्स ही हैं.

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First published: September 18, 2019, 4:54 PM IST
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