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कृषि कानून में वो 8 संशोधन जिनके लिए सरकार तैयार होती दिख रही और किसानों की मांगें

किसान कर रहे हैं आंदोलन. (PIC- AP)
किसान कर रहे हैं आंदोलन. (PIC- AP)

Farmer Protest: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ किसानों के प्रतिनिधिमंडल की गुरुवार को हुई बैठक भी बेनतीजा रही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 8, 2020, 2:10 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार की ओर से लाए गए 3 कृषि कानूनों (Farm Laws) के विरोध में किसानों का आंदोलन (Farmer Protest) जारी है. शुक्रवार को किसानों के आंदोलन का 9वां दिन है. किसान दिल्‍ली कूच करने के लिए सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं. इन किसानों की मांग है कि सरकार सभी 3 कृषि कानूनों को वापस ले. इसके साथ ही वे न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य यानी एमएसपी को लेकर भी विश्‍वास चाहते हैं. गुरुवार को किसानों और सरकार के बीच एक और बैठक हुई थी. इसके बाद इस तरह के संकेत मिले हैं कि सरकार कृषि कानूनों को तो वापस लेने की मांग नहीं मान रही है. लेकिन कुछ ऐसी मांगें हैं जिन पर सरकार तैयार होती दिख रही है.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ किसानों के प्रतिनिधिमंडल की गुरुवार को हुई बैठक भी बेनतीजा रही. लगभग आठ घंटे चली इस बैठक में किसान नेता नए कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग पर अड़े रहे. हालांकि कुछ मुद्दों पर दोनों के बीच सहमति दिखाई दी. किसानों की ओर से लिखित में सरकार को अपनी मांगे और आपत्ति सौंपी गई. सरकार ने कृषि कानूनों में 8 मुद्दों पर संशोधन के लिए विचार करने का प्रस्ताव रखा, जिसे किसानों ने ठुकरा दिया.

1. 3 नए कृषि कानूनों पर किसान एमएसपी को लेकर अधिक परेशान हैं. हालांकि सरकार ने किसानों को यह भरोसा जताया है कि नए कानून से एमएसपी पर कोई असर नहीं होगा.



2. केंद्र सरकार किसानों की चिंता दूर करने के लिए एमएसपी को सशक्त बनाने का कदम उठाते हुए कुछ अन्‍य फसलों को भी इसके दायरे में ला सकती है.


3. यह भी बात सामने आ रही है कि एपीएमसी सिस्टम को भी कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा. मौजूदा मंडी सिस्टम जारी रहेगा और बाहरी मंडी का भी विकल्‍प मौजूद रहेगा.

4. प्राइवेट मंडी को भी कानून के दायरे में लाया जा सकता है.

5. किसानों की एक चिंता न्‍यायिक अधिकार को भी लेकर है. मौजूदा समय में एसडीएम और ट्रिब्यूनल तक ही अपील की इजाजत है. किसान इसे सिविल कोर्ट तक ले जाने की बात कह रहे हैं. ऐसे में सरकार की ओर से इस पर भी विचार हो सकता है.

6. यह भी कहा जा रहा है कि अगर कोई व्यापारी प्राइवेट मंडी में आता है तो उसके लिए रजिस्ट्रेशन सुविधा हो. ऐसे में सिर्फ पैन कार्ड से काम न चलाया जाए. इस पर भी सरकार विचार कर सकती है.

7. सरकार किसानों की आशंकाओं के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर खुले दिमाग से वार्ता करने और विचार करने को सहमत है. इनमें प्रस्तावित निजी मंडियों के साथ कर समरूपता जैसे पहलू भी शामिल हैं.

8. सरकार एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद प्रक्रिया को जारी रखने, सुधारने और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है.

'वैध चिंताओं पर गौर किया जाएगा'
गुरुवार को सरकार ने बातचीत के लिए पहुंचे विभिन्न किसान संगठनों के 40 किसान नेताओं के समूह को आश्वासन दिया कि उनकी सभी वैध चिंताओं पर गौर किया जाएगा और उन पर खुले दिमाग से विचार किया जाएगा. लेकिन दूसरे पक्ष ने कानूनों में कई खामियों और विसंगतियों को गिनाते हुए कहा कि इन कानूनों को सितंबर में जल्दबाजी में पारित किया गया.

'आगे की बैठकों में भाग नहीं लेंगे'
एआईकेएससीसी (अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति) के कार्यकारी सदस्य तथा महाराष्ट्र और गुजरात के किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोक संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष प्रतिभा शिंदे ने कहा, 'हमारी ओर से वार्ता खत्म हो गयी है. हमारे नेताओं ने कहा है कि अगर सरकार द्वारा आज (गुरुवार) कोई समाधान नहीं दिया जाता है तो वे आगे की बैठकों में भाग नहीं लेंगे.' एक अन्य किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि सरकार ने एमएसपी और खरीद प्रणाली सहित कई प्रस्ताव रखे हैं, जिन पर शनिवार को सरकार के साथ अगली बैठक से पहले किसान संगठनों के साथ चर्चा होगी.

एआईकेएससीसी के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि यूनियनों की मुख्य मांग उक्त तीन कानूनों को निरस्त करने की है और सरकार ने किसान नेताओं द्वारा बताई गई 8-10 विशिष्ट कमियों को भी सुना है. उन्होंने कहा, 'हम कोई संशोधन नहीं चाहते हैं. हम चाहते हैं कि इन कानूनों को निरस्त किया जाए.'
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