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डाइटिंग के अलावा और क्या हैं उपवास रखने के फायदे, चूहों पर हुए प्रयोग ने बताया

डाइटिंग के अलावा और क्या हैं उपवास रखने के फायदे, चूहों पर हुए प्रयोग ने बताया

वैज्ञानिकों ने चूहों (Mice) को अलग अलग प्रकार की खुराक पर रख कर उनका अध्ययन किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वैज्ञानिकों ने चूहों (Mice) को अलग अलग प्रकार की खुराक पर रख कर उनका अध्ययन किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

चूहों (Mice) पर हुए शोध में पाया गया है कि केवल कम कैलोरी वाली खुराक (Low calorie Diet) ही फायदेमंद नहीं होती. दो खुराकों के बीच उपवास (Fasting) जैसा समय कितना है, यह ज्यादा मायने रखता है.

    कम भोजन (Less Eating) करना हमेशा फायदेमंद ही माना गया है. भारत जैसे देश की हिंदू संस्कृति में उपवास की परंपरा है. मुस्लिम समुदाय में रोजे के सेहत के मामले में बहुत फायदे बताए जाते हैं. लेकिन चूहों पर हुए शोध ने भी इसी धारणा की पुष्टि की है. इस अध्ययन में पाया गया है कि कुतरने वाले जीवों (Rodents) को भी कम खाने का फायदा मिला है. इससे उनकी सेहत और उम्र लंबी होती है. शोधकर्ताओं ने चूहों (Mice) की अलग अलग खुराकों पर अध्ययन किया और पाया कि एक दिन में एक ही खुराक में कम कैलोरी (Low Calorie food) खाने वाले चूहे लंबा जीवन जीते हैं.

    बेहतर मेटाबॉलिज्म
    इस दिलचस्प अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि एक ही दिन में बार-बार कम कैलोरी की खुराक लेने वाले चूहों की की तुलना में एक ही बार कम कैलोरी की खुराक वाले चूहे ज्यादा जीते हैं. नेचर मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित इस अध्ययन में दर्शाया गया है कि जो चूहे दिन में एक ही बार खाते हैं उनका मेटाबॉलिज्म बेहतर पाया गया है.

    पहले से पता यह तो
    वैज्ञानिक करीब एक सदी से यह बात जानते हैं कि सीमित कैलोरी वाली खुराक कुतरने वाले जीवों का जीवन लंबा करती है. लेकिन चूहों पर और कैलोरी सीमित करने वाले हुए इससे पहले के अध्ययनों में उनकी खुराक को दिन में एक बार भोजन करने तक सीमित रखा था. शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में तय किया कि वे यह पता लगाएंगे कि क्या खाना खाने के समय में अंतर की कोई भूमिका भी है या नहीं.

    तो नया क्या पता चला
    शोधकर्ताओं ने पाया कि वास्तव में भोजन की मात्रा ही मायने नहीं रखती है. इसके बजाय कैलोरी सीमित करने वाली खुराक यह सुनिश्चित करती है कि चूहे दिन में ज्यादा समय तक भूखे रहें. इसके साथ ही भूखे रहने की मियाद तय करने के भी जीवन और सेहत के लिए फायदे हैं. शोधकर्ताओं ने चूहों को अलग अलग खुराकों पर रखा, जिसमें कंट्रोल समूह के पास नियमित भोजन की असीमित पहुंच थी.

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    चूहों (Mice) मामले में पाया गया कि एक बार की खुराक लेने वालों का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    बार बार से एक ही बार बेहतर
    इसके अलावा दो अन्य समूहों में 30 प्रतिशत कैलोरी उपलब्ध थी, एक में जहां कम कैलोरी वाला भोजन दिया गया और दूसरे में 30 प्रतिशत कैलोरी वाला भोजन एक बार में देकर 21 घंटे तक बिना भोजन के रखा गया. अध्ययन दर्शाता है कि दो बार के भोजन के बीच 21 घंटे तक सीमित कैलोरी की  खुराक वाले चूहे उन चूहों से डेढ़ साल ज्यादा जिए जो दिन में कभी भी कितना भी भोजन करते थे.

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    सीमित कैलोरी ही काफी नहीं
    दूसरी तरफ लगातार कम कैलोरी वाली खुराक खाने वाले चूहे कम कैलोरी वाला भोजन करने के बावजूद कंट्रोल समूह की तुलना में कम जीवन जिए सीमित कैलोरी खुराब के लाभ हासिल करने किले उपवास काल की सीमा लगाना आवश्यक है.  वहीं जो समूह कंट्रोल समूह जितना ही खाना खाने के लिए ट्रेन किया गया था, उसे हर तीन घटों मे ही खाना दिया गया. इन के अध्ययन  से पता चला कि कम भोजन करने का कैलोरी कम या ज्यादा लेने से कोई लेना देना है. दोनों ही तरह के समूहों को एक ही तरह के लाभ हुए.

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    कम कैलोरी डाइट (Low Calorie Diet) से ज्यादा दो खुराक के बीच का समय ज्यादा अहम है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    दो खुराकों के बीच ज्यादा समय फायदेमंद
    शोधकर्ताओं का कहना है कि जहां इंसानों पर हुए  कम समय वाले अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि दिन में चार से आठ घंटों तक भोजन नहीं लेने के कुछ फायदे दिखते हैं, इसके लंबे समय के असर का पता नहीं है. वे मानते है कि आज भी दिन में उपवास रखने का सही समय स्पष्ट नहीं है.

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    इस अध्ययन के नतीजे इंसानी पर पूरी तरह से लागू होते हैं इस पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एमआरसी मैटाबॉलिक डिजीज यूनिट के निदेशक स्टीफन ओ राहिली, जो इस अध्ययन में शामिल नहीं थे, सहमत नहीं है. उनका मानना है कि चूहों और मानवों की खाना पचाने की प्रक्रिया की गति में बहुत ज्यादा अंतर है, इसलिए इन नतीजों को मानव पर लगाना मुश्किल होगा. फिर भी शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर इसे इंसानों के लिहाज से देखें तो सीमित कैलोरी वाला  भोजन दिन भर करने से लोग उपवास के फायदे तो निश्चित रूप से खो ही सकते हैं.

    Tags: Health, Research, Science

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