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जानें, चीन से निकले इस दूसरे जानलेवा वायरस को, भारत पर भी है खतरा

News18Hindi
Updated: March 24, 2020, 6:42 PM IST
जानें, चीन से निकले इस दूसरे जानलेवा वायरस को, भारत पर भी है खतरा
हंतावायरस पुराना वायरस है, जो आमतौर पर rodent प्रजाति के जानवर खाने से फैलता है

चीन (China) में घातक कोरोना वायरस (coronavirus) का संक्रमण लगभग खत्म हुआ तो एक नया वायरस आ गया है. हंता वायरस (hantavirus) नाम के इस जानलेवा वायरस से एक शख्स की जान जा चुकी है. इसके बाद से पूरे चीन में हड़कंप मच गया है.

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  • Last Updated: March 24, 2020, 6:42 PM IST
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चीन के वुहान शहर से लगभग ढाई महीने पहले रहस्यमयी वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है. लगभग 4 लाख लोग कोरोना पॉजिटिव दर्ज हो चुके हैं. फिलहाल बीमारी का केंद्र चीन से होता हुआ इटली और अमेरिका माना जा रहा है. ऐसे में एक नई खबर सामने आई है. आज ही चीन के मीडिया संस्थान Global Times ने ट्विटर पर बताया कि Yunnan प्रांत का रहने वाला एक शख्स hantavirus से संक्रमित पाया गया.

स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया गया कि काम से लौटते हुए बस में ही उस शख्स की मौत हो गई. बस में उसके साथ 32 लोग यात्रा कर रहे थे. इसके बाद आनन-फानन सारे सहयात्रियों को मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया, जहां उनका हंतावायरस के लिए टेस्ट हो रहा है. फिलहाल उनमें से कोई इस वायरस के लिए पॉजिटिव है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

ज्यादातर मामलों में मरीज की मौत हो जाती है


बता दें कि हंतावायरस पुराना वायरस है. साल 1990 की शुरुआत में सबसे पहले इस रहस्यमयी वायरस का पता चला. तब अरिजोना, कोलेरेडो, न्यू मैक्सिको और उटा में ये मामले दिखे. इस वायरस को वैज्ञानिकों ने Sin Nombre वायरस नाम दिया, जो कि हंतावायरस फैमिली का ही एक वायरस है. ये आमतौर पर rodent प्रजाति के जानवर खाने से फैलता है, जैसे चूहे, गिलहरी या गूंस. Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार इसके लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग-अलग तरह के होते हैं. यहां तक कि अलग-अलग देशों में इस वायरस के नाम भी अलग -अलग हैं जैसे अमेरिका में इसे न्यू वर्ल्ड हंतावायरस कहते हैं, जबकि यूरोप और एशियन देशों जैसे चीन में इसे ओल्ड वर्ल्ड हंतावायरस कहते हैं.



अलग-अलग देशों और महाद्वीपों में इस वायरस का असर भी अलग होता है. अमेरिका में इससे संक्रमित मरीज hantavirus pulmonary syndrome (HPS) का शिकार होते हैं. इस दौरान बुखार, थकान, उल्टियां और मांसपेशियों में दर्द होता है. रोग बढ़ने पर इसके लक्षण गंभीर हो जाते हैं और मरीज में खांसी, सांस रुकना जैसे लक्षण आ जाते हैं. फेफड़ों में पानी भर जाता है और ज्यादातर मामलों में मरीज की मौत हो जाती है. शुरुआती फेज में इलाज मिले तो भी इसमें बचने की दर सिर्फ 38% है. इस बीमारी का इनक्यूबेशन पीरियड अभी तक साफ नहीं हो सका है. लेकिन माना जाता है कि ये 1 हफ्ते से लेकर 8 हफ्तों तक हो सकता है. इसके बाद ही मरीज में लक्षण दिखाई देते हैं. सिर्फ चूहे खाने से ही ये बीमारी नहीं फैलती, बल्कि बीमार चूहे के फ्रेश यूरिन के संपर्क में आने या उसकी लार को छूने से ऐसा होता है.

बीमार चूहे के फ्रेश यूरिन के संपर्क में आने या उसकी लार को छूने से ऐसा होता है


दूसरी ओर यूरोप और एशियन देशों में इस बीमारी में मरीज hemorrhagic fever with renal syndrome (HFRS) से ग्रस्त हो जाता है और अंत में उसकी मौत हो जाती है. संक्रमित चूहे या गिलहरी के पेशाब, लार के संपर्क में आने या उसके संक्रमित खून के इंसानी शरीर के किसी जख्मी हिस्से से संपर्क होने पर हंतावायरस का संक्रमण होता है. शुरुआत में मरीज को सिरदर्द होता है और बुखार के साथ उल्टियां होती हैं. लगभग सारे लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते होते हैं. लेकिन रोग बढ़ने पर किडनी और लंग्स का फेल होना, हेपेटाइटिस, सेप्टीसीमिया और डेंगू जैसे लक्षण भी सामने आते हैं और मरीज की मौत हो जाती है. रोग का कोई इलाज नहीं है लेकिन चीन और साउथ कोरिया के वैज्ञानिकों का दावा है कि लक्षणों के शुरुआती दौर में बीमारी पकड़ में आ जाए (7 दिनों के भीतर) तो मौत की दर कम हो जाती है. हालांकि अबतक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

CDC का मानना है कि हंतावायरस इंसानों से एक-दूसरे में नहीं फैलता है, बल्कि चूहों, गूंस या गिलहरी को खाने, या उनके मल-मूत्र या सलाइवा के संपर्क में आने से फैलता है. लेकिन फिर निकलकर आया कि इनके काटने से भी ये बीमारी हो सकती है. यहां तक कि संक्रमित जीव के आसपास की हवा में भी ये वायरस रहते हैं और इससे भी इंसानों को ये बीमारी हो सकती है.

बीमारी बढ़ने पर मौत की दर बहुत ज्यादा है


साल 2011 के अंत तक यूएस के 32 स्टेट्स में इस वायरस के मामले पाए गए. इतने साल गुजरने के बाद भी इस वायरस की कोई वैक्सीन नहीं मिल सकी है. जो मरीज रोग की शुरुआती अवस्था में पहचान लिए जाएं, वे ICU में कुछ दिन रहकर ठीक हो सकते हैं लेकिन बीमारी बढ़ने पर मौत की दर बहुत ज्यादा है.

भारत में भी हंतावायरस के मामले आ चुके हैं. तमिलनाडु के वेल्लूर में साल साल 2008 में इसके 28 मरीज सामने आए. सारे ही मरीज किडनी और फेफड़ों के गंभीर इंफेक्शन से जूझ रहे थे. लगभग सभी रोगी Irula जनजाति के थे, जिनका पेशा था चूहे पकड़ना. इससे पहले देश में हंतावायरस का कोई मामला रिकॉर्ड में नहीं आया था. इन मामलों को Department of Clinical Virology ने देखा. हालांकि मरीजों के स्वास्थ्य के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी. इसके बाद साल 2016 में मुंबई में 12 साल का एक बच्चा इस वायरस का शिकार हो गया. हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार बच्चा कोलाबा का रहने वाला था और बीमारी के आखिरी चरण में पहुंच चुका था.

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First published: March 24, 2020, 6:39 PM IST
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