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अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन के पसंदीदा खिलौने की आज होगी नीलामी, जानें कौन सा है यह गेम और किसने किया ईजाद

News18Hindi
Updated: March 6, 2020, 1:18 PM IST
अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन के पसंदीदा खिलौने की आज होगी नीलामी, जानें कौन सा है यह गेम और किसने किया ईजाद
महान वैज्ञानिक अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन के पसंदीदा खेल मोजेक पर्ल गेम की आज न्‍यूयॉर्क में नीलामी होने वाली है.

महान वैज्ञानिक अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन (Albert Einstein) को पहेलियां, बिल्डिंग ब्लॉक्स जैसे गेम्‍स काफी पसंद थे. उन्‍होंने पसंदीदा 'मोजेक पर्ल गेम' (Mosaic Pearl Game) को जीवनभर अपने साथ रखा. इसे जर्मनी के कॉनमन मोजेक (Konemann Mosaic) ने इजाद किया था. आज न्‍यूयॉर्क में इसकी नीलामी (Auction) होने वाली है.

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न्यूयॉर्क. अल्बर्ट आइंस्टीन के पसंदीदा खिलौने (Toy) की आज नीलामी होगी. माना जा रहा है कि यह खिलौना 42.96 लाख रुपये में बिकेगा. ऑक्‍शन वेबसाइट के मुताबिक, आइंस्‍टीन (Albert Einstein) ने अपने पसंदीदा 'मोजेक पर्ल गेम' (Mosaic Pearl Game) को जीवनभर अपने साथ रखा. इस गेम को 18 अप्रैल 1955 में उनके निधन के बाद एक दोस्‍त को गिफ्ट कर दिया गया. ये गेम जापान के टोक्यो (Tokyo) के मित्सुओ आइडा संग्रहालय में 2005 से 2006 तक प्रदर्शनी में रखा गया था. अब इसकी नीलामी (Auction) की जा रही है. आइए जानते हैं कि दुनिया को सापेक्षता का सिद्धांत (Theory of Relativity) देने वाले आइंस्‍टीन का पसंदीदा गेम है क्‍या और किसे कैसे खेला जाता है...

जर्मनी के कॉनमन मोजेक ने इजाद किया था ये गेम
मोजेक पर्ल गेम को 1870 जर्मनी (Germany) के रुडॉलस्‍टड में कॉनमन मोजेक (Konemann Mosaic) ने ईजाद किया था. इस गेम में 520 रंगीन मोती (Pearls) या छोटी बॉल होती हैं, जिन्हें पैटर्न बनाने के लिए पंच-होल फ्रेम (Punch-hole Frame) में रखा जाता है. इस पूरे गेम को एक लकड़ी के बॉक्‍स में रखा जाता है. आइंस्‍टीन के इस खिलौने की विक्रेता गैलरी बोन्हम्स (Bonhams) ने बताया कि आइंस्टीन का यह गेम संग्रह किए जाने लायक है. ये कंप्‍यूटर व मोबाइल गेम के मौजूदा दौर में बच्‍चों और युवाओं के लिए सीखने का सबसे शानदार गेम है. आइंस्‍टीन की बहन मेजा एप्सिस्टीन ने बताया कि अल्बर्ट ने बचपन में जो भी गेम खेले, वे उनकी क्षमताओं के बारे में बताते हैं. इनमें ज्यादातर पहेलियां, बिल्डिंग ब्लॉक्स शामिल थे.

अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन को संगीत का भी काफी शौक था. इसका जिक्र हास्‍य कलाकार चार्ली चैपलिन की आत्‍मकथा में भी किया गया है.




बहन मेजा ने बताया, आइंस्‍टीन को था संगीत का शौक


एप्सिस्टीन ने बताया कि मोजेक पर्ल गेम का उनके शुरुआती विकास में अहम योगदान रहा. उन्‍होंने बताया कि आइंस्‍टीन को म्यूजिक (Music) का शौक भी था. आइंस्‍टीन को समुद्री यात्रा या वायलिन बजाते समय मोजे (Socks) पहनने पसंद नहीं थे. आइंस्‍टीन ने एक बार कहा था कि बचपन में मेरे पैर के अंगूठे से मेरे मोजों में छेद हो जाते थे. इसलिए मैंने मोजे पहनना बंद कर दिया. वह बहुत ही खराब म्‍यूजीशियन थे. चार्ली चैप्लिन (Charlie Chaplin) की आत्‍मकथा में एक जगह आइंस्‍टीन के संगीत प्रेम का जिक्र किया गया है. इसमें लिखा गया है कि वह अपने किचन में वायलिन बजाते थे. खाली समय में मोजार्ट सुनते थे.

जर्मनी छोड़ अमेरिका की प्रिंस्‍टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाया
महान वैज्ञानिक आइंस्‍टीन के भूलने की आदत को लेकर भी कई किस्‍से प्रसिद्ध हैं. बताया जाता है कि वह कई बार अपने घर का पता (Address) और अपना फोन नंबर तक भूल जाते थे. नाजी गतिविधियों के कारण जब उन्‍हें जर्मनी छोड़कर अमेरिका (America) आना पड़ा तो उन्‍होंने न्‍यू जर्सी के प्रिंस्‍टन यूनिवर्सिटी (Princeton University) में पढ़ाना शुरू कर दिया. एक दिन यूनिवर्सिटी से लौटते समय वह अपने घर का पता भूल गए. घर लौटने के लिए जिस टैक्‍सी में बैठे उन्‍होंने उसके ड्राइवर से पूछा कि क्या तुम्हें आइंस्‍टीन का पता मालूम है? इस पर ड्राइवर ने कहा कि हां, मुझे पता है. आप उनसे मिलना चाहते हैं तो मैं आपको उनके घर तक पहुंचा सकता हूं.

अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन ने एक पार्टी से निकलने के दौरान फोटोग्राफर के मुस्‍कराने के आग्रह पर जीभ बाहर निकालकर तस्‍वीर खिंचवाई.


'जो चीज किताब में ढूंढ सकता हूं, उसे याद क्‍यों रखूं'
आइंस्‍टीन की खराब यादाश्‍त को लेकर एक किस्‍सा और है. एक बार एक सहकर्मी ने उनसे उनका टेलीफोन नंबर पूछा. इस पर वह पास रखी टेलीफोन डायरेक्टरी में अपना नंबर ढूंढने लगे. इस पर सहकर्मी ने कहा कि आपको अपना टेलीफोन नंबर भी याद नहीं है. आइंस्‍टीन ने कहा कि मैं उस चीज को क्‍यों याद रखूं, जो मुझे किताब में ढूंढने से मिल जाती है. एक बार जब 1951 में आइंस्‍टीन पार्टी खत्‍म होने के बाद घर के लिए निकले तो एक फोटोग्राफर ने उनसे मुस्‍कराते हुए फोटो खिंचवाने का आग्रह किया. इस पर उन्‍होंने अपनी जीभ बाहर निकाल कर फोटो दिया. फोटोग्राफर ने यह यादगार लम्हा कैद कर लिया.

कमरे में टांगते थे महात्‍मा गांधी और श्‍वाइटज़र की तस्‍वीर
शुरुआती दौर में एक वैज्ञानिक के रूप में आइंस्‍टीन ने दो महान वैज्ञानिकों आइसैक न्‍यूटन और जेम्‍स मैक्‍सवेल को ही अपना आदर्श माना था. उनके कमरे में दोनों की पोर्ट्रेट लगी रहती थीं. हालांकि, अपने सामने दुनिया में तरह-तरह की हिंसक त्रासदी देखने के बाद आइंस्टीन ने दो नई तस्वीरें टांग दीं. इनमें एक महान मानवतावादी अल्बर्ट श्वाइटज़र और दूसरी महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की तस्‍वीर थी. आइंस्टीन ने उस समय कहा था, 'समय आ गया है कि हम सफलता की तस्वीर की जगह सेवा की तस्वीर लगा दें.' महात्मा गांधी के साथ-साथ श्वाइटज़र की तस्वीर पर उन्‍होंने कहा था कि पश्चिम में अकेले श्वाइटज़र ही हैं, जिनका इस पीढ़ी पर गांधी जैसा नैतिक प्रभाव पड़ा है. आइंस्टीन महात्मा गांधी से 10 साल छोटे थे. दोनों व्यक्तिगत रूप से कभी नहीं मिले, लेकिन एक बार दोनों के बीच पत्राचार हुआ था.

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First published: March 6, 2020, 1:18 PM IST
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