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नीला आसमां, चिडियों का कलरव और छतों पर जाना-लाकडाउन में कुछ अच्छी बातें

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: March 25, 2020, 5:33 PM IST
नीला आसमां, चिडियों का कलरव और छतों पर जाना-लाकडाउन में कुछ अच्छी बातें
नीला आसमान और ताजी हवा

कोरोना वायरस के चलते लाकडाउन से हमारी बिजी जिंदगी कुछ ठहर जरूर गई है लेकिन कुछ अच्छी बातें भी हो रही हैं-प्रदूषण खत्म हो गया है, हम परिवार को समय दे रहे हैं और चिड़ियों की चहचहाहट फिर सुनाई देने लगी है.

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  • Last Updated: March 25, 2020, 5:33 PM IST
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अभी जब मैं ये खबर लिख रहा हूं तो मेरे आसपास गौरेयों की जोरों की चहचहाहट सुनाई पड़ रही है. आसपास के पेड़ों से दूसरे पंक्षियों की आवाज, कोयल की कूक सुनाई पड़ने लगने है. बहुत दिनों बाद ऐसा हुआ है जब कानों में ये सारी आवाजें आ रही हैं. एक लंबे अर्से बाद जब छत पर गया तो वहां से आसमान एकदम साफ नीला नजर आया. हालांकि छत पर भी लंबे समय बाद ही गया था. जब घर की खिड़की खोली तो कई सालों बाद शहर की आबोहवा में ताजी हवा महसूस हुई.

यही नहीं घर के सामने सड़क से वाहनों की तेज आवाज जो हमेशा आती रहती थी, वो लगभग थम चुकी है. सड़क पर ना तो धुएं का गुबार है और ना ही प्रदूषण. हमारे तमाम शहरों के प्रदूषण मापने वाले यंत्र कई सालों बाद ये बता रहे हैं कि प्रदूषण खत्म हो गया है. हालांकि सड़कों पर घूमने वाले जानवर थोड़े सुस्त और हैरान से लगते हैं.

बहुत दिनों बाद लोगों की सुनसान रहने वाली छतें कुछ हद तक आबाद हो गई हैं. लोग अब छतों से एक दूसरे से बातें भी कर ले रहे हैं, जो कभी पुराने जमाने में होता था. ये हालत केवल मेरे आसपास की नहीं है बल्कि पूरी दुनिया से इस तरह की खबरें आ रही हैं.

कोरोना वायरस के गंभीर खतरे, दुनियाभर में होते जा रहे लॉकडाउन और महामारी की उदास करने वाली खबरों के बीच ये ऐसी कुछ ऐसी बातें हैं, जो इस दौर में हो रही अच्छी बातें हैं. हम कुछ उन अच्छी बातों पर चर्चा करते हैं, जो इन दिनों हम कर रहे हैं



हाथों की सफाई का मतलब समझ में आया
जब से ये महामारी शुरू हुई तब से हेल्थ एक्सपर्ट और डॉक्टर जिस एक बात पर लगातार जोर दे रहे हैं, वो है हाथों की सफाई, हर कोई ऐसा कर रहा है. लोगों की सेल्फ में धूल खा रहे सिनेटाइजर निकल आए हैं. कुछ देशों में अतिरिक्त हाइजीन का खयाल रखा जाने लगा है. मसलन जापान में वैसे भी कल्चर उन्हें हाइजीन का खयाल रखने को कहती है. जापान में हाथ धोने का रिवाज भी अच्छा खासा है. इन दिनों वो कुछ ज्यादा ही इस पर जोर दे रहे हैं. इसके चलते उनके यहां फ्लू के मामले घट गए हैं.

कोरोना वायरस से बचने का तरीका जानें
पहली बार हैंड वॉश हमारी आदत में शुमार हुआ है, जो सालों से कहा जाता रहा, वो अब हम करने लगे हैं. सांकेतिक फोटो.


जापान में इन दिनों हर साल मार्च से लेकर मई तक फ्लू के मरीज बहुतायत में होते हैं. इस बार जब मार्च की शुरुआत हुई तो जापान में इसके मरीज 72 लाख रिकॉर्ड किए गए. जो पिछले साल के 02 करोड़ की तुलना में बहुत कम हैं.
जापान के हेल्थ मिनिस्टर कहते हैं कि इसका कारण ये है कि लोग अपने हाथों को कुछ ज्यादा ही साफ रख रहे हैं ताकि वो कोरोना वायरस से बचे रहें.

कार्बन और धुआं कम हुआ
लाकडाउन और ट्रैवल पर प्रतिबंध के कारण फैक्ट्रियों की चिमनियां धुंआ नहीं निकल रहीं और ना ही वाहनों से निकला धुआं आसमान को प्रदूषित कर रहा है.
पिछले चार महिनों में चीन में कॉर्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन 200 मिलियन टन या 25 फीसदी कम हो गया है. अगर इस कमी को दूसरे देशों से तुलना करें तो अर्जेंटीना, मिस्र और वियतनाम जैसे देश सालभर में उतना कार्बन उत्सर्जित करते हैं.
इस लाकडाउन या उससे उपजे स्लोडाउन में चीन में कोयले की खपत भी कम हुई और उसके पॉवर प्लांट्स अब 36 फीसदी कम कोयले का उपयोग कर रहे हैं. वहीं रिफायनरिज में ऑयल का इस्तेमाल भी कम हुआ है.

कई सालों बाद शहरों की हवा एकदम ताजी और फ्रेश है. कोयल की कूक और पंक्षियों की आवाजें दिनभर सुनाई पड़ रही हैं


हवा साफ है और पर्यावरण बेहतर
हवाई यात्राएं कम हो गई हैं. इस सबसे पर्यावरण का फायदा हो रहा है. इससे लोगों को दूर तक की वो सब चीजें साफ नजर आ रही हैं जो पहले धुएं या प्रदूषण के चलते नजर आना बंद चुकीं थीं. हालांकि ये बात सही है कि कोरोना की आपदा खत्म होते ही साफ हवा फिर दूर की बात हो जाएगी. तकरीबन सभी देश दोगुना उत्पादन करेंगे और क्लायमेट का खतरा फिर सामने होगा.

लंबे समय बाद बालकनी में फिर गौरेया फुदक रही है. वो चहचहा रही है


जानवरों की रक्षा होगी
कुछ समय पहले तक दुनियाभर में मांसाहार जमकर होता था. इसके लिए तमाम देशों में तमाम तरह के जानवरों का खाया जाता था. चीन में शायद ही कोई ऐसा जानवर या समुद्री जीव या अन्य जीव हो जो खाया नहीं जाता, लेकिन अब इस रोक लगी है. वुहान में तो जंगली जानवरों की खरीद और बिक्री पर रोक लगा दी गई है. वैसे दुनियाभर में अब मांसाहार से पैदा होने वाली बीमारियों पर लोगों का ध्यान जाने लगा है और लोग शाकाहार के महत्व को समझ रहे हैं.

हांलाकि चीन ने वर्ष 2003 में फैली सार्स बीमारी के बाद इसे रोकने के लिए जंगली जानवरों, चमगादड़ और सांपों को खाने पर रोक लगा दी थी लेकिन उसके बाद उनकी बिक्री फिर शुरू हो गई. इस बार उन्होंने ये प्रतिबंध स्थायी तौर पर लगाया है.

कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन हुआ और उसने हम सभी को परिवार के साथ क्वलिटी टाइम गुजारने का समय दिया है. इसका आनंद लें. ऐसे मौके बहुत कम आते हैं


कम्युनिटी और परिवार के साथ मिला समय बिताने का समय
बेशक कोरोना वायरस से लगे लॉकडाउन की वजह से लोगों का बाहर निकलना बंद हो गया है. उन्हें हफ्तों अपनी कम्युनिटी या परिवार के लोगों के साथ बिताने होंगे.
इससे हम कम्युनिटी की भावना को पहचानेंगे और साथ परिवार के साथ बेहतर समय गुजारेंगे. एक दूसरे से बात करेंगे. अपने घरों की ओर ध्यान देंगे.इस दौरान आप अपनी तमाम हॉबीज और पुस्तकें पढ़ने के काम को फिर से कर सकते हैं, जो तेज जिंदगी में कम हो गया था.

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First published: March 25, 2020, 5:33 PM IST
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