क्या आर्टेमिस यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर नहीं उतारेगा नासा?

ऐसा लगता है कि नासा (NASA) अपनी आर्टेमिस (Artemis) योजना में कुछ बदलाव कर सकता है. (तस्वीर: Pixabay)
ऐसा लगता है कि नासा (NASA) अपनी आर्टेमिस (Artemis) योजना में कुछ बदलाव कर सकता है. (तस्वीर: Pixabay)

नासा(NASA) के अधिकारियों के हालिया बयान इशारा कर रहे हैं कि नासा आर्टेमिस अभियान (Artemis Mission) के यात्रियों को चंद्रमा (Moon) के दक्षिणी ध्रुव (South Pole)की जगह भूमध्यरेखीय क्षेत्र में उतार सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 7:00 PM IST
  • Share this:
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) पिछले कुछ समय से अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस अभियान (Artimes) पर काम कर रही है. पिछले 18 महीनों से नासा का ध्यान साल 2024 तक अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) को चंद्रमा (Moon) के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) में उतरने पर था. दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना में बदलाव आ सकता है. एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि अगर दक्षिणी ध्रुव पर उतरने में परेशानी हुई तो अभियान में बदलाव भी हो सकता है.

दो मौकों पर मिले संकेत
आर्टेमिस कार्यक्रम में लैंडिंग साइट एक मुद्दा बना कर दो अलग-अलग मौकों पर सामने आया जब नासा के प्रमुख प्रशासक जिम ब्रिडिनस्टोन ने नासा के सलाहकारी समूह लूनार एक्सप्लोरेशन एनालेसिस ग्रुप की एक डिजिटल मीटिंग में कहा, “पहले अभियान (आर्टिमिस-3) के लिए हमारा लक्ष्य दक्षिणी ध्रुव पर जाना है, लेकिन मुझे हैरानी नहीं होगी मिसाल के तौर पर अगर हम कहें कि दक्षिणी ध्रुव आर्टेमिस-3 की पहुंच से बाहर हो. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि ऐसा होगा या नहीं होगा.

कब बना था विचार
नासा का यह अभियान तब शुरू हुआ था जब मार्च 2019 में उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने एजेंसी को निर्देश दिया था वह इंसान को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर उतारने के लिए लक्षित तारीख 2024 रखे. यह इलाका अन्वेषणकर्ताओं के लिए बहुत ही रोमांचक होने वाला है कि क्योंकि इसके काले क्रेटर्स में  बर्फ की मौजूदगी है जहां सूर्य का प्रकाश भी कभी नहीं पहुंचा.



Moon, south pole,Ice
चंद्रमा (Moon) के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर बर्फ (Ice) की मौजूदगी ने उसका महत्व बढ़ाया है.


क्या अहमियत है यहां बर्फ की
सैद्धांतिक रूप से बर्फ पीने के पानी, सांस लेने योग्य हवा और यहां तक कि रॉकेट का ईंधन तक बनाने के काम में आ सकती है. लेकिन वैज्ञानिक अभी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि चंद्रमा पर कितनी बर्फ है और इन प्रक्रियाओं को लागू करना कितना आसान होगा. लेकिन फिर एक संसाधन की उम्मीद ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को सबका प्रिय गंतव्य स्थान बना दिया है. लंबे समय तक चंद्रमा पर रह पाने के मामले में इसे जगह की अहमियत और ज्यादा प्रचारित कर दी है.

जानिए आखिर क्यों चांद की बर्फ और मिट्टी खरीदना चाहता है नासा

बैकअप प्लान की जरूरत?
लेकिन अब नासा संभवतः एक अतिरिक्त योजना बनानी होगी. इसकी वजह यह है कि चंद्रमा के ध्रुवीय इलाकों में जाना भूमध्यवर्तीय इलाकों के मुकाबले ज्यादा मुश्किल है. हो सकता है कि नासा को अपनी योजना में बदलाव कर साल 2024 में साधारण लैंडिंग ही करना पड़े. भूमध्यवर्तीय क्षेत्र के छह ऐसी जगहें हैं जहां  अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री साल 1969 से 1972 के बीच अपोलो अभियान के तहत उतर चुके हैं.



यह दलील क्यों
ऐसे में सवाल उठता है कि उसी जगह पर फिर से जाने का क्या मतलब है जहां अंतरिक्ष यात्री पहले जा चुके हैं और ऐसी जगह पर सबसे ज्यादा कैसे सीखने को मिलेगा. ब्रिडिनस्टोन का कहना है कि यहां और भी वैज्ञानिक खोजें हो सकती है. यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि यह जगहें हमेशा के लिए सुरक्षित हैं.

जानिए कितना खास है नासा का SLS रॉकेट बूस्टर टेस्ट  

इसके बाद नासा के ह्यूमन एक्सप्लोरेशन एंड ऑपरेशन्स डायरेक्ट की एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर कैथी ल्यूएडर्स ने भी एक अन्य कार्यक्रम में इस बारे में इशारा किया था. नासा की योजना में दक्षिणी ध्रुव की जगह दूसरी साइट का चुनाव होता है तो यह एक बड़ा कदम होगा. क्योंकि अभियान से जुड़ी बहुत से बदलाव  जुड़ जाएंगे. वैसे आने जाने के लिहाज से बेस कैम्प के लिए ध्रुवीय इलाके के बजाए भूमध्यरेखीय इलाका ज्यादा उपयुक्त लगता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज