जब गलत निकली सबसे पहले खोजे गए ब्लैकहोल की जानकारी

दस साल पहले ही शोधकर्ताओं ने इस ब्लैकहोल (Black Hole) की पुष्टि की थी जिसके बाद सबसे ज्यादा अध्ययन किया गया पिंड था.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

दस साल पहले ही शोधकर्ताओं ने इस ब्लैकहोल (Black Hole) की पुष्टि की थी जिसके बाद सबसे ज्यादा अध्ययन किया गया पिंड था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शोधकर्ताओं ने सबसे पहले खोजे गए ब्लैकहोल (Black Hole) का जब फिर से अवलोकन किया तो पाया कि उसका भार (Mass) जितना पहले समझा गया था उसका दोगुना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2021, 1:49 PM IST
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ब्रह्माण्ड (Universe) के बारे में हमारे वैज्ञानिकों को जितनी जानकारी है उसमें से बहुत कुछ सटीक नहीं है. इसके लिए हमारे खगोलविदों को उन्नत किस्म के उपकरणों (Instruments) की जरूरत है. इसमें उच्च विभेदन टेलीस्कोप (High Resolution Telescope) हमेशा से ही एक अहम आवश्यकता रही है. उन्नत उपकरणों के मिलने से पुरानी जानकारियों में सुधार होकर नवीनीकरण होती हैं और हो भी रही हैं. खगोलविदों ने हाल में दुनिया में सबसे पहले खोजे गए ब्लैकहोल (First discovered Black Hole)  का फिर से अध्ययन किया और उन्हें अपनी पुरानी जानकारी में सुधार करना पड़ा.

दोगुना भार है इसका

खगोलविदों ने पाया है कि इस  ब्लैक होल का भार जितना पहले समझा गया था उससे दोगुना है. उनका कहना है कि पहली बार इस ब्लैक होल के भार का अनुमान आधा ही लगाया गया था. यह ब्लैक होल एक्सरे बाइनरी सिस्टम है जिसका नाम सिग्नस X-1 है. शोधकर्ताओं ने इसका फिर से भार निकला तो उसे हमारे सूर्य से 21 गुना ज्यादा पाया. इससे यह अब तक का सबसे भारी तारकीय भार वाली श्रेणी का ब्लैकहोल बन गया है जिसे गुरुत्व तरंगों के बिना खोजा गया है.

1964 में ही पता चल गया था इसका
इस नई पड़ताल से से खगोलविदों को ब्लैकहोल के निर्माण की प्रक्रिया को फिर से परिभाषित करने की जरूरत पड़ रही है. मजेदार बात यह है कि यह पिंड 1964 में ही खोज लिया गया था लेकिन तब उसे ब्लैक होल के तौर पर पहचान नहीं मिली थी. उसे एक एक्स रे का स्रोत माना गया था और उसे ब्लैक होल भी आसानी से नहीं माना गया था. यहां तक कि इस मामले में मशहूर वैज्ञानिकों स्टीफन हॉकिंग और किप थोर्न में शर्त भी लगी थी.

बहुत बाद में मिली ब्लैकहोल की मान्यता

इस ब्लैकहोल को मान्यता साल 2011 में मिली जब वैज्ञानिकों ने माना कि एक्स रे विकिरण ब्लैक होल से ही निकल रहा है. यह उस समय सबसे ज्यादा अध्ययन करने वाला ब्लैक होल रहा था और खगोलविदों को लगता है कि वे इस ब्लैक होल को काफी अच्छे से समझ चुके हैं.  उन्होंने इसके पास नीले रंगे के विशाल बाइनरी साथी का भी पता लगाया जिसे HDE 226868 नाम दिया गया जो इसी ब्लैकहोल का चक्कर लगाता है.



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दस साल पहले ही शोधकर्ताओं ने इस ब्लैकहोल (Black Hole) की पुष्टि की थी जिसके बाद सबसे ज्यादा अध्ययन किया गया पिंड था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


फिर से किया अवलोकन

सिग्नस एक्स-1 6070 पृथ्वी से प्रकाश वर्ष दूर स्थित है. उस समय इसका भार का अनुमान 14.8 सौर भार लगाया गया था, जबकि HDE 226868 24 सौर भार के बराबर का पिंड माना गया था.शोधकर्ताओं का कहना है कि नए अवलोकनों के मुताबिक वे गलत थे. उन्होंने ने पैरेलैक्स अवलोकन से इस सिस्टम का फिर से अध्ययन किया और देखा कि उसकी स्थिति आकाश में पृथ्वी के सूर्य का चक्कर लगाने के समय कैसे बदलती है.

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दूरी भी ज्यादा है पहले से

शोधकर्ताओं ने इसके लिए रेडियो टेलीस्कोप के समूह वेरी लॉन्ग बेसलाइन ऐरे का उपयोग किया जो एक महाद्वीप के आकार के डिश की तरह काम करता है. इस अवलोकन से पता चला कि सिग्ननस एक्स-1 जितना समझा जा रहा था उससे कहीं ज्यादा दूरी पर स्थित है. इसका साफ मतलब यही था कि यह जितना समझा गया उससे कहीं विशाल पिंड है.

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शोधकर्ताओं ने रेडियो टेलीस्कोप के जरिए ब्लैकहोल (Black Hole) का अध्ययन किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कितनी दूर है अब ये ब्लैकहोल

ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी रिसर्च के खगोलविद जेम्स मिलर जोन्स ने बताया कि उनकी टीम ने सिग्नस एक्-1 के सटीक मापन के लिए रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग किया. यह ब्लैकहोल अपने पास के विशालकाय तारे का चक्कर कुछ ही दिनों वाली कक्षा में लगा रहा हैं. वहीं ब्लैकहोल की कक्षा का मापन करने वैज्ञानिकों ने पाया कि इसकी पृथ्वी से दूरी 7 हजार प्रकाशवर्ष की दूरी पर है.

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इसी आधार पर वैज्ञानिक इस पिंड का नया भार निकाल सके. इससे पहले सबसे विशाल तारकीय भार वाला ब्लैकहोल M33X-7  था जिसका भार हमारे सूर्य से  15.65 गुना ज्यादा है. लेकिन इस खोज से अब  M33 X-7 का भी वैज्ञानिक फिर से अध्ययन करना चाहते हैं. साइंस में प्रकाशित इस अध्ययन के वैज्ञानिकों को लगता है कि ब्लैकहोल के निर्माण के मॉडल को एक बार फिर से परिभाषित करना होगा.
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