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खगोलविदों ने खोजा गुरू ग्रह जैसा बिना बादलों का बाह्यग्रह

पहली बार है जब कोई ग्रह (Exoplanet) गुरू (Jupiter) के जैसा है और उसके वायुमंडल में बादल नहीं हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay). (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
पहली बार है जब कोई ग्रह (Exoplanet) गुरू (Jupiter) के जैसा है और उसके वायुमंडल में बादल नहीं हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay). (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

एक बाह्यग्रह (Exoplanet) के वायुमंडल (Atmosphere) के अध्ययन करने पर खगलोविदों ने पाया कि इस यह गर्म ग्रह गुरू (Jupiter) की तरह तो है, लेकिन यहां किसी भी तरह का बादल (Cloud) नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 23, 2021, 8:11 PM IST
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पृथ्वी (Earth) पर बेहतर जीवन के लिए हमारे वैज्ञानिक यह जानने का प्रयास कर रहे हैं यहां जीवन कैसे शुरू हुआ. इसके लिए वे पृथ्वी (Earth) सहित सौरमंडल (Solar System)की उत्पत्ति भी को समझना चाहते हैं जिससे वे जीवन और ब्रह्माण्ड (Universe) के कई रहस्यों को सुलझाना चाहते हैं. इस तरह के अध्ययन के लिए सबसे अच्छा जरिया सुदूर तारों के ग्रहों का अध्ययन है. अभी तक खोजो गए  हजारों बाह्यग्रहों (Exoplanet) में से खगोलविदों को एक अनोखा ग्रह मिला है जो है तो हमारे गुरू ग्रह (Jupiter) की तरह है, लेकिन वहां बादल (Cloud) नहीं है.

अब तक का खोजा गया पहला ऐसा ग्रह
यह खोज हार्वर्ड एंड स्मिथसन के सेंटर ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के खगोलविदों ने की है. यह अब का खोजा गया पहला ऐसा बाह्यग्रह है जो गुरू ग्रह की तरह तो है, लेकिन इस ग्रह में अवलोकित वायुमंडल में कोई बादल  नहीं हैं. यह पड़ताल इसी महीने एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लैटर्स में प्रकाशित हुई है.

वायुमंडल का अध्ययन नहीं हुआ था
खगोलविदों ने इस बाह्यग्रह का नाम WASP-62b दिया गया है. यह पहले साल 2012 में सबसे पहले देखा गया था. इसकी खोज वाइड एंगल सर्च फॉर प्लैनेट्स (WASP) साउथ सर्वे के जरिए हुई थी, लेकिन अभी तक इसके वायुमंडल का नजदीकी से अध्ययन नहीं किया गया था.



बाह्यग्रहों की वायुमंडल के अध्ययन करने का प्रयास
इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के स्नातक छात्र मुनाजा आलम ने बताया, “अपनी थीसिस के लिए मैं बाह्यग्रह की विशेषताओं पर काम कर रहाथा. मैने खोजे गए ग्रहों को लिया और उनके वायुमंडल की विशेषताओं को जानने की कोशिश की.”

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बाह्यग्रह (Exoplanet) का अध्ययन बहुत ही मुश्किल काम होता है (प्रतीकात्मक तस्वीर: @ESO)


कितना अलग है यह गुरू ग्रह से
WASP-62b को गर्म गुरू ग्रह कहा जाता है. यह 575 प्रकाशवर्ष दूर स्थिति  है और इसका वजन हमारे सौरमंडल के गुरू ग्रह का आधा है. लेकिन गुरू ग्रह की तरह यह 12 साल में अपने सूर्य का चक्कर नहीं लगा रहा है, बल्कि यह अपने तारे का चक्कर केवल साढ़े चार दिनों में लगा लेता है.  इस ग्रह के अपने तारे की नजदीकी उसे बहुत ही गर्म बनाती है और इसी वजह से इसे गर्म गुरू ग्रह कहा गया है.

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इस तकनीक का किया उपयोग
आलम ने हबल स्पेस टेलीस्कोप के जरिए स्पैक्ट्रोस्कोपी और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण कर आंकड़े जुटाकर अवलोकन किया जिससे रासायनिक तत्वों की जानकारी मिल सके. आलम ने WASP-62b की खास तौर पर निगरानी की जब वह अपने तारे के सामने से तीन बार गुजरा. उन्होंने देखने योग्य प्रकाश से अवलोकन किए जिससे ग्रह के वायुमंडल में सोडियम और पौटेशियम की मौजूदगी का पता चल सकता है.

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अब तक के खोजे गए केवल 7 प्रतिशत बाह्यग्रह (Exoplanet) ऐसे हैं जिनमें बादल बहुत कम हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


सोडियम ने किया खुलासा
आलम ने बताया कि पहले वे ग्रह को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं थे. लेकिन एक बार उन्होंने आंकड़े देखना शुरू किया तो वे रोमांचित हो गए. उन्होंने पाया कि पौटेशियम की मौजूदगी दिखाई नहीं दी, लेकिन सोडियम की उपस्थिति स्पष्ट थी. आमतौर पर किसी ग्रह में बादलों की मौजूदगी सोडियम की मौजूदगी से बहुत ही हलके संकेत मिलते हैं जबकि ऐसा नहीं था.

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बिना बादलों के ग्रह बहुत ही कम होते हैं. ऐसा केवल 7 प्रतिशत बाह्यग्रहों में होता है. इससे पहले WASP-96b बाह्यग्रह में ऐसा पाया गया था जिसमें बहुत ही कम बादल थे. इसे गर्म शनि ग्रह कहा गया है. शोधकर्ताओं को ऐसे ग्रह से बहुत सी जानकारी मिलने की उम्मीद है.
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