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भारत में आज ही के दिन हुआ था पहला हार्ट ट्रांसप्लांट

भारत में पहला हृदय प्रत्यारोपण (Heart Transplantation) साल 1994 को हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

भारत में पहला हृदय प्रत्यारोपण (Heart Transplantation) साल 1994 को हुआ था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

भारत (India) में आज से 27 साल पहले देश का पहला हृदय प्रत्यारोपण (Heart Transplant), डॉ पी वेणुगोपल की अगुआई में एम्स (AIIMS) के 20 सर्जन की टीम ने किया था.

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    साल 1994 से पहले हृदय प्रत्यारोपण (Heart Transplantation) के लिए भारतीय नागरिकों को विदेश जाना होता था जो केवल अमीरों के ही बस की बात थी. इस वजह से बहुत से ऐसे हृदय मरीजों के लिए इस खर्चीले इलाज को वहन करना संभव नहीं होता था जिनका हृदय रोग (Heart Disease) अंतिम अवस्था में था. लेकिन जुलाई 1994 में मानव अंग कानून बनने के बाद भारत के मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ पी वेणुगोपाल (P Venugopal) की अगुआई में भारतीय चिकित्सकों की टीम ने भारत का पहला हृदय प्रत्यारोपण सफलता पूर्वक किया. यह बड़ी उपलब्धि उसी साल 3 अगस्त को हासिल की गई थी.

    इस प्रत्यारोपण में कम से कम बीस सर्जन की टीम ने काम किया था. दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए कानून 7 जुलाई 1994 को लागू हुआ था और इसके एक महीने के भीतर ही हृदय प्रत्यारोपण की उपलब्धि हासिल कर ली गई. इस कानून में मानव अंगों को निकलने, उनके भंडारण और प्रत्यारोपण के लिए प्रावधान हैं.

    रिकॉर्ड टाइम में कैसे किया प्रत्यारोपण
    जब इस कानून को बनाने की प्रक्रिया चल रही थी उसी दौरान वेणुगोपाल और एम्स के कार्डियोथोरैकिक एंड वस्कुलर सर्जरी विभाग की उनकी पूरी टीम हृदय प्रत्यारोपण की तकनीकों पर काम करने में लगी हुई थी. इसके लिए उन्होंने जानवरों पर भी प्रयोग किए थे.  रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रत्यारोपण में 59 मिनट का समय लगा था.

    किसका हुआ था प्रत्यारोपण
    इस मरीज का नाम देवीराम था जिनकी उम्र 40 साल की थी. देवीराम  भारी उद्योग का कर्मचारी थे, जिन्हें कार्डियोमायोपैथी की बीमारी थी. उन्हें प्रत्यारोपण के करीब तीन महीने पहले से एम्स में भर्ती किया गया था. उनका रक्त समूह एबी पॉजिटिव था जो सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता रक्त समूह होता है.

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    डॉ पी वेणुगोपाल (Dr P Venugopal) को साल 2014 में चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    15 साल ज्यादा जिए देवीराम
    उसी समय एक 35 साल की महिला की ब्रेन हैम्रेज की वजह से मौत हो गई थी जो अस्पताल में लाई गई थी. उस महिला के परिवार की सहमति के बाद और देवीराम के पास भी कोई विकल्प ना होने के कारण हृदय प्रत्यारोपण पर सहमति बनी सकी थी. इसके बाद देवीराम 15 साल का जीवन और अधिक जिए थे जिसके बाद उनकी ब्रेन हैम्रेज से उनकी मृत्यु हो गई थी जिसका हृदय प्रत्यारोपण से कोई लेना देना नहीं था.

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    तब विदेश जाना पड़ता था इसके लिए
    उस समय डॉ पी वेणुगोपाल ने कहा था कि यह सभी भारतीय सर्जन के लिए जरूरी है कि वे इस तरह के ऑपरेशन के लिए काम आने वाली जानकारी के साथ तैयार रहें. उन दिनों में हृदय प्रत्यारोपण के लिए मरीजों को देश बाहर जाना पड़ता था. उन दिनों विदेशों में भी प्रत्यारोपण के लिए हृदय उपलब्ध नहीं हुआ करते थे. अकसर ऐसे मामलों में मरीजों को निराशा का सामना करना पड़ता था.

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    आज हृदय प्रत्यारोपण (Heart Transplantation) बहुत मुश्किल काम नहीं रह गया है, लेकिन हृदयका उपलब्ध होना एक चुनौती जरूर बना हुआ है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    पिछले कुछ सालों में भारत के की प्रगति
    इस सर्जरी ने भारत को दुनिया के उन देशों में शामिल कर लिया जहां हृदय प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध थी. इसके बाद से देश में सफल हृदय प्रत्यारोपण भी होने लगे. डॉ वेणुगोपाल ने कुल 25 प्रत्यारोपण किया. उन्हें साल 1998 को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. पिछले कुछ सालों में निजी क्षेत्र में इस दिशा में तेजी से प्रगति की है. आज भारत में हृदय प्रत्यारोपण का खर्चा 20 से 25 लाख रुपये का है.

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    दुनिया का पहला हृदय प्रत्यारोपण 3 दिसंबर 1967 को में दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में डॉ सर्जन क्रिश्चियन बर्नार्ड ने किया था. उस समय डॉ क्रिस्टियन की टीम में 30 सदस्यथे और इस प्रत्यारोपण में 9 घंटे का समय लगा था. लुई वशकांस्की के इस सफल ऑपरेशन के 18 दिन बाद  निमोनिया की वजह से उनकी मौत हो गई थी.

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