वो राजा, जो देश की पहली अंग्रेज दुल्हन ब्याह कर लाया, ब्रिटिश राज को ना भाया

वो राजा, जो देश की पहली अंग्रेज दुल्हन ब्याह कर लाया, ब्रिटिश राज को ना भाया
राजा मार्तण्ड आकर्षक व्यक्तित्व वाला लंबा-चौड़ा छैल छबीला शख्स था

दक्षिण भारत में एक छोटी सी रियासत थी पुडुकोट्टी. वहां के छैब-छबीले 40 साल के कुंवारे राजा मार्तण्ड ने आस्ट्रेलियऩ युवती से शादी रचाई तो ब्रिटिश राज के अंग्रेज हुुक्मरान नाराज हो गए. ब्रिटिश राज में तब भारतीय राजाओं द्वारा अंग्रेज महिलाओं से शादी को पंसद नहीं किया जा रहा था. राजा को बहुत मुश्किलें आईं. उसे भारत छोड़ना पड़ा

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हालांकि ब्रिटिश राज इस बात के बहुत खिलाफ रहता था कि कोई भारतीय राजा विदेशी महिला खासकर किसी अंग्रेज से शादी करे लेकिन इसके बाद कई राजा-महाराजाओं ने ऐसा किया. पहली बार किसी अंग्रेज महिला से शादी करने वाले राजा दक्षिण भारत की एक छोटी सी रियासत पुडुकोट्टी के मार्तण्ड थे. हालांकि ये शादी करने के बाद उन्हें ना केवल अपनी राजगद्दी गंवानी पड़ी बल्कि जीवन का पूरा हिस्सा विदेश में गुजारना पड़ा. हालांकि उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं थी. राजा मार्तण्ड की लव स्टोरी भी समर्पण और पत्नी के प्रति निष्ठा के साथ अंग्रेजों के दबाव में नहीं आने की एक मिसाल बन गई.

दक्षिण भारत की छोटी सी रियासत पुडुकोट्टी के शासक राजा मार्तण्ड तोंडियन बहादुर का दिल एक आस्ट्रेलियन महिला पर आ गया. राजा आस्ट्रेलिया घूमने गया था. वो मेलबर्न के जिस होटल में ठहरा था. वहीं उसकी मुलाकात मेलबर्न में रहने वाली खूबसूरत आस्ट्रेलियन युवती मौली पिंक और उसकी मां से हुई.

राजा का दिन इस खूबसूरत युवती पर आ गया. उन्होंने उससे शादी तो कर ली लेकिन इसके बाद बहुत मुश्किलें आईं. यहां तक कि उसे अपनी गद्दी भी गंवानी पड़ी. देश छोड़कर फ्रांस में जाकर बसना पड़ा लेकिन वो किसी भी अंग्रेजों के दबाव में आकर अपनी अंग्रेज पत्नी को छोड़ने को तैयार नहीं हुआ. राजा तोंडियन की अंग्रेज रानी बहुत खूबसूरत थी. लंबा कद और भव्य आकृति.



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अंग्रेज हमेशा ऐसी शादियों के खिलाफ रहते थे
अंग्रेजों का उस समय नियम था कि कोई भी राजा किसी भी अंग्रेज महिला से पहली शादी नहीं कर सकता है. क्योंकि वो मानते थे कि अंग्रेज महिला अगर पहली महारानी बन जाएगी, तो उससे हुई संतान उत्तराधिकारी बनेगी. वो खुद को अंग्रेज शासकों के बराबर समझने लगेगी. ये एक नए तरह की समस्या पैदा करेगी. लिहाजा अंग्रेज हमेशा महाराजाओं को पहली शादी किसी भारतीय महिला से करने को कहते थे. ताकि उससे उत्तराधिकार के मसले पर कोई समस्या खड़ी नहीं हो.

राजा मार्तण्ड और उनकी आस्ट्रेलियन बीवी मौली फिंक. शादी के बाद ब्रिटिश राज ने इसे मानने से इनकार कर दिया, ये हालत हो गई कि उनको देश ही छोड़ना पड़ा


राजा को अमेरिकी युवती से सगाई तोड़नी पड़ी थी
1915 में राजा मार्तण्ड उस समय 40 साल के छैल छबीला कुंवारे पुरुष थे. उनका व्यक्तित्व आकर्षक था. उन्होंने तय किया हुआ था कि वो अपने देश की किसी महिला से शादी नहीं करेंगे. उन्हें पहले एक अमेरिकी महिला पंसद आ गई थी. उससे सगाई भी हो गई लेकिन अंग्रेजों के दबाव के चलते इसे तोड़ना पड़ा.

राजा आस्ट्रेलियन लड़की पर फिदा हो गया
जब राजा मार्तण्ड उस समय आस्ट्रेलिया गया तो जिस होटल में ठहरा था, उसी में पहली बार वो मौली फिंक से मिले. मौली संपन्न परिवार की थी. पिता बैरिस्टर थे. हालांकि पिता के निधन के बाद परिवार उस होटल के पास एक अपार्टमेंट में चला गया, जो होटल के बगल में था. मौली सुंदर भी थी और बुद्धिमान भी. राजा मौली पर फिदा हो गया और मौली उस पर.

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दोनों ने अंग्रेजों के विरोध के बाद भी शादी कर ली
राजा ने मां-बेटी को मेलबर्न के एक होटल में खाने का न्यौता दिया. मां को भी मार्तण्ड अच्छे लगा. जब राजा ने उनकी बेटी से शादी का प्रस्ताव दिया तो मौली की मां को कोई एतराज नहीं था. दोनों वापस पुडुकोट्टी की रियासत आ गए. वहां उन्होंने शादी की. इसमें बहुत खुशियां मनाई गईं. हालांकि अंग्रेजों ने इस शादी का कार्ड छपने नहीं दिया. शादी में भी रोड़े अटकाए लेकिन इसके बाद भी राजा ने शादी कर ही ली.

मौली फिंक सुंदर भी थी और बुद्धिमान भी. भारत से जाने के बाद उसने आस्ट्रेलिया में बेटे को पैदा किया. फिर राजा और मौली फ्रांस में जाकर हमेशा के लिए बस गए.


अंग्रेजों को राजाओं के विदेशी महिलाओं से शादी का कार्ड छपवाने पर भी एतराज होता था. राजा मार्तंड के केस में भी ऐसा ही हुआ. अंग्रेजों ने इस शादी को मानने से इनकार कर दिया. पुडुकोट्टी छोटी रियासत जरूर थी लेकिन ईस्ट इंडिया कंपनी की नजदीकी सहयोगी थी.

अंग्रेज रानी गर्भवती हो गई तो उसे किसी ने जहर दे दिया
जब राजा की आस्ट्रेलिया पत्नी शादी के बाद गर्भवती हो गई थी. उसे ना जाने किसने दरबार में जहर दे दिया था. माना गया कि ये काम अंग्रेजों ने ही साजिश के तहत कराया है.

राजा को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी
राजा को उसे लेकर विदेश जाना पड़ा. आस्ट्रेलिया में ही राजा की पहली संतान हुई. हालांकि राजा को राजगद्दी अंग्रेजों के विरोध के चलते छोड़नी पड़ी. उसने उत्तराधिकार छोटे भाई को दे दिया. अंग्रेजों ने बाद में मार्तंण्ड और मौली के बेटे को भी अंग्रेजों ने राज्य का असली उत्तराधिकारी मानने से मना कर दिया.

अंग्रेजों के दबाव के कारण राजा मार्तण्ड को राजगद्दी छोटे भाई को सौंपनी पड़ी. फिर उसकी जिंदगी विदेशों में ही बीती


फिर राजा और परिवार फ्रांस में रहने लगा
1920 में मार्तण्ड अपने बीवी औरे बेटे के साथ फ्रांस के केंस में जाकर रहने लगा. वो वहां की सोसायटी के खास अंग बन गए. वहां की पार्टियों की शान होते थे. राजा के पास बेशुमार धन था. साथ ही उसके अपने राज्य से उसे काफी धन सालाना पेंशन के रूप में मिलता था. बड़ी-बड़ी हस्तियां फ्रांस में उनकी दोस्त थीं.

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अंग्रेजों ने अंतिम संस्कार भी भारत में नहीं होने दिया
1928 में मार्तण्ड का निधन हो गया, तब उसकी बीवी मौली चाहती थी कि उसके पति का दाह संस्कार उसकी रियासत पुडुकोट्टी में ही हो लेकिन अंग्रेजों ने उसकी अनुमति नहीं दी. फिर राजा का दाह-संस्कार लंदन में हिंदू रीति रिवाजों से हुआ. आज भी लंदन में राजा का स्मारक बना हुआ है.

जब राजा मार्तण्ड का निधन हुआ तो पत्नी मौली ने भारत में दाह संस्कार की इजाजत मांगी लेकिन ब्रिटिश अधिकारियों ने इसकी अनुमति नहीं दी. लंदन में जाकर अंतिम संस्कार रीतिरिवाजों के साथ किया गया. लंदन में आज भी राजा का स्माकर सुरक्षित है


राजा का बेटा अमेरिका का नागरिक बन गया
राजा के निधन के बाद पहले तो मौली केंस में रहती रही और फिर वो लंदन में आकर रहने लगी. बाद में कानूनी तौर पर दिक्कतों के कारण राजा का बेटा अमेरिका का नागरिक बन गया. मौली का निधन 1967 में केंस में हो गया
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