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दुनिया के ‘जीवित रोबोट’ पैदा कर सकेंगे बच्चे, जानिए क्या है पूरी कहानी

दुनिया के ‘जीवित रोबोट’ पैदा कर सकेंगे बच्चे, जानिए क्या है पूरी कहानी

जेनोबोट्स (Xenobots) वे कृत्रित जीव हैं जिन्हें जीवित रोबोट कहा जाता है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

जेनोबोट्स (Xenobots) वे कृत्रित जीव हैं जिन्हें जीवित रोबोट कहा जाता है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

विज्ञान और तकनीक में इतनी तरक्की हो गई है कि वैज्ञानिक कई मामलों में अब दोनों के बीच का फर्क भी मिटाने लगे हैं. ऐसी ही एक मिसाल वैज्ञानिकों ने जीवित रोबोट (Living Robot) के मामले दी है जो मेंढक (Frog) के भ्रूण की स्टेम कोशिकाओं से बनाया था जो अनुवांशिक रूप से अपरिवर्तित है. अब वैज्ञानिकों ने इन जीवित रोबोट में अनोखी जैविक प्रजनन (Reprouction) क्षमता भी विकसित करने की उपलब्धि हासलि कर ली है.

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    विज्ञान (Science) ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब लोग यह भी मानने लगे हैं कि वह दिन दूर नहीं कि इंसान खुद कृत्रिम रूप इंसान बनाने में सक्षम हो जाएगा और खुद ही वैज्ञानिक तरीके से बच्चों का निर्माण भी करने लगेगा. जहां वैज्ञानिक इसे अब भी दूर की कौड़ी मानते हैं. वे एक नया  मुकाम हासिल करने में कामयाब हुए हैं. जिन वैज्ञानिकों ने दुनिया के पहले जीवित रोबोट (Living Robots) बनाए हैं, उनका दावा है कि अब वे जैविक प्रजनन (Reproduction) भी कर सकेंगे यानि अपने बच्चे भी पैदा कर सकेंगे. वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि वे ऐसा पौधों या जानवरों की तरह नहीं करेंगे.

    कैसे बने येजीवित रोबोट
    अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अफ्रीकी जेनोपस लैविस नाम के मेंढक की स्टेम सेल के जिरिए एक रोबोट बनाया था जिसे उन्होंने जेनोबोट्स नाम दिया था. वे केवल एक मिलीमीटर से भी छोटे हैं इन्हें पिछले साल प्रदर्शित किया गया था.  उस समय प्रयोगो में वे चल सकते थे, एक साथ समूहों में काम कर सकते थे और खुद का उपचार करने में भी सक्षम थे.

    नए तरह का जैविक प्रजनन
    अब वरमोंट यूनिवर्सीटी टफ्ट्स यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विस इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकली इंस्पायर्ड इंजीनियरिंग के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने जैविक प्रजजनन का नया ही रूप खोज निकाला है जो विज्ञान के लिए ज्ञात किसी भी पौधे या जानवर के प्रजनन से अलग है.

    चौंकाने वाली रही खोज
    इस नए अध्ययन के सह-प्रमुख लेखक और टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी के प्रोफेसर और एलन डिसकवरी सेंटर के निदेशक माइकल लेविन ने बताया कि वे इससे पूरी तरह से चौंक गए थे. सीएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि मेढ़कों में अपना प्रजनन का तरीका होता है, लेकिन जब कोशिकाओं को भ्रूण के बाकी हिस्से से उन्मुक्त किया गया और उन्हें नए वातावरणको समझने का मौका दिया गया हैं, तो ऐसे चौंकाने वाले नतीजे मिले.

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    वैज्ञानिकों ने खास प्रजाति के मेंढक (Frog) से यह जीवित रॉबोट बनाया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    क्या वाकई जीव हैं ये
    नए माहौल में उन गतिविधि का नया तरीका खोज सके बल्कि उन्होंने प्रजनन का नया तरीका तक निकाल लिया. स्टेम कोशिकाएं ऐसी सामान्य कोशिकाएं होती हैं जिनमें अलग ही प्रकार की कोशिकाएं विकसित करने की क्षमता होती है. जेनोबोट्स बनाने केलिए शोधकर्ताओं ने मेंढक के भ्रूण से जीवित स्टेम कोशिका निकाली और सेने के लिए छोड़ दिया. इसमें जीन्स के साथ कोई छोड़छाड़ नहीं की गई थी. इस तरह से वे अनुवांशिक रूप से मेंढक की अपरिवर्तित कोशिका से बने जीव हैं.

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    कितने रोबोट हैं ये
    इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और वर्मोन्ट यूनिवर्सिटी के कम्प्यूटर साइंस प्रोफेसर और रोबोटिक्स विशेषज्ञ जोश बोंगार्ड बताते है कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि रोबोट धातु या सिरामिक के बने होते हैं. लेकिन रोबोट केवल इनसे ही नहीं बने होते हैं. वे किससे बने होते हैं ये इस पर निर्भर होता है कि वे क्या क्या कर सकते हैं. इस लिहाज से तो ये रोबोट हैं.

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    शोधकर्ताओं ने जेनोबोट्स (Xenobots) के विभिन्न आकारों का परीक्षण किया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    कैसे खुद की प्रतिकृति बनाते हैं ये
    जेनोबोट्स शुरुआत में गोलाकर थे और वे करीब तीन हजार कोशिकाओं से बनते थे. बोंगार्ड का कहना है कि उनकी टीम ने पाया कि जेनोबोट्स खुद की प्रतिकृति बना सकते हैं. लेकिन ऐसा पहले केवल कभी कभी ही और विशेष परिस्थितियों में ही हो पाता था. जेनोबोट काइनेटिक रेप्लिकेशन प्रक्रिया का उपयोग करते हैं जो आणविक स्तर पर होती है, लेकिन कभी पूरी कोशिका या जीवों के स्तर पर  नहीं देखी गई.

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    यह अध्ययन इसी सप्ताह पियर रीव्यू के लिए PANS जर्नल में प्रकाशित हुआ है जिसमें शोधकर्ताओं ने आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस के जरिए अरबों शारीरिक आकारों का परीक्षण किया जो जेनोबोट की प्रतिकृति बनाने के लिहाज से उपयुक्त होगा. एआई से इस तरह का आकर प्रोग्राम नहीं किया बल्कि उसने इसे सी अक्षर जैसा दिखने वाला और पुराने खेल पैकमैन के जैसा आकार दिया जिससे जेनोबोटेस इस तरह का प्रजनन कर सके. फिलहाल इस तकनीक को अपने क्षेत्र की नवजात तकनीक माना जा रहा है.

    Tags: Research, Robot, Science

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