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आज ही के दिन देश में गठित हुई थी पहली लोकसभा, सबसे पहले पास हुआ था भूमि सुधार बिल

भारत की पहली राज्‍यसभा का 3 अप्रैल 1952 और पहली लोकसभा का 17 अप्रैल 1952 को गठन हुआ था.

भारत की पहली राज्‍यसभा का 3 अप्रैल 1952 और पहली लोकसभा का 17 अप्रैल 1952 को गठन हुआ था.

पहला संसद सत्र 13 मई 1952 को बुलाया गया था. पहली लोकसभा (First Lok Sabha) में 677 बैठकें हुईं. लोकसभा के पांच साल के कार्यकाल में 333 विधेयक (Bill) पास हुए थे, जिनमें छह संविधान संशोधन भी शामिल थे. संसद में महिलाएं अल्पमत में थीं. उस वक्‍त संसद के दोनों सदनों में कुल 20 महिला सदस्य थीं.

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    भारत अंग्रेजों की गुलामी से 15 अगस्‍त 1947 को आजाद हुआ. इसके बाद संविधान सभा और अंतरिम सरकार देश पर शासन करती रही. फिर 25 अक्‍टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक पहला आम चुनाव (General Election) हुआ. उस वक्त देश की करीब 36 करोड़ की आबादी में 17 करोड़ लोग बालिग थे. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के अलावा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भारतीय जनसंघ, संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर की रिपब्लिकन पार्टी, राममनोहर लोहिया व जयप्रकाश नारायण की समाजवादी पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी चुनाव में हिस्सा लिया था.

    तब लोकसभा की 489 थीं, जो अब 545 हैं. इनमें 543 सीट पर चुनाव होता है, जबकि दो सीट पर एंग्‍लो इंडियन सांसदों को नॉमिनेट किया जाता है. पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने 364 सीट पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया. इसके बाद 3 अप्रैल 1952 को पहली राज्‍यसभा (Rajya Sabha) का गठन हुआ. फिर आज ही के दिन यानी 17 अप्रैल 1952 को पहली लोकसभा (Lok Sabha) गठित हुई.

    सत्र के पहले दिन सभी सांसद नहीं ले पाए थे शपथ
    लोकसभा और राज्‍यसभा का पहला सत्र 13 मई को बुलाया गया था. दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह 10:45 बजे शुरू हुई. सांसदों को शपथ दिलाने की शुरुआत करने से पहले स्‍पीकर मावलंकर ने कहा कि जहां तक संभव होगा मैं सभी सदस्यों का नाम सही ढंग से लूंगा. फिर भी कोई गलती हो जाए तो मुझे उसके लिए क्षमा करें. पहले दिन शपथ लेने वालों में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) भी थे.

    देश की पहली लोकसभा के लिए 25 अक्‍टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक मतदान हुआ.
    देश की पहली लोकसभा के लिए 25 अक्‍टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक मतदान हुआ.


    पहले दिन सभी सांसद शपथ नहीं ले पाए थे. देश की पहली लोकसभा ने अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया. यह लोकसभा 4 अप्रैल, 1957 को भंग हुई. देश के पहले लोकसभा स्पीकर गणेश वासुदेव मावलंकर बने. उनके नेतृत्व में पूरी संसदीय कार्यवाही की गई. वह इस पद पर 27 फरवरी, 1956 तक रहे. उनके बाद एमए अय्यंगर लोकसभा के स्पीकर बनाए गए. मावलंकर के निधन से पहले वह डिप्टी स्पीकर थे.

    कुल 677 बैंठकें हुई, कुल 3,784 घंटे हुई कार्यवाही
    पहली लोकसभा में कुल 677 बैठकें हुईं. इस दौरान संसद की कार्यवाही करीब 3,784 घंटे चली. संसद में सबसे पहला विधेयक भूमि सुधार बिल पारित हुआ था. लोकसभा के पांच वर्ष के कार्यकाल में 333 विधेयक पास हुए थे, जिनमें छह संविधान संशोधन भी शामिल थे. संसद में महिलाएं अल्पमत में थीं. संसद के दोनों सदनों में कुल 20 महिला सदस्य थीं.

    पहली संसद में महिला सदस्‍यों में कुछ ही जाने-पहचाने नाम थे, जैसे राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, उमा नेहरू, अम्मू स्वामीनाथन और जी. दुर्गाबाई. सबसे अधिक चार महिला सांसद मद्रास (अब चेन्‍नई) से थीं. जीवी मावलंकर को अध्यक्ष चुने जाने की बधाई देते समय सांसद कुमारी एनी मैस्कैरेने ने कहा था, 'यहां उपस्थित बहुत कम महिलाओं की ओर से मैं उम्मीद करती हूं कि आप हमें पूरी सुरक्षा और अपनी बात रखने का पूरा मौका देंगे.'

    पहली लोकसभा में पारित किए गए थे 333 विधेयक
    संसद में नए लोकतंत्र के लिए जरूरी 333 विधेयक पास किए गए. इनमें बैंकिंग, मुद्रा, इंश्योरेंस, वाणिज्य, उद्योग, रक्षा, शिक्षा, राजस्व, वित्त, स्वास्थ्य, कानून और अन्य कई क्षेत्रों के लिए जरूरी विधेयक शामिल थे. पहली संसद में बड़ी संख्या में सांसद ग्रेजुएट थे. करीब 75 सांसद कानून में ग्रेजुएट या पोस्‍ट ग्रेजुएट थे. करीब 35 सांसद आर्ट्स या साइंस में पोस्‍ट ग्रेजुएट थे.

    पंडित जवाहरलाल नेहरू समेत पहली लोकसभा के लिए चुने गए सांसदों की शपथ की कार्यवाही एक दिन में पूरी नहीं हो पाई थी.
    पंडित जवाहरलाल नेहरू समेत पहली लोकसभा के लिए चुने गए सांसदों की शपथ की कार्यवाही एक दिन में पूरी नहीं हो पाई थी.


    विदेश से ग्रेजुएट डिग्री हासिल करने वाले सांसदों की संख्‍या 15 से ज्‍यादा थी. इनमें बीआर अंबेडकर ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कैंब्रिज में ट्रिनिटी कॉलेज के हैरो स्कूल, मेजर जनरल हिम्मत सिंहजी ने ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी के माल्वेन कॉलेज, सरदार वल्लभभाई पटेल ने इंग्‍लैंड के मिडिल टेंपल, हृदयनाथ कुंजरू ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और एचजी मुदगल ने न्यूयॉर्क कॉलेज से लॉ में डिग्री हासिल की थी.

    कोई सदस्‍य 70 साल से ज्‍यादा उम्र का नहीं था
    पहली संसद में 20 फीसदी सांसदों की आयु 56 वर्ष या उससे अधिक थी. वहीं, 70 साल से ज्‍यादा उम्र का कोई भी सांसद पहली संसद में नहीं था. इसके अलावा 26 प्रतिशत सांसदों की आयु 40 वर्ष या उससे कम थी. कांग्रेस के अलावा भारतीय जनसंघ को पहली लोकसभा के लिए हुए चुनाव में 3, भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को 16, फारवर्ड ब्‍लॉक (एमजी) को 1, अखिल भारतीय हिंदू महासभा को 4, कृषिकर लोक पार्टी को 1, किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 9, राम राज्‍य परिषद को 3, रिवॉल्‍यूशनरी सोशलिस्‍ट पार्टी को 3, शेड्यूल कास्‍ट फेडरेशन को 2, सोशलिस्‍ट पार्टी को 12, अन्‍य को 34 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.

    कांग्रेस के बाद सबसे ज्‍यादा 37 निर्दलीय सांसद जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने काउंसिल ऑफ स्टेट्स की अध्यक्षता की. 23 अगस्त 1954 को राधाकृष्णन ने ही ऊपरी सदन का हिंदी नामकरण राज्यसभा किया. इसके 238 सदस्यों का चुनाव होता है, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नामित करते हैं. उस समय एसवी कृष्णमूर्ति राव राज्यसभा के उपसभापति थे.

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