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मध्यप्रदेश की धरती पर सिंधिया राजवंश से पहले इस मराठा सरदार ने गाड़े थे झंडे

News18Hindi
Updated: March 16, 2020, 6:12 PM IST
मध्यप्रदेश की धरती पर सिंधिया राजवंश से पहले इस मराठा सरदार ने गाड़े थे झंडे
मल्हार राव होल्कर को पहला मराठा क्षत्रप माना जाता है जिसने महाराष्ट्र से बाहर साम्राज्य विस्तार किया.

मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय सिंधिया राजवंश से ताल्लुक रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम की हर तरफ चर्चा है. मध्य प्रदेश के ही मालवा इलाके पर कभी होल्कर राजवंश का कब्जा हुआ करता था. मल्हार राव होल्कर पहले मराठा क्षत्रप थे जिसने महाराष्ट्र से बाहर साम्राज्य की ध्वज पताका फहराई थी.

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  • Last Updated: March 16, 2020, 6:12 PM IST
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मध्य प्रदेश की राजनीति (Madhya Pradesh Politics) में इस समय सबसे महत्वपूर्ण सरनेम की बात की जाए तो वो शायद 'सिंधिया' ही निकलेगा. हर तरफ सिर्फ सिंधिया की ही चर्चा है. सिंधिया यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया. दिलचस्प है कि मराठा साम्राज्य के छत्रप रहे सिंधिया राजवंश का मध्य प्रदेश की राजनीति में आजादी के बाद लगातार दखल रहा है. ये परिवार अपने रसूख और प्रभाव से राज्य और देश की राजनीति की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. लेकिन संयोग है कि जब सिंधिया राजवंश की मध्य प्रदेश में स्थापना हुई थी तकरीबन उसी समय राज्य के ही मालवा इलाके में एक मराठा सरदार ने अपना सिक्का चलाया था. उनका नाम था मल्हार राव होल्कर.

मल्हार राव वर्तमान इंदौर के शासक थे. और उन्हें शासक बनाया था बाजीराव पेशवा ने. वही बाजीराव पेशवा जिन्हें लेकर कुछ साल पहले आई फिल्म बाजीराव-मस्तानी ने देशभर में धूम मचाई थी. लेकिन फिर होल्कर परिवार को मध्य प्रदेश के मुख्य पटल से ओझल क्यों हो गया? बाजीराव ने मल्हार राव होल्कर को मालवा की सत्ता क्यों सौंपी थी? इन सवालों के जवाब जानेंगे क्योंकि आज मल्हार राव होल्कर का जन्मदिन भी है और मध्य प्रदेश की सियासत में सिंधिया की चर्चा जोरों पर है. और ग्वालियर में सिंधिया राजवंश की नींव भी तकरीबन उसी समय पड़ी जब मल्हार राव होल्कर ने मालवा पर शासन करना शुरू किया था.

मल्हार राव होल्कर की याद में उनकी बहू अहिल्या बाई होल्कर द्वारा बनवाई गई छतरी.


सामान्य परिवार से राजा तक का सफर



मल्हार राव होल्कर पैतृक तौर पर किसी शाही परिवार या बड़े सेनापति के परिवार से ताल्लुक नहीं रखते थे. 16 मार्च 1693 को उनका जन्म पुणे के एक सामान्य परिवार में हुआ था. उन्होंने पेशवा बाजीराव की सेना में काम करना शुरू किया और अपनी मेधा के दम पर जल्द ही सरदार बने. वो पहले मराठा शासक थे जिसने महाराष्ट्र से बाहर साम्राज्य का झंडा बुलंद किया.

कहा जाता है कि निजाम पर मराठों की जीत में मल्हार राव होल्कर का बड़ा योगदान था. इसी से प्रसन्न होकर बाजीराव ने उन्हें मालवा का सूबेदार बनाया था. और यहीं से नींव पड़ी होल्कर राजवंश की. साल 1736 में दिल्ली पर मराठों की महत्वपूर्ण जीत में प्रमुख कमांडर के तौर पर शामिल रहे. इसके बाद मुगलों के खिलाफ लड़ाई हो या फिर निजामों के, मल्हार राव होल्कर ने मराठाओं का झंडा बुलंद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मल्हाव राव के शासन के समय में ही मराठा साम्राज्य अपनी ऊंचाइयों को छू रहा था. अगर मराठा साम्राज्य में पेशवाई को महत्वपूर्ण माना जाता है तो बाजीराव पेशवा के आदेशों को अमलीजामा पहनाने वालों में मल्हार राव का नाम सबसे आगे था.

1818 में अंग्रेजों से युद्ध में हार
मल्हार राव की मृत्यु 1766 में हुई थी और उनकी मौत के बाद पौत्र ने गद्दी संभाली थी क्योंकि बेटे की मौत पहले ही चुकी थी. लेकिन कुछ ही समय बाद पौत्र की भी मृत्यु हो गई और मल्हार राव की बहू अहिल्या बाई होल्कर ने इंदौर का शासन संभाला था. इसके बाद मराठाओं और अंग्रेजों के बीच वर्चस्व और गद्दी की जंग चलती रही. लेकिन 1818 में तीसरे मराठा-ब्रिटिश युद्ध में होल्कर राजवंश की बड़े भूभाग पर अंग्रेजों का राज कायम हो गया. इसके बाद भी गद्दी पर कुछ वारिस रहे लेकिन वो उतने प्रभावी नहीं थे.

Scindia

मध्य प्रदेश में कई जगह हैं निशानियां
वर्तमान भारतीय राजनीति में हम देखते हैं कि कई राजपरिवारों का दबदबा है. मध्य प्रदेश की सियासत में सिंधिया परिवार का दबदबा किसी से छिपा नहीं है. आजादी के बाद राज्य की राजनीति परिवार के इर्दगिर्द घूमती है. लेकिन होल्कर वंश का दबदबा तीसरे मराठा-ब्रिटिश युद्ध के साथ ही समाप्त हो गया. हालांकि आज भी मालवा के इलाके में इस राजवंश को लोग बहुत इज्जत से नवाजते हैं. कई किले और निशानियां मल्हार राव के शौर्य पराक्रम की कहानियां कहते हैं.
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First published: March 16, 2020, 5:41 PM IST
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