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मृत तारे का चक्कर लगाते बाह्यग्रह ने दी सौरमंडल के बारे में जानकारी

मृत तारे का चक्कर लगाते बाह्यग्रह ने दी सौरमंडल के बारे में जानकारी

इस बाह्यग्रह (Exoplanet) की खासियत यह है कि यह गुरु के आकार का होने के साथ अपने सौरमंडल में हमारे गुरु की तरह स्थित भी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इस बाह्यग्रह (Exoplanet) की खासियत यह है कि यह गुरु के आकार का होने के साथ अपने सौरमंडल में हमारे गुरु की तरह स्थित भी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

गुरु ग्रह (Jupiter) के आकार का एक बाह्यग्रह (Exoplanet) पृथ्वी से 6500 प्रकाश वर्ष दूर अपने सूर्य के मरने (White Dwarf) के बाद भी उसका चक्कर लगा रहा है.

    क्या हमारे सौरमंडल (Solar System) में सूर्य के मरने से पहले उसके सारे ग्रह खत्म हो जाएंगे. आमतौर पर अब तक यही माना जाता रहा है कि ऐसा ही होगा. यानि सूर्य के मरने से पहले  सभी ग्रह खत्म हो जाएंगे. लेकिन नए अवलोकन बताते हैं कि ऐसा जरूरी नहीं हैं. इसकी वजह यह है कि इस अवलोकन में वैज्ञानिकों इसके ठीक उल्टी बात देखने को मिली है. उन्होंने गुरु ग्रह की तरह दिखाई देने वाला ऐसा ग्रह (Exoplanet) खोजा है जो अपने तारे के मरने के बाद भी उसका चक्कर लगा रहा है, यानि वह एक सफेद बौने (White Dwarf) का चक्कर लगा रहा है.

    पहले ही कही जा चुकी है ऐसे ग्रहों के होने की बात
    इससे पहले के मॉडल भी इस तरह के ग्रहों के होने की बात कह चुके हैं, लेकिन ऐसे ग्रह के होने की पुष्टि अब हुई है.इस ग्रह की खासियत यह है कि ये हमसे 6500 प्रकाशवर्ष दूर पर स्थित है और उसका आकार गुरू ग्रह की तरह तो है  ही अपने ग्रह तंत्र में भी उसकी वजह वही स्थिति है जो हमारे सौरमंडल में सूर्य की स्थिति है.

    माइग्रोलेंसिंग तकनीक
    वैज्ञानिकों ने माइक्रोलेंसिंग तकनीक का उपयोग कर सबसे पहले किए गए अवलोकन के आधार पर MOA-2010-BLG-477Lb नाम का ग्रह को खोजा है. यह तकनीक एक तरह की ग्रैविटेशनल लेंसिंग ही है जिसमें किसी तारे से आने वाले प्रकाश की दिशा ग्रह के गुरुत्व के कारण बदल जाती है. जिससे एक खराब दृश्य बन जाता है और तस्वीर गड़बड़ हो जाती है.

    ऐसा हमारे सौरमंडल भी है संभव
    इस वजह से एक परेशानी यह भी होती है कि आकाश में एक ही समय पर अलग अलग स्थानों पर एक पिंड की बहुत सारी तस्वीरें दिखने लगती हैं. लेकिन माइक्रोलेंसिग से यह पता चला कि ऐसा ही कुछ हमारे सौरमंडल में भी हो सकता है जब सूर्य मर कर बौने तारे में तब्दील होगा, तब भी कुछ ग्रहों का अस्तित्व बना रहेगा.

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    अभी तक कभी नहीं देखा गया था कि कोई तारा सफेद बौने (White Dwarf) में बदला और उसका ग्रह भी उसके बाद भी उससे जुड़ा रहा. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    इससे पहले भी दिखा था ऐसा एक और ग्रह पर
    ​हमारा सूर्य करीब 5 अरब सालों बाद मर कर सफेद बौने में बदल जाएगा. इस अध्ययन के नतीजे नेचर जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. इससे पहले पिछले साल ही खगोलविदों की दूसरी टीम ने सफेद बौने का चक्कर लगाने वाले ग्रह की खोज की थी. लेकिन वह WD 1856b अपने तारे की दूरी से 50 गुना ज्यादा दूरी पर था जब वह तारा सफेद बौने में बदल गया था.

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    सूर्य भी बनेगा सफेद बौना
    लेकिन यह ग्रह हमारे सूर्य के भार से 14 गुना ज्यादा भारी है और फिलहाल सफेद बौने का हर 24 घंटों में एक चक्कर लगा लेता है. लेकिन जब यह तारा सफेद बौने में बदला, तब MOA-2010-BLG-477Lb अपनी ही कक्षा में कायम रहा. खुद हमारे सूर्य का भी यही अंजाम होना तय है जब उसकी पूरी हाइड्रोजन हीलियम में बदल जाएगी और वह एक विशाल लाल तारे में बदल जाएगा.

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    5 अरब साल बाद हमारा सूर्य भी सफेद बौने (White Dwarf) बन जाएगा. (फाइल फोटो)

    कैसे होगा यह
    लाल तारे में बदलने के बाद सूर्य के केंद्र में कार्बन और ऑक्सीजन जमा हो जाएगी. इसके बाद नाभकीय संलयन खत्म होने के बाद जब वह मरेगा, तो उसकी बाहरी परतें खत्म होने लगेंगी और कार्बन ऑक्सीजन केंद्र के बाहर नेबुला बन जाएगा जो सफेद बैना कहलाएगा. सफेद बौने जब बनते हैं तो बहुत ही ज्यादा गर्म होते हैं, लेकिन उनकी खुद की कोई ऊर्जा नहीं होती तो वे ठंडे होने लगते हैं.

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    2010 में खोजा गया था इसे
    MOA-2010-BLG-477Lb ग्रह को सबसे पहले माइक्रोलेंसिंग के जरिए ही देखा जा सका था. बाह्यग्रहों को पहचानने के लिए इस तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाता है. MOA-2010-BLG-477 की घटना सबसे पहले न्यूजीलैंड के माउंट जॉन वेधशाला में 2010 में अवलोकित की गई थी. इसके बाद इसे दुनिया के 20 दूसरे टेलीस्कोप ने भी देखा था.

    Tags: Research, Science, Solar system, Space

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