कैसा होगा Wi-Fi वाला रोबोटिक स्पाइडर रोवर, जो ब्रिटेन भेजेगा चांद पर

ब्रिटेन (Britain)का यह स्पाइडर रोवर (Spider Rover) अपनी तरह का पहला रोवर होगा. (तस्वीर: @SpacebitOne)

ब्रिटेन (Britain)का यह स्पाइडर रोवर (Spider Rover) अपनी तरह का पहला रोवर होगा. (तस्वीर: @SpacebitOne)

अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) में एक बड़ी छलांग लगाते हुए ब्रिटेन (Britain) अगले सास चंद्रमा (Moon) पर एक रोबोटिक स्पाइडर रोवर (Robotic Spider Rover) भेजेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 3, 2021, 6:45 AM IST
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ब्रिटेन (Britain) अगले साल अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) की दिशा में एक बड़ा कदम रखने की तैयारी में हैं. 2021 की गर्मियों में उसका पहला रोबोटिक स्पाइडर रोवर (Robotic Spider Rover) चंद्रमा (Moon) पर कदम रखेगा. यह रोवर लंदन की रोबोटिक फर्म स्पेसबिट (SpaceBit) के जरिए चंद्रमा पर पहुंचाया जाएगा. ब्रिटेन का यह कदम उसके यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) पर निर्भरता खत्म करने की योजना का हिस्सा माना जा रहा है.

अगले साल गर्मियों में

टेलीग्राफ की रिपोरट के मुताबिक स्पेस बिट नासा के साथ ब्रिटिश प्रोब पर काम कर रहा है जिसे आसागुमो (Asagumo) नाम दिया गया है. यह प्रोब साल 2021 की गर्मियों में प्रक्षेपित किया जा सकता है. यह पहली बार होगा जब कोई ब्रिटिश रोवर चंद्रमा पर पहुंचेगा. यह आकार में भी काफी छोटा होगा.

पहियों की जगह पैर
इस मिशन के लिए स्पेसबिट के इंजीनियर रोवर के पहियों की जगह उसके पैर को बनाएंगे. इसका कारम यह है कि उसे चंद्रमा की सतह पर चलने फिरने में किसी तरह की परेशानी ना हो. इस तरह के पैरों से रोवर को लावा ट्यूब में आने जाने में भी किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी.

इस तरह का पहला रोवर

यह दुनिया का पहला रोवर होगा जो चंद्रमा पर पैरों से चलेगा. अब तक चंद्रमा पर जितने भी रोवर भेजे गए हैं वे सभी पहियों पर चलते हैं. पैरों का इस्तेमाल करने का उद्देश्य यह भी कि रोवर लावा ट्यूब में जा कर यह पता कर सके कि क्या वे जगहें इंसान के रहने लायक हैं या नहीं. चंद्रमा पर लावा ट्यूब सैकड़ों फीट चौड़ी हैं. वहां मॉरियस हिल इलाके में मिली एक लावा ट्यूब एक हजार मीटर लंबी और चौड़ी है.



लावा ट्यूब से उम्मीदलावा ट्यूब इंसानों को अंतरिक्ष के विकिरण से बचाने में सक्षम होंगी. जिससे वे चंद्रमा पर इंसानों के रहने के लिए पहली पसंद होंगी. जिस तरह से अंतरिक्ष, चंद्रमा और मंगल पर अभियान भेजे जा रहे हैं, माना जा रहा है कि वह दिन दूर नहीं जब चंद्रमा और मंगल पर भी इंसानों की बस्ती बस सकती है. इस तरह की योजनाओं पर अरबों डॉलर खर्च होने भी लगे हैं.Astronomy: ब्लैक होल के नाम रहा था साल 2020, जानिए क्योंकितना बड़ा है आसागुमोसासागुमो केवल 10 सेमी ही लंबा है, इसलिए यह चंद्रमा की सतह पर आसानी से चल सकता है. डूबने से बचने के लिए रोवर में चार पैर हैं और निचला हिस्सा चौड़ा पैड है जो स्की पोल्स की तरह है. स्पेसबिट के सीईओ और संस्थापक पावल तानास्युक का कहना है कि स्पेस बिट भविष्य में चंद्रमा पर लौटने की योजना बना रहा है जिसके लिए उन्हें वहां रहने के लिए जगह चाहिए होगी. उन्हें उम्मीद है कि आसागुमो इसमें अहम भूमिका निभा सकता है.

कैसे आया यह विचार

तानास्युक का ही विचार था कि रोवर में पहियों की जगह पैरों का उपयोग हो. यह विचार उनके दिमाग में तब आया ज वे डेविड बोवी का गाना द राइज एंड फॉल ऑफ जिगी स्टारडल एंड स्पाइडर्स फ्रॉम मार्स सुन रहे थे. यह विचार तब सामने आया जब उन्होंने जापानी स्पेस एजेंसी जाक्सा से आए मित्र से चंद्रम या मंगल पर स्पाइडर रोबोट के विचार का जिक्र किया था.

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तानास्युक ने जब अपने मित्र को यह विचार बताया तो उनके मित्र ने आसागुमो का जिक्र किया. यह एक जापानी कहावत है जिसमें सुबह की मकड़ी अच्छा भाग्य लाती है. इसकी जिक्र के आधार पर रोवर का नाम भी आसागुमो तय कर दिया गया.
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