इतिहास में आज पहली बार- भारत में विमान वाहक पोत ने देना शुरू की थी सेवाएं

आजादी के 14 साल बाद भारतीय नौसेना (Indian Navy) को पहला विमान वाहक युद्ध पोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) मिला था. (फाइल फोटो)

आजादी के 14 साल बाद भारतीय नौसेना (Indian Navy) को पहला विमान वाहक युद्ध पोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) मिला था. (फाइल फोटो)

4 मार्च 1961 में पहली बार भारतीय नौसेना (Indian Navy) में देश का पहला विमान वाहक पोत (Aircraft carrier) आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को शामिल किया गया था. इस पोत ने भारतीय नौसेना की ताकत में बहुत इजाफा किया था.

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भा4 मार्च भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए एक अहम दिन है. इस दिन साल 1961 देश की नौसेना को एक विमान वाहक पोत (Aircraft Carrier) मिला था. आज भारत जैसे देश की नौसेना को बिना विमान वाहक पोत के कल्पना करना भी मुश्किल है. लेकिन आजादी के बाद भारत को विमान वाहक पोत मिलने में काफी समय लगा था. 4 मार्च 1961 को आईएनसे विक्रांत भारतीय नौसेना मे शामिल कर लिया गया था. इसके आने के चार साल बाद ही इस पोत की अहमियत दिखाई दे गई थी और 1965 और 1971 के भारत –पाक युद्धों ( में पाकिस्तानी सेना में खौफ पैदा कर दिया था.

ब्रिटेन से खरीदा था यह पोत
यह पोत भारत ने 1957 में ब्रिटेन की रॉयल नेवी से खरीदा था उस समय उसका निर्माण पूरा नहीं हुआ था. इसके पूरा होते होते 1961 तक का समय लग गया था. उस समय इसे 4 मार्च 1961 को आईएनएस यानि इंडियन नेवल शिप विजय लक्ष्मी पंडित नाम से नौसेना में शामिल किया गया था. बाद में उसका नाम आईएनएस विक्रांत कर दिया गया.

ब्रिटिश नौसेना में शामिल नहीं किया जा सका था इसे
आईएनएस विक्रांत का पहले एसएमएस (हर मैजिस्टी शिप) हर्क्यूलिस नाम था. यह ब्रिटिश नौसेना में मेजेस्टिक क्लास के पोत के तौर पर 1945 में बनाया गया था, लेकिन कभी उसे ब्रिटिश नौसेना में शामिल नहीं किया जा सका था. क्योंकि जिस द्वितीय विश्वयुद्ध के लिए इसका निर्माण किया गया था. उसके तैयार होने से पहले ही युद्ध ही खत्म हो गया था. इसे भारत ने 1957 में खरीद लिया गया और भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया गया.



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आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को 1957 में ब्रिटेन से खरीदा गया था. (फाइल फोटो)


1965 के युद्ध में खौफ
1965 के भारत-पाक युद्ध में आईएनएस विक्रांत पाकिस्तानी नौसेना के लिए मुसीबत माना जा रहा था. पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने आईएनएस विक्रांत को तबाह कर दिया है. जब कि वह मुंबई में कुछ तब्दीलियों से गुजर रहा था. बेशक भारत के बार विमान वाहक पोत पाकिस्तान के बहुत बड़ा खतरा था. उसका होना ही पाकिस्तान के खोफजदा होने के लिए काफी था. यह पाकिस्तान के बयानों से साफ दिखता भी रहा.

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1971 के युद्ध में पाकिस्तान की नामामी
कहा जाता है कि 1971 के भारत पाकिस्तान के युद्ध में भी इस विमान वाहक पोत में पाकिस्तान की नाक में दम कर दिया था और पाकिस्तान हर कीमत पर इसे खत्म करना चाहता था. इस पोत के बायलर में समस्या होने की कारण इसे सीमित गति से चलना पड़ता था जो इसकी एक कमजोरी हो गई थी. फिर भी 1971 के युद्ध में जब पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच संपर्क का समुद्री रास्ता ही रह गया था, तब आईएनएस विक्रांत ही पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया था.

आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को नए रूप में भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है.


ऐसे दिया पाक को धोखा
इस युद्ध में पाकिस्तान ने आईएनस विक्रांत को खत्म करने के लिए पनडुब्बी पीएनएस गाजी को भेजा, लेकिन भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान को चकमा देकर आईएनएस राजपूत को आईएनएस विक्रांत बना कर भेज दिया. जब दोनों का आमना सामना हुआ तो आईएनएस राजपूत ने गाजी को तबाह कर पाकिस्तान को लाचार कर दिया और पश्चिमी पाकिस्तान से जो मदद पूर्वी पाकिस्तन को भेजी जा सकती थी वह नहीं भेजी जा सकी जिसके बाद बांग्लादेश के निर्माण का रास्ता साफ हुआ.

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36 साल तक सेवाएं देने के बाद इसे 31 जनवरी 1997 को भारतीय नौसेना से डिकमीशन्ड कर दिया गया. इस जहाज की लंबाई 260 मीटर और अधिकतम चौड़ाई 60 मीटर है. 1997 में नौसेना से हटने के बाद  यह मुंबई के म्यूजियम में रखा गया अब इसी नाम से एक अन्य उन्नत एयर क्राफ कैरियर भारतीय नौसेना के लिए तैयार हो रहा है.
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