जब भारत में पहली बार हुआ समुद्र से जमीन पर हमला करने वाली ब्रह्मोस का परीक्षण

ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile) का समुद्र से जमीन पर मार करने वाला वेरिएंट का पहला ही परीक्षण सफल हुआ. (फाइल फोटो)

ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile) का समुद्र से जमीन पर मार करने वाला वेरिएंट का पहला ही परीक्षण सफल हुआ. (फाइल फोटो)

भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने साल 5 मार्च 2008 को देश की पहली समुद्र से जमीन से मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile) का सफल परीक्षण किया. इससे नौसेना की क्षमता कई गुना बढ़ गई थी.

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ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile) भारतीय सेना (Indian Defence Force)  में एक अहम स्थान रखती है. दुनिया की सबसे तेज मध्य रेंज वाली सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल (Supersonic Cruise Missile) है. इसकी खास बात यह है कि इसे पनडुब्बी, लड़ाकू विमान और जमीन तीनों जगहों से प्रक्षेपित किया जा सकता है. इसके वेरिएंट के परीक्षण भारतीय सेना के इतिहास में एक अहम पड़ाव के तौर पर जाने जाते हैं. इसलिए 5 मार्च का दिन अहम है क्योंकि साल 2008 में पहली बार समुद्र से जमीन पर हमले की क्षमता का सफल परीक्षण किया था.

किसने विकसित किया था ब्रह्मोस को
ब्रह्मोस भारतीय डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) और रूस के फेडरल स्टेट यूनिटरी एंटरप्राइज एनपीए मोशिनोस्त्रेनिया (NPOM) के सयुंक्त प्रयास से 1998 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत विकसित की गई थी. इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोसक्वा नदी के नाम को मिला कर ब्रह्मोस रखा गया है.

ब्रह्मोस मिसाइल का नया संस्करण
साल 2004 के बाद से साल 2008 तक ब्रह्मोस के 15 सफल परीक्षण हो चुके थे जिसके बाद भारतीय सेना में जमीन से जमीन और समुद्र से समुद्र में मार करने वाले संस्करण भारतीय सेना में शामिल हो चुके थे. 5 मार्च 2008 को पहली बार समुद्र से जमीन पर मार करने वाले संस्करण का सफल परीक्षण हुआ जिससे भारतीय नौसेना की ताकत में एक और इजाफा हो गया.



पहली बार हुआ ऐसा परीक्षण
5 मार्च 2008 को हुए परीक्षण में यह सुपरसॉनिक मिसाइल ने आईएनस राजपूत से प्रक्षेपित किया गया और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक निश्चित निशाने पर सटीकता से जा लगा.  यह ना केवल ब्रह्मोस मिसाइल का समुद्र से जमीन पर पहला परीक्षण बल्कि देश का ही समुद्र से जमीन पर पहला मिसाइल परीक्षण था.

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यह इस तरह का ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile) का ही नहीं बल्कि देश का पहला मिसाइल परीक्षण था. . (फाइल फोटो)


बहुत ज्यादा अहमित क्यों थी इस परीक्षण की
यह मिसाइल उस परीक्षण के सभी निर्धारित पैमानों पर खरी उतरी थी. समुद्र से जमीन पर मारने की क्षमता एक देश के लिए बहुत अहम होती है जो ब्रह्मोस जैसी शक्तिशाली मिसाइल के होते हुए भी भारतीय नौसेना के पास नहीं थी. यह क्षमता आने से भारतीय नौसेना अब दुश्मन के कमांड पोस्ट, एयर फील्ड जो नौसेना के लिए बहुत बड़ा खतरा होते हैं, और इंफ्रास्ट्रक्चर हब को समुद्र से ही नष्ट करने में सक्षम हो गई है.

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ऐसी सुरक्षा के बीच हुआ था परीक्षण
आईएनएस राजपूत से दागी गई परीक्षण मिसाइल ने उस समय 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति निशाने को सटीकता से भेदा था. इसके लिए अंडमान निकोबार कमांड ने दस जहाज, तीन विमान, और तीन हेलिकॉप्टर इस अभियान के सहयोग के लिए तैनात किए थे.

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5 मार्च 2008 को ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile) का यह परीक्षण अंडमान निकोबार द्वीपों के पास किया गया. (फाइल फोटो)


तीनों सेनाओं का हिस्सा है ब्रह्मोस
ब्रह्मोस मिसाइल अब भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों अंगों का हिस्सा बन चुकी है. इसके उन्नत संस्करण की तैयारी हो रही है जिसे ब्रह्मोस 2 नाम दिया गया है. यह एक हाइपर सॉनिक मिसाइल होगी. इसकी रेंज तो ब्रह्मोस 1 की तरह केवल 290 किलोमीटर ही है. लेकिन उसकी गति पिछले संस्करण से दोगुना होगी.

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इसके अलावा ब्रह्मोस NG यानि नेक्स्ट जनरेशन या मिनी ब्रह्मोस को भी विकसित किया जा रहा है जिसे खास तौर सुखोई , मिग, तेजस, राफेल और अन्य लड़ाकू विमानों के लिए विकसित किया जा रहा है. यह मिसाइस वर्तमान मिसाइल की आधे आकार की होगी. इसे राडार से पकड़ना बहुत मुशकिल होगा.
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